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Indians In US : America self deportation scheme | DHS Uses Taj Mahal image | US Cash Offer to indians | अमेरिका में भारतीयों का सेल्फ-डिपोर्टेशन

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Published On: March 18, 2026

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अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने अवैध रूप से रह रहे भारतीयों को वापस भेजने के लिए एक अनोखा और विवादित अभियान शुरू किया है, जिसमें ताजमहल की फोटो का इस्तेमाल करते हुए ‘फ्री फ्लाइट और नकद इनाम’ का लालच दिया जा रहा है. ट्रंप प्रशासन की इस ‘सेल्फ-डिपोर्टेशन’ नीति के तहत स्वेच्छा से देश छोड़ने वालों को लगभग लाखों रुपए दिए जा रहे हैं. US का तर्क है कि ये इज्जत भरी विदाई है लेकिन उनके तरीके पर संवेदनशीलता के आरोप लग रहे हैं.

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अमेरिका की सेल्फ डिपोर्ट स्कीम पर बवाल

वॉशिंगटन: अमेरिका में गैरकानूनी तरीके से रह रहे भारतीयों के लिए ट्रंप सरकार ने एक ऐसी स्कीम निकाली है, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने अपनी ‘सेल्फ-डिपोर्टेशन’ स्कीम को प्रमोट करने के लिए ताजमहल की फोटो का इस्तेमाल किया है, जिसे लेकर कई लोग इसे भारतीयों का अपमान मान रहे हैं. इस स्कीम में भारतीयों को पैसे भी ऑफर किए जा रहे हैं. यानी जो लोग खुद से अमेरिका छोड़ने के लिए तैयार हो जाएंगे उन्हें कैश प्राइज दिया जाएगा.

इस स्कीम के तहत, जो भारतीय बिना वैध दस्तावेजों के अमेरिका में रह रहे हैं, उन्हें वापस घर लौटने के लिए फ्री हवाई टिकट और करीब 2,600 डॉलर यानी गभग 2.18 लाख रुपए नकद देने का ऑफर दिया जा रहा है. सरकार का तर्क है कि जबरदस्ती पकड़कर निकालने से बेहतर है कि लोग सम्मान और आर्थिक मदद के साथ खुद ही वापस चले जाएं.

ताजमहल की फोटो और ‘सेल्फ-डिपोर्टेशन’ का दांव

अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने X पर भारतीयों को टारगेट करते हुए एक विज्ञापन चलाया, जिसमें ताजमहल की तस्वीर लगी थी. इसमें लिखा था कि अगर आप बिना कागजात के यहां रह रहे हैं, तो आप खुद वापस जा सकते हैं. इस तरीके को ‘सेल्फ-डिपोर्टेशन’ कहा जा रहा है.

आलोचकों का कहना है कि किसी देश के गौरव भरे प्रतीक का इस्तेमाल करके लोगों को देश से बाहर जाने के लिए कहना ‘टोन-डेफ’ यानी संवेदनहीन तरीका है. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इससे संबंधित देश के लोगों को मैसेज आसानी से समझ आता है.

पैसे और फ्री फ्लाइट: क्या है ये पूरा ऑफर?

  • नकद इनाम: स्वेच्छा से देश छोड़ने वाले हर व्यक्ति को $2,600 दिए जा रहे हैं.
  • सम्मानजनक विदाई: सरकार का कहना है कि इसमें किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, न ही हथकड़ी लगेगी.
  • पैसे की बचत: अमेरिका के लिए एक व्यक्ति को जबरदस्ती डिपोर्ट करने का खर्च करीब $18,000 आता है, जबकि इस स्कीम में यह खर्च केवल $5,000 के आसपास बैठता है.

निशाने पर भारतीय क्यों?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में करीब 7 लाख भारतीय बिना लीगल स्टेटस के रह रहे हैं. हाल के वर्षों में ‘डंकी रूट’ के जरिए अवैध रूप से अमेरिका घुसने वाले भारतीयों की संख्या तेजी से बढ़ी है. यही वजह है कि अमेरिका ने चीन और कोलंबिया के साथ-साथ भारत को भी इस मुहिम के केंद्र में रखा है.

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