अगर आपसे कहा जाए कि दिल्ली-एनसीआर में आपको ऐसा घर मिलेगा, जिसके अंदर ताजा हवा होगी, बाहर परेशान कर रहा प्रदूषण घर के अंदर नहीं होगा और एक्यूआई 50 से भी कम होगा, पानी एकदम शुद्ध मिलेगा, तो सुनकर एक बार को तो यकीन नहीं होगा, कि क्या ऐसा भी हो सकता है? लेकिन आपको बता दें कि हाल ही में रियल एस्टेट सेक्टर में उतरी एक कंपनी ने अपने घरों को लेकर यही दावा किया है. यह कोई सामान्य कंपनी नहीं है बल्कि नेट जीरो इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काफी काम कर चुकी है. यह दावा कितना सफल होगा ये तो भविष्य बताएगा लेकिन रियल एस्टेट सेक्टर में इसे लक्जरी, अल्ट्रा-लक्जरी, प्रीमियम और ग्लोबल ब्रांडेड से भी एक कदम आगे माना जा रहा है.
नेट-जीरो इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पहचान बना चुकी कंपनी बूट्स ने हाल ही में औपचारिक रूप से रियल एस्टेट सेक्टर में कदम रखने की घोषणा की है. 6,300 करोड़ रुपये से अधिक की इन्वेंट्री के साथ अपने रियल्टी वर्टिकल की शुरुआत करने के साथ ही इसने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण, जल संकट और बढ़ती बिजली लागत जैसी चुनौतियों से जूझ रहे लोगों को एक सुनहरा सपना दिखाया है.
इस बारे में बूट्स के प्रबंध निदेशक दीपक राय का कहना है कि अब तक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में उच्च-प्रदर्शन और नेट-जीरो इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर काम करने वाली बूट्स, अपने इंजीनियरिंग अनुभव को सीधे आवासीय विकास में लागू कर रही है. कंपनी का दावा है कि उसका फोकस पारंपरिक रियल एस्टेट मॉडल से अलग, मापने योग्य जीवन गुणवत्ता सुधार पर आधारित होगा.
उन्होंने बताया कि कंपनी शहरी जीवन की बुनियादी समस्याओं को केंद्र में रखकर आवासीय परियोजनाएं विकसित कर रही है. राय के अनुसार, ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सबसे गंभीर संकट वायु गुणवत्ता का है. इसी को ध्यान में रखते हुए घरों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि इनडोर एयर क्वालिटी इंडेक्स 50 से नीचे रहे और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर नियंत्रित हो. इसके साथ ही जल सुरक्षा के लिए लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जो पानी की शुद्धता, प्रवाह और उपयोग की दक्षता पर लगातार नजर रखते हैं. ऊर्जा खपत को लेकर भी कंपनी का दावा है कि केंद्रीकृत और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों के माध्यम से बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है.’
रियल एस्टेट क्षेत्र में अपनी शुरुआत बूट्स ने नोएडा, अलवर और वृंदावन से की है. पहले चरण में कंपनी 60 लाख वर्ग फुट से अधिक का सेलएबल एरिया विकसित कर रही है. नोएडा के ग्रेटर नोएडा वेस्ट और सेक्टर 76 में प्रीमियम हाई-राइज़ आवासीय परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जहां 4 बीएचके फ्लैट और डुप्लेक्स पेंटहाउस शामिल होंगे. इन परियोजनाओं को इंजीनियरिंग-आधारित डिजाइन और स्वास्थ्य-संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ विकसित करने की बात कही गई है.
अलवर में कंपनी ने शहर की सबसे ऊंची आवासीय इमारत के रूप में चिन्हित एक परियोजना शुरू की है, जिसमें 2 और 3 बीएचके आवास उपलब्ध कराए जाएंगे. इस परियोजना में सुरक्षा, स्वच्छ इनडोर वातावरण और ऊर्जा दक्षता को प्रमुख आधार बनाने का दावा पेश किया गया है.
इंजीनियरिंग और सस्टेनेबिलिटी आधारित संगठन के रूप में बूट्स इससे पहले झांसी की दुनिया की पहली नेट-जीरो लाइब्रेरी और कुरुक्षेत्र के नेट-जीरो म्यूजियम जैसी परियोजनाओं को पूरा कर चुका है. कंपनी का मानना है कि भारतीय आवास क्षेत्र का भविष्य सिर्फ दिखावटी लग्जरी तक सीमित नहीं होना चाहिए, इसे स्वास्थ्य, दक्षता, सुरक्षा और दीर्घकालिक टिकाऊपन जैसे ठोस मानकों पर आधारित होना चाहिए.


