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Boong Box Office Collection: ‘बूंग’ ने बॉक्स ऑफिस पर कमाए इतने करोड़, रच दिया इतिहास

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Published On: March 17, 2026

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‘बूंग’ ने ग्लोबल लेवल पर भी इतिहास रच दिया है. यह पहली भारतीय फिल्म बन गई है जिसने बाफ्टा अवॉर्ड जीता है. यह एक ऐसी ऐतिहासिक जीत है जिसने मणिपुरी सिनेमा को पूरी दुनिया में पहचान दिलाई है. यह सम्मान न सिर्फ फिल्म बनाने वालों के लिए, बल्कि पूरे भारतीय फिल्म जगत के लिए बहुत बड़ा पल है, जो हमारे देश के अलग-अलग कोनों से आने वाली कहानियों की ताकत और विविधता को दिखाता है.

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‘बूंग’ मूवी ने बॉक्स ऑफिस पर 1 करोड़ रुपए की कमाई की. (फिल्म पोस्टर)

मुंबई. मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ बाफ्टा अवॉर्ड जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म बन गई है. 2026 के बाफ्टा में इसने बेस्ट चिल्ड्रेंस एंड फैमिली फिल्म का अवॉर्ड अपने नाम किया. इसने हॉलीवुड की ‘जूटोपिया 2′ और लिलो एंड स्टिच’ जैसी बड़ी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया. ये मणिपुरी सिनेमा के लिए बहुत बड़ी बात है, क्योंकि इससे पूरी दुनिया को पता चला कि हमारी नॉर्थईस्ट की कहानियां कितनी ताकतवर और दिल छू लेने वाली होती हैं. ‘बूंग’ ने बॉक्स ऑफिस पर यह शानदार मुकाम हासिल किया है, जो मणिपुर के क्षेत्रीय सिनेमा के लिए एक बहुत बड़ी और दुर्लभ उपलब्धि है.

फिल्म की डायरेक्टर और राइटर लक्ष्मीप्रिया देवी हैं. फरहान अख्तर की प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट, चॉकबोर्ड एंटरटेनमेंट और सूटेबल पिक्चर्स ने इसे प्रोड्यूस किया. फिल्म का प्रीमियर सबसे पहले टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, और फिर वो वारसॉ, साओ पाउलो, एडिलेड जैसे कई बड़े फेस्टिवल्स में स्क्रीनिंग हुई और हर जगह तारीफ बटोरी.

‘बूंग’ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

फिल्म पहले रिलीज हुई थी, लेकिन बाफ्टा जीतने के बाद 6 मार्च 2026 को दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज की गई. री-रिलीज पर ही इसने 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कमा लिए! ये मणिपुरी सिनेमा की अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है. इससे न सिर्फ ज्यादा लोग फिल्म देख पाए, बल्कि मणिपुरी सिनेमा की पहचान पूरे भारत और दुनिया में और मजबूत हुई.

‘बूंग’ की कहानी

‘बूंग’ की कहानी एक छोटे से लड़के बूंग की, जिसे गुगुन किपगेन ने प्ले किया है. बूंग अपनी सिंगल मदर मंदाकिनी (बाला हिजाम निंगथौजाम) के साथ रहता है. उसके पापा लापता हैं, और वो अपने बेस्ट फ्रेंड के साथ मिलकर उन्हें ढूंढने का फैसला करता है. ये सफर सिर्फ पापा को ढूंढने का नहीं है, बल्कि परिवार को फिर से जोड़ने, उम्मीद जगाने और मुश्किलों से लड़ने की ताकत दिखाने का है. फिल्म में मां-बेटे का गहरा रिश्ता, जिंदगी की चुनौतियाँ और मणिपुर की वो खूबसूरत लेकिन कभी-कभी दर्द भरी जिंदगी बहुत प्यार से दिखाई गई है. ये कहानी इतनी इमोशनल है कि देखते ही देखते आंखें नम हो जाती हैं.

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Ramesh Kumar

रमेश कुमार, सितंबर 2021 से न्यूज 18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. इससे पहले एबीपी न्यूज, हिंदीरश (पिंकविला), हरिभूमि, यूनीवार्ता (UNI) और नेशनल दुनिया में काम कर चुके हैं. एंटरटेनमेंट, एजुकेशन और पॉलिटिक्स में रूच…और पढ़ें

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