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अमेरिका ने जिस टॉरपीडो से ईरानी वॉरशिप को उड़ाया, उस महाबली के नाम से ही कांपती है दुनिया – america submarine torpedo mark48 destroy iran IRIS Dena

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Published On: March 17, 2026

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America Mark-48 Torpedo: अमेरिका ने हाल ही में एक वीडियो जारी कर ईरान के युद्धपोत को डुबोने की घटना का खुलासा किया है. वीडियो में दिखाया गया है कि अमेरिकी पनडुब्बी से दागे गए मार्क-48 (Mark-48) हेवीवेट टॉरपीडो ने ईरान की आधुनिक मॉज (Moudge) श्रेणी की फ्रिगेट IRIS Dena को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया. बताया जा रहा है कि यह हमला हिंद महासागर में हुआ, जिसमें ईरानी नौसेना के 80 से अधिक नाविकों की मौत हो गई और जहाज समुद्र की गहराई में समा गया. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार है जब किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने सीधे तौर पर दुश्मन के युद्धपोत को डुबोया है. हमले में इस्तेमाल किया गया मार्क-48 टॉरपीडो अमेरिकी नेवी का प्रमुख पनडुब्बी से दागा जाने वाला हथियार है. यह भारी टॉरपीडो अत्याधुनिक सेंसर और गाइडेंस सिस्टम से लैस होता है, जो दुश्मन के जहाज या पनडुब्बी को गहराई में भी सटीकता से निशाना बना सकता है. इस घटना ने मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव को और गंभीर बना दिया है. अमेरिकी टॉरपीडो मार्क-48 दुनिया का सबसे एडवांस और खतरनाक टॉरपीडो माना जाता है.

मार्क-48 टॉरपीडो क्या है?
मार्क-48 एक हेवीवेट टॉरपीडो है, जिसे अमेरिकी नौसेना की अटैक सबमरीन इस्तेमाल करती हैं. इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों को नष्ट करना होता है. आधुनिक समुद्री युद्ध में यह अमेरिकी पनडुब्बियों का प्रमुख आक्रामक हथियार माना जाता है. इसकी मारक क्षमता और सटीक निशानेबाजी के कारण इसे दुनिया के सबसे घातक पानी के भीतर इस्तेमाल होने वाले हथियारों में गिना जाता है.

मार्क-48 टॉरपीडो कब विकसित किया गया था?
मार्क-48 टॉरपीडो को पहली बार वर्ष 1972 में अमेरिकी नौसेना में शामिल किया गया था. इसके बाद समय-समय पर इसमें कई तकनीकी सुधार किए गए. इसके आधुनिक संस्करण, जैसे Mk-48 ADCAP (एडवांस्ड कैपेबिलिटी), में बेहतर इलेक्ट्रॉनिक्स, उन्नत गाइडेंस सिस्टम और अधिक प्रभावी प्रोपल्शन तकनीक जोड़ी गई है. इन अपग्रेड्स की वजह से यह टॉरपीडो आज भी अत्याधुनिक समुद्री हथियारों में शामिल है.

मार्क-48 टॉरपीडो कितना शक्तिशाली है?
यह टॉरपीडो लगभग 3,800 पाउंड यानी करीब 1,700 किलोग्राम वजन का होता है. इसमें उच्च विस्फोटक वारहेड लगा होता है, जो बड़े से बड़े युद्धपोत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने या डुबाने की क्षमता रखता है. इसकी विस्फोटक शक्ति इतनी अधिक होती है कि यह भारी नौसैनिक जहाजों की संरचना को भी तोड़ सकता है. इसी वजह से इसे आधुनिक नौसैनिक युद्ध का बेहद घातक हथियार माना जाता है.

मार्क-48 टॉरपीडो अपने लक्ष्य को कैसे ट्रैक करता है?
यह टॉरपीडो सक्रिय (Active) और निष्क्रिय (Passive) सोनार तकनीक के संयोजन का उपयोग करता है. सक्रिय सोनार से यह ध्वनि तरंगें भेजकर लक्ष्य का पता लगाता है, जबकि निष्क्रिय सोनार से दुश्मन जहाज या पनडुब्बी से निकलने वाली आवाजों को सुनकर उन्हें ट्रैक करता है. इस तकनीक की मदद से यह लक्ष्य का पीछा करता रहता है, भले ही दुश्मन जहाज दिशा बदलने या बचाव की कोशिश करे.

यह टॉरपीडो जहाज के नीचे ही क्यों फटता है?
मार्क-48 को सीधे जहाज से टकराने के बजाय उसके नीचे विस्फोट करने के लिए डिजाइन किया गया है. जब यह जहाज के नीचे फटता है, तो विस्फोट से एक विशाल गैस बुलबुला बनता है जो तेजी से फैलता और फिर सिकुड़ता है. इस प्रक्रिया से जहाज की कील यानी नीचे की मुख्य संरचनात्मक बीम टूट जाती है. इसे “कील-ब्रेकिंग प्रभाव” कहा जाता है, जो जहाज को कई हिस्सों में तोड़कर तेजी से डुबो सकता है.

यह टॉरपीडो कितनी गति और दूरी तक हमला कर सकता है?
मार्क-48 टॉरपीडो 55 नॉट्स से अधिक यानी लगभग 100 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से चल सकता है. इसकी मारक दूरी भी काफी अधिक होती है और यह दर्जनों किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य पर हमला कर सकता है. इस क्षमता के कारण पनडुब्बियां सुरक्षित दूरी से दुश्मन के जहाजों को निशाना बना सकती हैं.

किन अमेरिकी पनडुब्बियों में मार्क-48 तैनात है?
यह टॉरपीडो अमेरिकी नौसेना की कई आधुनिक अटैक सबमरीन में तैनात किया गया है. इन पनडुब्बियों को विशेष रूप से उन्नत समुद्री युद्ध और दुश्मन जहाजों या पनडुब्बियों के खिलाफ अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है. मार्क-48 इन सबमरीन का प्रमुख आक्रामक हथियार होता है, जो उन्हें समुद्र के भीतर से घातक हमले करने की क्षमता देता है.

IRIS Dena के डूबने को महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले को “क्वाइट डेथ” यानी शांत मौत बताया. उनके अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिकी टॉरपीडो ने किसी दुश्मन युद्धपोत को डुबोया है. यह घटना मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष में नौसैनिक शक्ति की भूमिका को भी उजागर करती है. साथ ही इससे क्षेत्रीय तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं भी सामने आई हैं.

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