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Amitabh Bachchan Shaan Movie Unknown Facts : यह कहानी भारतीय सिनेमा की उस फिल्म की जिसने सुपरहिट मूवी से ज्यादा कमाई की लेकिन फिर भी उसे फ्लॉप करार दिया गया. यह बात अलग है कि बाद में इस फिल्म के वीडियो कैसेट खरीदने के लिए शहरों में लूट मच गई. इस फिल्म की तुलना 1975 की ऑल टाइम ग्रेट फिल्म ‘शोले’ से भी की गई. यह तुलना गलत भी नहीं थी. फिल्म की स्टार कास्ट, कहानी, विलेन सबकुछ ‘शोले’ जैसा ही था. इस फिल्म की गिनती आज कल्ट क्लासिक मूवी में होती है. मूवी के विलेन का नाम आज भी हर सिनेमा प्रेमी के दिल-दिमाग में बसा हुआ है. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं…..
साल था 1980. दिसंबर का महीना था. कड़ाके की ठंड के बीच दिल्ली-कोलकाता शहर के सिनेमाघरों के बाहर लंबी लाइनें लगी हुई थीं. दर्शक सिनेमाघरों में उस फिल्म की टिकट खरीदने के लिए आए थे, जिसे दूसरी ‘शोले’ कहा जा रहा था. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन का वही अंदाज था. स्टोरी सलीम-जावेद ने ही लिखी थी. डायरेक्टर रमेश सिप्पी थे. प्रोड्यूसर जीपी सिप्पी थे. शोले की पूरी टीम ने यह फिल्म बनाई थी. स्टार कास्ट जरूर अलग थी. इस फिल्म का नाम ‘शान’ था जो कि 12 दिसंबर 1980 को रिलीज हुई थी. ज्यादातर सिनेमाघरों में टिकट एडवांस में ही बिक चुके थे.

पहला हफ्ता तो हाउसफुल गुजरा लेकिन दूसरे हफ्ते से कुछ सिनेमाघरों से भीड़ छिटकनी शुरू हुई. फिर क्या था, यह खबर जंगल में आग की तरह फैली. तीसरे हफ्ते में फिल्म जर्जर इमारत की तरह भरभराने लगी. हाउसफुल के बोर्ड सिनेमाघरों से हटने लगे. फिल्म को लेकर मीडिया में निगेटिव कैंपेन शुरू हुआ आलोचक फिल्म की खुलकर कमियां गिनाने लगे. सबसे बड़े बजट, सबसे बड़े स्टारकास्ट, सबसे बड़ी उम्मीदों की यह फिल्म 1980 में कमाई के मामले में 5वें नंबर पर रही. वैसे यह साल फिरोज खान-विनोद खन्ना का था. उनकी कुर्बानी ने बॉक्स ऑफिस पर सबसे ज्यादा पैसे छापे थे.

शोले फिल्म की अपार सफलता के बाद रमेश सिप्पी, सलीम-जावेद की जोड़ी से बॉलीवुड इंडस्ट्री को बहुत उम्मीदें थीं. रमेश सिप्पी ने अगली कहानी पर काम शुरू किया. सलीम-जावेद से साफ कहा कि ऐसी कहानी लिखिए जो शोले से भी बड़ी हो. हर पहलू से फिल्म ‘शोले’ से बड़ी हो. फिल्म की स्टार कास्ट फाइनल हुई. धर्मेंद्र-हेमा मालिनी, संजीव कुमार और अमजद खान फिल्म का हिस्सा नहीं बन पाए. ‘शान’ एक एक्शन क्राइम फिल्म थी जिसमें सुनील दत्त, शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, राखी गुलजार, परवीन बॉबी, बिंदिया गोस्वामी, जॉनी वॉकर और कुलभूषण खरबंदा जैसे सितारे नजर आए. कुलभूषण खरबंदा ने ‘शाकाल’ का रोल निभाया था. इस किरदार को उन्होंने अमर कर दिया. फिल्म का मुहुर्त 14 सितंबर 1977 को हुआ था. ‘शोले’ गांव की कहानी थी तो ‘शान’ की स्टोरी शहर पर बेस्ड थी.
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‘शान’ फिल्म का म्यूजिक आरडी बर्मन ने कंपोज किया था. फिल्म में कुल 7 गाने रखे गए थे. फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट था. इस’यम्मा यम्मा’, ‘प्यार करने वाले जीते हैं शान से’ और ‘जानू मेरी जान’ जैसे गाने सदाबहार गानों सजी इस फिल्म के गीत आनंद बख्शी ने लिखा था. मोहम्मद रफी ने अपनी खूबसूरत आवाज से गाने में चार चांद लगा दिए थे. ‘नाम अब्दुल है मेरा’ गाना मजहर खान पर फिल्माया गया था. मजहर खान से ही जीनत अमान ने शादी रचाई थी.

‘शान’ फिल्म के सदाबहार गाने ‘प्यार करने वाले जीते हैं शान से’ की शूटिंग के दौरान पहली बार परवीन बॉबी को ‘पैनिक अटैक’ आया था. वो दिमागी बीमारी से जूझ रही थी. उन्हें लग रहा था कि झूमर उन पर गिराया जाएगा. रमेश सिप्पी ने बहुत दिनों तक सेट वैसा ही रखा. कई दिनों के लंबे इंतजार के बाद गाना पूरा हुआ. शान पर जेम्स बॉन्ड की फिल्मों का असर था. शानदार सेट्स, अनोखा विलेन, उसका लुक, बोलने का अंदाज, उसका स्टाइल सबकुछ जेम्स बॉन्ड की फिल्मों जैसा था. फिल्म के विलेन का लुक-थीम 1986 की हॉलीवुड फिल्म ‘यू ओनली लिव्ड ट्वाइस’ से इंस्पायर्ड था.

विलेन ‘शाकाल’ के आइलैंड को दिखाने के लिए अलग म्यूजिक तैयार किया गया था. ‘शान’ में शाकाल का जो अड्डा दिखाया गया वो स्टेप होल्म था. यह ब्रिस्टल चैनल में स्थित एक छोटा-निर्जन ब्रिटिश द्वीप है जो समरसेट, इंग्लैंड के तट से दूर है. कुलभूषण खरबंदा के सभी शॉट्स मुंबई में ही फिल्माए गए थे. शान फिल्म की एडिटिंग, कैमरा वर्क, गीत-संगीत सबकुछ बेमिसाल था लेकिन फिल्म में इमोशन नहीं था. फिल्म में ऐसा कुछ नहीं था जिससे दर्शक जुड़ाव महसूस करें. यही कमी फिल्म पर भारी पड़ी. फिल्म के प्रिंट लंदन में प्रोसेस हुए थे. सभी कलाकारों की कड़ी मेहनत के बाद फिल्म तैयार की गई.

शान फिल्म को मुंबई में पहले हफ्ते में 100 फीसदी ओपनिंग मिली थी. दूसरे हफ्ते में 89% और तीसरे हफ्ते में सिनेमाघर खाली होने लगे थे. शान फिल्म का बजट करीब 4.25 करोड़ था. मूवी ने इतना की कलेक्शन किया था. ऐसे में फिल्म बेलो एवरेज (औसत से कम) करार दी गई. महंगा सेट, बड़ी स्टारकास्ट दर्शकों को लुभाने में कामयाब नहीं हो सके. हालांकि यह फिल्म रिपीट रन में बहुत कामयाब रही. बाद के वर्षों में इस फिल्म को खूब पसंद किया गया. फिल्म के वीडियो कैसेट खरीदने के लिए होड़ मच गई. आज इस फिल्म की गिनती कल्ट क्लासिक फिल्मों में होती है.


