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kishore kumar vs Mohammed Rafi : 70 के दशक की शुरुआत में ऐसे कई मौके आए जब मोहम्मद रफी और किशोर कुमार ने एक ही ट्यून पर बने गाने को गाया. किशोर दा अनोखी स्टाइल से गाने में चार-चांद लगा देते थे. उनका अंदाज इतना अनूठा था कि वो अपने साथ गाने वाले सिंगर्स पर भारी पड़ते थे. 1971 में ऐसा ही एक मुकाबला किशोर कुमार-मोहम्मद रफी के बीच हुआ. एक ही गाने के तीन वर्जन फिल्म में रखे गए थे. किशोर दा ने खास अंदाज में बाजी मार ली. यह फिल्म कौन सी थी और वो गाना कौन सा था, आइये जानते हैं……
वैसे तो किशोर कुमार और मोहम्मद रफी के बीच तुलना करना उचित नहीं. मोहम्मद रफी ने 1950 से लेकर 1970 तक बॉलीवुड में एकतरफा राज किया. 1969 में आई फिल्म ‘आराधना’ से किशोर कुमार रातोंरात स्टार बन गए. किशोर कुमार ही सुपर स्टार राजेश खन्ना की आवाज बन गए. धीरे-धीरे मोहम्मद रफी का स्टारडम फीका पड़ने लगा. 1971 में शम्मी कपूर-राजेश खन्ना और हेमा मालिनी की एक फिल्म ‘अंदाज’ आई थी. इस फिल्म के गाने सुपरहिट साबित हुए. फिल्म की बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही थी. इस फिल्म का एक गाना ‘जिंदगी एक सफर है सुहाना’ तीन वर्जन में था. रफी साहब ने भी इस गाने को अपनी रुहानी आवाज में गाया था लेकिन किशोर दा सब पर भारी पड़े थे. आइये जानते हैं दिलचस्प किस्सा…….

1971 में कमाई के मामले में चौथे नंबर पर ‘अंदाज’ फिल्म थी. हेमा मालिनी और शम्मी कपूर स्टारर इस फिल्म का डायरेक्शन रमेश सिप्पी ने किया था. बतौर डायरेक्टर उनकी यह पहली फिल्म थी. प्रोड्यूसर जीपी सिप्पी थे. स्टोरी-स्क्रीनप्ले सचिन भौमिक ने लिखा थी. डायलॉग गुलजार ने लिखे थे. एडिशनल स्क्रिप्ट वर्क में सलीम–जावेद, सतीश भटनागर का नाम था. ये लोग सिप्पी फिल्म्स के स्टोरी डिपार्टमेंट का हिस्सा थे. राजेश खन्ना और सिमी ग्रेवाल छोटी सी मगर अहम भूमिकाओं में थे. म्यूजिक शंकर-जयकिशन का था. गीतकार हसरत जयपुरी थे.

‘अंदाज’ फिल्म का म्यूजिक खूब सराहा गया. फिल्म का एक गाना ‘जिंदगी एक सफर है सुहाना’ तो राजेश खन्ना की पहचान बन गया. इस गाने के तीन वर्जन फिल्म में देखने को मिले थे. एक बार किशोर कुमार की आवाज में, एक बार मोहम्मद रफी और एक बार आशा भोसले ने यह गाना गाया. दिलचस्प बात यह है कि किशोर कुमार ने जिस अंदाज में यह गाना गाया वो लोगों के दिल में उतर गया. किशोर दा को फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन भी मिला.
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बताते हैं इस गाने की रिकॉर्डिंग के लिए मोहम्मद रफी ने बहुत रियाज किया था. वहीं किशोर दा ने यह गाना बहुत ही मस्ते भरे अंदाज में गाया था. किशोर दा ने इसमें खूब योडलिंग की. किशोर कुमार का गाना ‘जिंदगी एक सफर है सुहाना’ ही दर्शकों के दिल-दिमाग में छा गया.

दिलचस्प बात यह है कि रफी साहब ने भी यह गाना गाया है. इस पर किसी का ध्यान नहीं जाता. किशोर कुमार ने अपने खास अंदाज से इस गाने को अमर कर दिया. वैसे भी किशोर कुमार अपने साथी मेल या फीमेल सिंगर पर भारी पड़ते थे. वो अपनी आवाज का फर्क साफ तौर पर महसूस कराते थे. ऐसे में अंदाज फिल्म में ‘जिंदगी एक सफर है सुहाना’ सॉन्ग में किशोर दा का वर्जन ही चला है दूसरा नहीं चला.

आइये जानते हैं कि योलडिंग क्या है? योलडिंग का सामान्य सा अर्थ है गाने के हाई और लो पिच के बीच तेजी से अंदाज बदलना. यह प्रयोग 70 के जमाने में बॉलीवुड इंडस्ट्री में नया और अनूठा था. गाने में वैरिएशन पैदा करने की किशोर यह स्टाइल बाद में फैशन बन गई. किशोर दा हिंदी सिनेमा में योडलिंग के जनक माने जाते हैं. अपनी आवाज को तेजी से गले के निचले और ऊपरी सुरों के बीच बदलते थे. अपनी अनूठी शरारत और भावनाओं से इसे लोकप्रिय बनाया.

किशोर दा ने मेरे सपनों की रानी (आराधना), चला जाता हूं, किसी की धुन में (मेरे जीवन साथी), और यह दिल ना होता बेचारा (ज्वैल थीफ) जैसे गानों में भी योडलिंग की. उन्होंने 22 से अधिक गानों में इस्तेमाल किया. जब किशोर दा योडलिंग करते थे, तो वह एक बेतहाशा ऊर्जा और आनंद का मिश्रण कर देते थे. किशोर दा गानों में यूडलिंग टेकनीक लेकर आए. यही वजह रही कि उनके गाने रफी साहब, लता मंगेशकर और आशा भोसले से आगे निकल गए.

अंदाज फिल्म का सेकंड हाफ अटक रहा था. इसे पूरा करने में सलीम-जावेद ने मदद की थी. यह फिल्म हेमा मालिनी के करियर के लिए बड़ा टर्निग प्वॉइंट साबित हुई. लीड हीरो के तौर पर ‘अंदाज’ शम्मी कपूर की लास्ट फिल्म थी. इस फिल्म के बाद से शम्मी कपूर का स्टारडम लगातार गिरने लगा. राजेश खन्ना का छोटा सा रोल था लेकिन लाइम लाइट चुरा ले गए थे. फिल्म की सफलता में उनका अहम योगदान रहा. अंदाज फिल्म की गिनती राजेश खन्ना की लगातार 17 हिट फिल्मों में होती हैं. ये सभी फिल्में 1969 से 1971 के बीच रिलीज हुई थीं.


