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महाभारत काल में इस शहर का नाम स्वर्णप्रस्थ था, लेकिन आज इस शहर की जमीन सच में सोना बन गई है. ऐसा हो भी क्यों न, दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण से त्रस्त होकर लोग अब ऐसे शहरों की ओर भाग रहे हैं जहां उन्हें शांत, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त वातावरण मिले और साथ-ही साथ एनसीआर में नौकरी है तो यहां भी आसानी से आना-जाना हो सके. यही वजह है कि नमो भारत ट्रेन कॉरिडोर, मेट्रो सुविधा और यूईआर-2 से जुड़ रहा स्वर्णप्रस्थ यानि सोनीपत शहर अब लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है और यहां प्रॉपर्टी बूम देखा जा रहा है. आइए जानते हैं इसके बारे में…
कभी स्वर्णप्रस्थ यानि सोने का स्थान नाम से जाने-जाने वाले आज के सोनीपत शहर की जमीन सच में सोना बन गई है. यहां जमीन की कीमतें ही तेजी से नहीं बढ़ रहीं, बल्कि सुविधाओं का विस्तार भी सबसे तेज हो रहा है. कई प्रॉपर्टी रिसर्च रिपोर्ट्स कहती हैं कि सोनीपत एनसीआर के सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाले शहरों में से एक है और पांच साल बाद यह दिल्ली के कई बड़े शहरों को पीछे छोड़ देगा.

सोनीपत में लगा मारुति-सुजूकी का प्लांट एशिया के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल प्लांट में से एक बन गया है. 2025 से यहां गाड़ियों की मैन्यूफैक्चरिंग का काम भी शुरू हो गया है. इसी शहर को दिल्ली से जोड़ने के लिए मेट्रो विस्तार का काम चल रहा है. साथ ही नमो भारत कॉरिडोर से यह सीधे दिल्ली से कनेक्ट हो जाएगा. इतना ही नहीं यूईआर-2 ने दिल्ली एयरपोर्ट से सोनीपत की दूरी एक घंटे से भी कम कर दी है.

हालिया प्रॉपर्टी रिसर्च फर्म कोलियर्स इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि सोनीपत भारत के उन टॉप शहरों में से एक है, जहां 2030 तक रियल एस्टेट निवेश पर ज्यादा रिटर्न मिलने की उम्मीद है. जैसे-जैसे नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) का विस्तार हो रहा है, वैसे वैसे सोनीपत-कुंडली कॉरिडोर NCR का अगला ग्रोथ इंजन बनता जा रहा है. यहां आवासीय फ्लैटों के मुकाबले प्लॉट की मांग सबसे ज्यादा है.
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आंकड़े बताते हैं कि साल 2020 और 2025 के बीच सोनीपत में प्रॉपर्टी की कीमतों में पहले ही 190 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है. यह ग्रोथ आवासीय और कमर्शियल मांग में उछाल के कारण हुई है. आज यहां बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स जैसे गोदरेज प्रोपर्टीज, ओमैक्स लिमिटेड, एल्डेको ग्रुप, जिंदल रियल्टी, रॉयल ग्रीन रियल्टी, हीरो रियल्टी, मैप्सको ग्रुप, न्यूस्टोन आदि अपने प्रोजेक्ट लांच कर रहे हैं.

हालांकि गुड़गांव और नोएडा NCR के मुख्य शहर बने हुए हैं लेकिन सोनीपत बेहतर किफायती दाम और अनछुए पोटेंशियल के साथ एक आकर्षक विकल्प दे रहा है. इन्वेस्टमेंट फोरम के अनुसार, सोनीपत का अनुमानित ROI 30-35 फीसदी है, जो गुड़गांव के 8-10 फीसदी से ज्यादा है. गुड़गांव और नोएडा के भीड़भाड़ वाले, ज्यादा ट्रैफिक वाले इलाकों की तुलना में सोनीपत में हवा की क्वालिटी बेहतर है और ट्रैफिक कम है.

एनारॉक की Q2 2025 रेजिडेंशियल मार्केट व्यूप्वाइंट्स स्टडी के अनुसार, NCR की कुल बिक्री 14,250 यूनिट है, जिसमें सोनीपत और दूसरे नए कॉरिडोर मुख्य जगहों से अलग हटकर डायवर्सिफिकेशन में मदद कर रहे हैं. यह इस कॉरिडोर को वैल्यू-ड्रिवन इन्वेस्टमेंट के लिए एक हॉटस्पॉट बनाता है, जो अगले पांच सालों में स्थापित मार्केट को पीछे छोड़ सकता है.

एनारॉक और JLL की इंडस्ट्री रिपोर्ट बताती हैं कि NCR में अगला रियल एस्टेट ग्रोथ साइकिल मज़बूत ट्रांजिट इंफ्रास्ट्रक्चर वाले उभरते हुए कॉरिडोर द्वारा लीड किया जाएगा. UER-II और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के एक साथ आने से, सोनीपत इस बदलाव से फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है. जैसे-जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे होने के करीब आ रहे हैं, कैपिटल वैल्यू, रेंटल डिमांड और एंड-यूजर की भागीदारी में लगातार बढ़ोतरी होने की उम्मीद है.


