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बॉलीवुड में अपने सुपर स्टार को मुंहमांगे दाम में फिल्म के लिए साइन करने का प्रचलन बहुत पुराना है. 70 के दशक में राजेश खन्ना को साइन करने के लिए प्रोड्यूसर उनके नखरे उठाते थे. मुंहमांगी रकम भी देते थे. जंजीर फिल्म के बाद अमिताभ बच्चन का दौर शुरू हुआ. उन्होंने शोहरत और सफलता की ऐसी इबारत लिखी कि हर प्रोड्यूसर उनके साथ अपनी फिल्म बनाना चाहता था. एक प्रोड्यूसर ने तो अमिताभ के आगे ब्लैंक चेक रख दिया था. फिल्म भी बनकर तैयार हुई. डायरेक्शन बिग बी के दोस्त ने किया था. यह फिल्म कौन सी थी, बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रदर्शन कैसा रहा, वो प्रोड्यूसर कौन था, आइये जानते हैं……..
Amitabh Bachchan Flop Movie: साल था 1977. तारीख थी 15 दिसंबर. मुंबई में एक फिल्म का मुहुर्त हुआ. मुहुर्त में इस बात की चर्चा ज्यादा थी कि प्रोड्यूसर एम. ए. चिनप्पा ने अमिताभ बच्चन को लगभग खरीद ही लिया है. ‘खरीद लिया’ शब्द सुनने में जरूर अटपटा लगता है लेकिन बात कुछ हद तक सच भी थी. तमिल फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने प्रोड्यूसर चिनप्पा ने अमिताभ के सामने ब्लैंक चेक रख दी थी. और मुंहमांगी रकम भरने को कहा था. वैसे 1971 में उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री ली थी. राजेश खन्ना के साथ एक फिल्म ‘हाथी मेरे साथी’ बनाई थी जिसने बॉक्स ऑफिस पर जबर्दस्त प्रदर्शन किया था.

1973 में अमिताभ बच्चन एंग्री यंगमैन के तौर पर बॉलीवुड में उभरे. 1977 में वो शोहरत और सफलता की नई इबारत लिख रहे थे. उस जमाने में बॉलीवुड से लेकर साउथ सिनेमा का हर बड़ा प्रोड्यूसर अमिताभ के साथ काम करना चाहता था. ऐसे में चिनप्पा ने अमिताभ के साथ एक फिल्म बनाने का फैसला किया. वो ‘जानवर और इंसान’, ‘गाय और गौरी’ एनिमल बेस्ड रोचक फिल्में बना चुके थे. अब वो लीक से हटकर फिल्म बनाना चाहते थे.

उन्हीं दिनों अमिताभ बच्चन-विनोद खन्ना की मसाला फिल्म हेरा-फेरी (1976) आई थी जिसे प्रकाश मेहरा ने डायरेक्ट किया था. इसमें कॉमेडी का भी पुट था. चिनप्पा ‘हेरा-फेरी’ से बहुत प्रभावित हुए. कुछ इसी तरह की एक्शन कॉमिक मूवी बनाना चाहते थे. वैसे तो वह तमिल फिल्मों का हिंदी रीमेक बनाते आ रहे थे लेकिन इस बार उन्होंने सचिन भौमिक से कहानी लिखवाई. कादर खान ने अपने डायलॉग से कहानी को और धार दी. इस फिल्म का नाम था : दो और दो पांच.
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कहानी दो चोरों की थी जो वैसे थे तो एकदूसरे के दुश्मन थे लेकिन बदली परिस्थतियों में बहुत अच्छे दोस्त बन जाते थे. फिल्म की स्टोरी जब अमिताभ बच्चन ने सुनी तो उन्होंने रिजेक्ट कर दी. ऐसे में प्रोड्यूसर चिनप्पा ने अमिताभ के आगे ब्लैंक चेक रख दिया और कहा कि हाल-फिलहाल आपकी जो भी फीस हो, उससे आगे का अमाउंट भर लीजिए. इससे पहले चिनप्पा ने राजेश खन्ना से ‘हाथी मेरे साथी’ हाईएस्ट साइनिंग अमाउंट देकर ही साइन करवाई थी.

अमिताभ के पास फिल्मों की लाइन लगी हुई थी. उन्होंने एक-दो और स्टोरी खंगालने का सुझाव दिया. चिनप्पा ने बात मान ली और राइटर जोड़ी सलीम-जावेद से संपर्क किया. सलीम-जावेद ने कहा कि स्टोरी परफेक्ट है, बस आप हिंदी बेल्ट का कोई डायरेक्टर ले लीजिए जो कहानी को पर्दे पर अच्छे से उतार सके.

चिनप्पा ने 1977 में रिलीज हुई ‘खून पसीना’ फिल्म से चर्चा में आए डायरेक्टर राकेश कुमार से संपर्क किया. राकेश कुमार अमिताभ बच्चन के दोस्त थे. राकेश कुमार के गुरु प्रकाश मेहरा थे. राकेश कुमार ने शशि कपूर और अमिताभ बच्चन को साथ में लेकर फिल्म बनाना शुरू कर दी. अमिताभ ने स्क्रिप्ट को फिर नहीं पढ़ा. उन्हें अपने दोस्त राकेश कुमार पर बहुत भरोसा था. म्यूजिक राजेश रोशन का था.

दुर्भाग्य की बात यह है कि अगले ही साल 8 दिसंबर 1978 को प्रोड्यूसर चिनप्पा का निधन हो गया. ऐसे में लगा कि फिल्म ठंडे बस्ते में चली जाएगी. चिनप्पा के बेटे ने फिल्म को प्रोड्यूस किया. हेमा मालिनी, परवीन बॉबी, कादर खान, श्रीराम लागू और ओम प्रकाश जैसे सितारे भी अहम भूमिकाओं में थे. फिल्म के सभी गाने गीतकार अनजान ने लिखे थे. यह अमिताभ की 17वीं ऐसी फिल्म थी जिसमें उनका नाम विजय था.

दो और दो पांच बनते-बनते काफी लेट हो गई. फिल्म 10 फरवरी 1980 को जब रिलीज हुई तो उम्मीदों का बोझ नहीं झेल पाई. मूवी बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही. इतना ही नहीं, इसी साल अमिताभ बच्चन-परवीन बॉबी, शशि कपूर की ‘शान’ फिल्म रिलीज हुई. यह फिल्म भी फ्लॉप रही. अमिताभ के लिए यह दोहरा झटका लगा.


