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बॉलीवुड की सबसे मशहूर फिल्मों की बात करें तो ‘सिलसिला’ का जिक्र किए बिना ऐसा नहीं हो सकता. यश चोपड़ा के डायरेक्शन में बनी यह अमिताभ बच्चन और रेखा की लीड जोड़ी के तौर आखिरी फिल्म थी, जिसमें जया बच्चन ने भी अपने रोल से सबको हैरान कर दिया था. असल जिंदगी के लव ट्रायंगल को पर्दे पर दिखाने की हिम्मत दिखाने वाली यह फिल्म रिलीज होने पर भले ही फ्लॉप हो गई हो, लेकिन आज इसे एक कल्ट क्लासिक माना जाता है.
नई दिल्ली. बॉलीवुड की कुछ फिल्में ऐसी हैं, जिन्हें उनके बॉक्स ऑफिस आंकड़ों से नहीं, बल्कि विवादों से पहचाना जाता है. यश चोपड़ा की 1981 की फिल्म ‘सिलसिला’ ऐसी ही एक फिल्म है. यह वह फिल्म थी जिसने उस दौर की सबसे बड़ी गॉसिप को सिल्वर स्क्रीन पर जिंदा कर दिया था. अमिताभ बच्चन, रेखा और जया बच्चन. इन तीनों नामों का एक ही फ्रेम में एक साथ दिखना उस समय किसी चमत्कार से कम नहीं था. आज पीछे मुड़कर देखें तो ‘सिलसिला’ न सिर्फ अमिताभ और रेखा की लीड एक्टर के तौर पर आखिरी फिल्म साबित हुई, बल्कि इसने बॉलीवुड में रोमांस के मायने भी बदल दिए.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यश चोपड़ा शुरू में इस फिल्म के लिए परवीन बॉबी और स्मिता पाटिल को कास्ट करना चाहते थे, लेकिन उन्हें हमेशा यह फीलिंग रहती थी कि कहानी में जो टेंशन और केमिस्ट्री चाहिए थी, वह सिर्फ अमिताभ, जया और रेखा के साथ ही मिल सकती है. कहा तो ये भी जाता है कि यश चोपड़ा ने खुद अमिताभ बच्चन से इस बारे में बात की थी. अमिताभ मान गए थे, लेकिन असली चैलेंज जया और रेखा को एक साथ लाना था, लेकिन यश चोपड़ा के विजन और स्क्रिप्ट की मजबूती ने इस असंभव कास्टिंग को मुमकिन बना दिया था.

‘सिलसिला’ एक ऐसे शख्स अमित मल्होत्रा (अमिताभ बच्चन) की कहानी थी, जो अपनी गर्लफ्रेंड चांदनी (रेखा) को छोड़कर अपने भाई की प्रेग्नेंट मंगेतर शोभा (जया बच्चन) से शादी कर लेता है. लेकिन, किस्मत उसे फिर से उसकी पुरानी प्रेमिका से मिलवा देती है. ऑडियंस के लिए फिल्म देखना किसी की पर्सनल लाइफ में झांकने जैसा था. ‘मेरी तन्हाई और और अक्सर ये बातें करते हैं…’ जैसे डायलॉग या रेखा का दिल को छू लेने वाला एक्सप्रेशन लोगों को अमिताभ और रेखा के रियल-लाइफ रिश्ते की याद दिलाता था. फिल्म में जया बच्चन का किरदार भी उनकी रियल लाइफ इमेज से मेल खाता था.
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‘सिलसिला’ को आज मास्टरपीस माना जाता है, लेकिन जब यह 1981 में रिलीज हुई थी, तो इसे बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप घोषित कर दिया गया था. हालांकि, इस फिल्म के फ्लॉप होने के पीछे कई कारण थे. जैसे- लोग फिल्म देखने से ज्यादा किरदारों की पर्सनल लाइफ पर चर्चा करने में बिजी थे. उस दौर में समाज को एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स को स्वीकार करना मुश्किल लगता था. फिल्म के आखिर में अमिताभ का अपनी पत्नी (जया बच्चन) के पास लौटना फिल्मी और अधूरा लगा.

फिल्म के फेल होने के बावजूद, इसका म्यूजिक ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर था. मशहूर बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया और संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा (शिव-हरि) ने इस फिल्म से बतौर कंपोजर डेब्यू किया. ‘देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए…’, ‘नीला आसमान सो गया…’ और ‘रंग बरसे भीगे चुनर वाली…’ ये गाने आज भी हर पीढ़ी की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं. भारत में होली आज भी ‘रंग बरसे’ के बिना अधूरी मानी जाती है.

‘सिलसिला’ के बाद, अमिताभ बच्चन और रेखा ने कभी लीड रोल में साथ काम नहीं किया. ‘मुकद्दर का सिकंदर’ और ‘मिस्टर नटवरलाल’ जैसी दर्जनों हिट फिल्में देने वाली यह जोड़ी हमेशा के लिए अलग हो गई. फिल्म के टाइटल के मुताबिक, उनके साथ काम करने का सीरीज भी वहीं खत्म हो गया, हालांकि रेखा ने 2015 की फिल्म ‘शमिताभ’ में कैमियो किया था, लेकिन दोनों ने कभी एक साथ कोई सीन शेयर नहीं किया.

बता दें, पिछले चार दशकों में ‘सिलसिला’ ने काफी पॉपुलैरिटी हासिल की है. आज इसकी फिल्ममेकिंग, सिनेमैटोग्राफी और मैच्योर एक्टिंग की तारीफ होती है. जिस खूबसूरती से यश चोपड़ा ने लव स्टोरी को दिखाया, उसने चांदनी और लम्हें जैसी फिल्मों के लिए रास्ता बनाया.


