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Iran War : ईरान युद्ध में अमेरिका के कितने लड़ाकू विमान गिरे, क्या खुल गई डोनाल्ड ट्रंप की पोल?

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Published On: March 22, 2026

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वाशिंगटन. खुद को दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य रणनीतिकार बताने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय गहरे सदमे में हैं. साल 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय विमानों के गिराये जाने पर बड़े-बड़े दावे करने वाले डोनाल्ड ट्रंप अब अपने ही विमानों के गिरने पर खामोश हैं. रिपोर्ट के मुताबिक ईरान-इजराय युद्ध के शुरुआती 21 दिनों में ही अमेरिका ने कुल 16 मिलिट्री एयरक्राफ्ट खो दिए हैं, जिनमें एफ-35 सहित 4 लड़ाकू विमान और 12 एमक्यू-9 रीपर (MQ-9 Reaper) ड्रोन शामिल हैं. खास बात यह है कि अमेरिका ने इन मिलिट्री एयरक्राफ्ट में ही तकरीबन 5000 करोड़ रुपये का नुकसान अबी तक उठाया है. इस रकम में ईरान द्वारा मिडिल-ईस्ट के देशों में अमेरिकी बेस पर हुए हमले का नुकसान का जिक्र नहीं है. ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे की पोल खुल गई है, जो उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान साल 2025 में किया था.
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ अमेरिका कह रहा है कि ईरान की मिसाइल ताकत खत्म हो रही है, वहीं दूसरी ओर उसे अब तक 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा का आर्थिक फटका लग चुका है. एक केसी-135 टैंकर की कीमत 800 करोड़ और एक एफ-15 की कीमत 900 करोड़ रुपये है. अमेरिका इन नुकसानों को ‘हादसा’ बताकर छिपाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि ईरान ने कतर से लेकर यूएई तक फैले अमेरिकी रडार नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है.
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रिपोर्ट भी चेतावनी दे रही है कि गोला-बारूद की भारी खपत अमेरिकी नौसेना को कई वर्षों के लिए कमजोर कर सकती है. आज पूरी दुनिया में एक ही सवाल है कि क्या यह जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है? जिस ईरान के पास मजबूत वायुसेना नहीं थी, उसने अमेरिका के F-35 ‘स्टेल्थ’ फाइटर को कैसे ट्रैक किया? इसके पीछे की सबसे बड़ी थ्योरी रूस और चीन की तकनीक है. माना जा रहा है कि ईरान ने अपने सय्याद-4 (Sayyad-4) लंबी दूरी की मिसाइलों को अत्याधुनिक रडार से लैस किया है, जो 32 किलोमीटर की ऊंचाई तक हमला कर सकती हैं.

क्या लंबा खिंचेगा ईरान-अमेरिका युद्ध?

ईरान ने इस हमले से तीन बड़े शिकार किए हैं. पहला, उसने साबित किया कि उसका एयर डिफेंस F-35 को गिराने में सक्षम है. दूसरा, अमेरिका को संदेश दिया कि ईरान का आसमान अब उसके नियंत्रण में नहीं है. और तीसरा, अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाल दिया है. ट्रंप भले ही भारत-पाकिस्तान जंग के पुराने किस्से सुनाकर पल्ला झाड़ें, लेकिन ईरान ने जो सबूत दुनिया को दिखाए हैं, उससे यह साफ है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचा, तो अमेरिका की सैन्य शक्ति पूरी तरह चरमरा जाएगी.

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ईरान युद्ध के दौरान व्हाइट हॉउस ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी सैन्य ताकत के तौर पर F-35 की तस्वीर साझा की थी. अब तक यही माना जा रहा है की दुनिया का कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम. अमेरिका के एफ-35 लड़ाकू विमान को निशाना नहीं बना सका, लेकिन ईरान ने इस दावे पर विराम लगा दिया. अमेरिका के सेंट्रल कमॅंड ने भी माना की ईरान में ऑपरेशन के दौरान उसके एक एफ-35 फाइटर जेट को नुकसान पहुंचा. भले ही ईरान ने अपने सीक्रेट हथियार का खुलासा नहीं किया, लेकिन सच्चाई यही है की ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को अमेरिका का सबसे एडवांस एफ- 35 लड़ाकू विमान चकमा नहीं दे सका. संभव है की ऐसा बाबर 373 एयर के इस्तेमाल से हुआ क्योंकि बीते साल आई आर जी सी की तरफ से ये दावा किया गया था की बाबर 373 एयर डिफेंस सिस्टम F-35 शेल्थ जेट्स को ट्रैक करने की क्षमता रखता है. 2025 युद्ध के बाद चीन और रूस की मदद से ईरान ने बाबर 373 को अपग्रेड किया था.

ट्रंप क्या बार-बार झूठ बोलते हैं?

ऐसे में अगर युद्ध में अमेरिका जल्द ही ईरान को नहीं हरा पाया तो अमेरिका की सेना खुद ब खुद कमजोर हो सकती है. इकोनॉमिक्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका की सैन्य क्षमताएं कई वर्षों तक कमजोर हो सकती हैं और ये युद्ध भारी मात्रा में गोला बारूद की खपत कर रहा है और अमेरिकी नौसेना पर बहुत बड़ा काफी दबाव डाल रहा है, जो पहले से ही दबाव में काम कर रही है. अब तक अमेरिका अपने कई सारे विमान इस युद्ध में. खो चुका हैं.

खुद को शांति का मसीहा दिखाने की हड़बड़ी में डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर झूठ बोला था. बार-बार नष्ट हुए लड़ाकू विमानों के अलगअलग नंबर बताये, लेकिन वहीं ट्रंप सिर्फ 21 दिनों में अपने 16 लड़ाकू विमानों के गिराये जाने पर खामोश हो जाते हैं. मानो कुछ हुआ की ना हो. सवाल है कि अगर अमेरिका इतना ही बेहतर युद्ध लड़ रहा है तो अमेरिका ने फिर एक दो ने बल्कि 16 लड़ाकू विमान क्यों गवां दिए? अमेरिका को 5000 करोड़ रुपए का नुकसान कैसे हो गया? डोनाल्ड ट्रम्प ने भले ही भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल हुई जंग में लड़ाकू विमानों के गिरने के सबूत ना दिए. लेकिन ईरान ने अमेरिकी प्रतिष्ठा को तार तार करने वाला सबूत दुनिया को दिखाया जिससे अमेरिका का घमंड जूट चूर हो गया.

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