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थिएटर में हुई पहली मुलाकात, मुस्लिम एक्टर को दे बैठीं दिल, परिवार के खिलाफ जा 13 साल बड़े हीरो की बनी दूसरी बीवी

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Published On: March 18, 2026

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नई दिल्ली. बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो सिर्फ अपने अभिनय ही नहीं, बल्कि अपनी निजी जिंदगी के फैसलों से भी लोगों पर गहरा असर छोड़ते हैं. रत्ना पाठक शाह ऐसी ही एक शख्सियत हैं, जो अपने स्पष्ट और बेबाक विचारों के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने कई इंटरव्यू में बताया है कि जब उन्होंने शादी का फैसला लिया, तो उनके पिता इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे. इसके बावजूद उन्होंने अपने प्यार और भरोसे के दम पर हर बाधा को पार किया और आज उनकी कहानी प्रेरणा बन चुकी है.

18 मार्च 1957 को मुंबई में जन्मीं रत्ना एक ऐसे परिवार से आती हैं, जहां अभिनय की गहरी जड़ें रही हैं. एक्ट्रेस को अभिनय मां से विरासत में मिला था. उनकी मां दीना पाठक हिंदी सिनेमा की प्रतिष्ठित अभिनेत्री थीं. बचपन से ही कला का माहौल मिलने के बावजूद रत्ना का शुरुआती सपना फिल्म इंडस्ट्री में आने का नहीं था. वह पायलट बनना चाहती थीं, लेकिन समय के साथ उनकी रुचि थिएटर की ओर बढ़ी और यहीं से उनके अभिनय सफर की शुरुआत हुई.

थिएटर से जुड़ते ही रत्ना पाठक शाह को एहसास हुआ कि वो फिल्मों में ही अपना करियर बनाना चाहती हैं.  समय के साथ एक्ट्रेस थिएटर में यूं रच बस गईं कि लोगों को उनमें दीना पाठक की झलक नजर आने लगी. रत्ना की बहन सुप्रिया भी थिएटर और फिल्मों का बड़ा नाम थीं.

नसीरुद्दीन से शादी के खिलाफ थे रत्ना के पिता

रत्ना पाठक और नसीरूद्दीन शाह

धर्म की दीवार लांघ की शादी

दूसरे धर्म से होने के अलावा नसीरूद्दीन शाह पहले से शादीशुदा भी थे. ये भी दोनों के रिश्ते में एक बड़ी अड़चन थी. कठिनाइयों के बावजूद रत्ना और नसीरुद्दीन शाह ने अपने रिश्ते को मजबूत बनाए रखा और आखिरकार लाख मुश्किलों के बावजूद दोनों शादी के बंधन में बंध गए. कपल साल 1982 में सादगी से परिणय सूत्र में बंधा. अलग-अलग धर्म और करीब 13 साल के उम्र के अंतर के बावजूद उनका रिश्ता समय के साथ और मजबूत होता गया. शादी के बाद उनके दो बेटे-इमाद शाह और विवान शाह हुए.

फिल्मों से टीवी तक रत्ना पाठक ने छोड़ी छाप

अगर रत्ना पाठक शाह के करियर की बात करें, तो उन्होंने 1983 में फिल्म ‘मंडी’ से बड़े पर्दे पर कदम रखा. इसके बाद ‘मिर्च मसाला’ जैसी फिल्मों में उनके दमदार अभिनय को खूब सराहा गया. फिल्मों के अलावा उन्होंने टेलीविजन पर भी अपनी अलग पहचान बनाई. खासतौर पर ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ में ‘माया साराभाई’ का उनका किरदार आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है.

उन्होंने अपने लंबे करियर में ‘जाने तू या जाने ना’, ‘गोलमाल 3’, ‘खूबसूरत’, ‘कपूर एंड सन्स’, ‘लिपस्टिक अंडर माय बुरखा’ और ‘थप्पड़’ जैसी कई चर्चित फिल्मों में काम किया. खास तौर पर ‘लिपस्टिक अंडर माय बुरखा’ में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली और इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड में नॉमिनेशन भी मिला.

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