ईरान-अमेरिका जंग में डोनाल्ड ट्रंप फंस चुके हैं. ईरान जंग पर अमेरिका का मकसद अब भी अधूरा है. न तो रिजीम चेंज हुआ और न ही परमाणु हथियार का खतरा टला है. खुद अमेरिका वालों को भी अब डोनाल्ड ट्रंप पर यकीन नहीं है. अमेरिकी अधिकारियों का अब मानना है कि ईरान युद्ध से अमेरिका बड़ा रणनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएगा, जो अमेरिका-इजरायल सैन्य अभियान की शुरुआत में संभव लग रहा था. अमेरिका का मकसद था ईरान की धार्मिक सत्ता को गिराना और तेहरान को हमेशा के लिए परमाणु हथियार से दूर रखना. मगर अमेरिका के ये दोनों मकसद कामयाब होते नहीं दिख रहे हैं.
वॉशिंगटन पोस्ट ने रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज की खाड़ी को फिर से खोलना इस युद्ध का सबसे बड़ा उद्देश्य बन गया है. सुरक्षा अधिकारियों ने अब यह आकलन करना शुरू कर दिया है कि वास्तव में कौन से परिणाम हासिल किए जा सकते हैं. होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी है. यह 20 फीसदी ईंधन का रास्ता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की पकड़ को इस अहम शिपिंग लेन यानी होर्मुज से तोड़ना अमेरिका को युद्ध को समाप्त करने का मौका दे सकता है. इससे ऊर्जा संकट कम हो सकता है और भविष्य में हमलों के खिलाफ ईरान की ताकत भी घट सकती है.
रिपोर्ट में शामिल सीनियर इजरायली अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि अगर ईरान फिर से बैलिस्टिक मिसाइल बनाना शुरू करता है या परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में बढ़ता है तो आगे सैन्य कार्रवाई संभव है. इससे तेहरान की दीर्घकालिक क्षमताओं को लेकर चिंता बनी हुई है.
ट्रंप ने समझौते की संभावना जताई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि वाशिंगटन एक ईरानी नेता के संपर्क में है और दावा किया कि ईरान अब युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता करना चाहता है. उन्होंने ईरान को होर्मुज की खाड़ी फिर से खोलने के लिए समय सीमा भी बढ़ा दी है. अब ईरान के पास इस पर अमल करने के लिए पांच दिन और हैं, वरना उसके पावर प्लांट्स पर हमला हो सकता है.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है और इस हफ्ते समझौता होने की बहुत अच्छी संभावना है. उन्होंने बताया कि इस बातचीत में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर शामिल हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि कौन सा ईरानी अधिकारी इसमें शामिल था. हालांकि, ईरान ने इन बातचीतों से इनकार किया है.
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर कलीबाफ ने कहा, ‘अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है.’ उन्होंने कहा, ‘फर्जी खबरों का इस्तेमाल वित्तीय और तेल बाजारों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है.’
परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है मुख्य मुद्दा
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर समझौता होता है तो अमेरिका ईरान के समृद्ध यूरेनियम पर नियंत्रण चाहता है, जो उसके परमाणु कार्यक्रम का केंद्र है. ईरान लगातार कहता रहा है कि उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम समृद्ध करने का अधिकार है और उसने अपनी यूरेनियम स्टॉकपाइल छोड़ने की मांग को खारिज किया है.
एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ईरान ने नौ परमाणु हथियारों के लिए आवश्यक हथियार-ग्रेड यूरेनियम बनाने के लिए 99 प्रतिशत सेंट्रीफ्यूज कार्य पूरा कर लिया है जो हथियार नियंत्रण और फ्यूजन एनर्जी पर शोध करते हैं. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का अनुमान है कि जून 2025 तक ईरान के पास 440.9 किलोग्राम उच्च स्तर का समृद्ध यूरेनियम है.
परमाणु मुद्दा अब भी बड़ा विवाद बना हुआ है, जबकि द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा संघर्ष के जरिए ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से हमेशा के लिए रोकना संभव नहीं है. (सीएनए-न्यूज18)


