टियर-2 और टियर-3 शहरों में अब प्रॉपर्टी मार्केट बहुत तेजी से ग्रो कर रहा है.
बीते साल के आंकड़े बताते हैं कि निवेश का दायरा एनसीआर से बाहर तेजी से बढ़ा है. 308 परियोजनाओं में से 186 प्रोजेक्ट गैर-एनसीआर जिलों में दर्ज हुए. इनमें लखनऊ, आगरा, बरेली, अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहर अब नए ग्रोथ सेंटर्स के रूप में उभर रहे हैं. राजधानी लखनऊ में 67 परियोजनाओं का पंजीकरण इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक शहर अब रियल एस्टेट की भी नई धुरी बन रहा है.
टाउनशिप नीति बनी गेम चेंजर
माना जा रहा है कि सरकार द्वारा टाउनशिप नीति में किया गया बदलाव इस तेजी की बड़ी वजह है. न्यूनतम जमीन की सीमा घटने और समयसीमा तय होने से लंबे समय से रुकी परियोजनाओं को रफ्तार मिली है. इससे न केवल डेवलपर्स का भरोसा बढ़ा, बल्कि घर खरीदारों को भी समय पर डिलीवरी की उम्मीद बंधी है.
यूपी रेरा के चेयरमैन, संजय भूसरेड्डी कहते हैं, ‘यूपी रेरा पर भरोसे के कारण प्रोजेक्टों का पंजीकरण और पूंजी निवेश बढ़ा है. हमारा ध्यान संतुलित विकास, समय से प्रोजेक्ट को पूरा कराने और घर खरीदारों की हितों की रक्षा करने पर रहा है. वर्ष 2025 के प्रदर्शन से यूपी का रियल एस्टेट देश में एक नई पहचान बनाने में सफल रहा है.’
धार्मिक शहर बने नए रियल एस्टेट डेस्टिनेशन
धार्मिक पर्यटन ने भी रियल एस्टेट को मजबूत सहारा दिया है. इन चार शहरों में प्रॉपर्टी की डिमांड सबसे तेज हुई है. इन शहरों में होटल, रेजिडेंशियल और मिक्स-यूज प्रोजेक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ी है. यहां प्रोजेक्टों की मंजूरी की संख्या इस प्रकार है.
इन शहरों में प्रॉपर्टी बूम आ रहा है.
मथुरा – 23 परियोजनाएं
वाराणसी – 9
प्रयागराज – 7
अयोध्या – 5
आइये जानते हैं रियल एस्टेट एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी कहते हैं कि गौतमबुद्ध नगर निवेश के लिए हमेशा से केंद्र रहा है। यहां की मजबूत कनेक्टिविटी, टाउनशिप मॉडल और बुनियादी ढांचे ने इसे सबसे पसंदीदा निवेश क्षेत्र बना दिया है. हम देख रहे हैं कि अब बड़े और मध्यम प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे हो रहे हैं, जिससे खरीदारों और निवेशकों का विश्वास बढ़ा है. हालांकि नोएडा से अलग, यूपी के अन्य शहरों में भी प्रॉपर्टी बूम देखने को मिल रहा है.
वहीं एसकेए ग्रुप के डायरेक्टर संजय शर्मा का कहना है कि आज की तारीख में गौतमबुद्ध नगर सिर्फ लॉन्च लोकेशन नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म ग्रोथ मार्केट है. यही ग्रोथ धीरे-धीरे अन्य शहरों की ओर बढ़ रही है. पिछले एक साल में यहां परियोजनाओं का समय पर पंजीकरण और डिलीवरी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने वाला रहा है. 69 परियोजनाओं और बड़ी संख्या में आवासीय यूनिट्स यह दिखाती हैं कि यह जिला आने वाले वर्षों में भी उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट विकास की धुरी बना रहेगा.
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का कहते हैं कि सरकार द्वारा टाउनशिप नीति में बदलाव ने छोटे और मीडियम डेवलपर्स के लिए नए अवसर खोले हैं. अब परियोजनाओं को पूरा करने की समयसीमा स्पष्ट होने से प्रोजेक्ट्स लटकते नहीं हैं, और निवेशकों का पैसा सुरक्षित रहता है. यह बदलाव निवेशकों को आत्मविश्वास देता है कि यूपी में रियल एस्टेट न केवल तेजी से बढ़ रहा है, बल्कि निवेश के लिए भरोसेमंद और पारदर्शी भी बन गया है.
मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी का कहना है कि गौतमबुद्ध नगर में 37 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश इस बात का सबूत है कि निवेशक इस जिले को सुरक्षित और लंबे समय के लिए भरोसेमंद मान रहे हैं. एक्सप्रेसवे, मेट्रो कनेक्टिविटी और कमर्शियल-रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स का संतुलन इस बाजार को मजबूती देता है. जबकि अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल का कहना है कि गौतमबुद्ध नगर ने बीते कुछ वर्षों में खुद को उत्तर भारत के सबसे संतुलित और भरोसेमंद रियल एस्टेट बाजार के रूप में स्थापित किया है. बेहतर प्लानिंग, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और समयबद्ध परियोजना डिलीवरी ने इस क्षेत्र को निवेशकों और एंड-यूजर्स दोनों के लिए आकर्षक बना दिया है.


