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‘ईरान के स्कूल पर हमने बम नहीं गिराया’, जब पत्रकार के सवाल पर तमतमा गए ट्रंप

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Published On: March 17, 2026

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होमदुनियाअमेरिका

‘ईरान के स्कूल पर हमने बम नहीं गिराया’, जब पत्रकार के सवाल पर तमतमा गए ट्रंप

Agency:एजेंसियां

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Donald Trump on Iran School Attack: ईरान में जारी जंग के बीच मिनाब शहर के एक प्राथमिक स्कूल पर हुए घातक हमले को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस हमले में 160 से अधिक लोगों की मौत की खबर है. जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस घटना को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अमेरिका ने स्कूल पर बम नहीं गिराया. हालांकि शुरुआती जांच में अमेरिकी हथियार इस्तेमाल होने की आशंका जताई गई है.

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ईरान के मिनाब शहर में स्कूल पर हुए घातक हमले को लेकर विवाद बढ़ गया है. (फोटो AP)

Donald Trump on Iran School Attack: मिडिल ईस्ट में जारी जंग हर दिन नए विवाद और नए सवाल खड़े कर रही है. अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच ईरान के कई शहरों में भारी तबाही की खबरें सामने आ रही हैं. इसी बीच एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया. दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में एक प्राथमिक स्कूल पर बमबारी हुई. इस हमले में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत की खबर सामने आई. शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया कि यह हमला उस दिन हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी. हमले की भयावह तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद दुनिया भर में आक्रोश बढ़ गया. कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाए कि आखिर बच्चों के स्कूल तक जंग क्यों पहुंच गई.

NBC की रिपोर्ट के अनुसार इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब इस हमले को लेकर सवाल पूछा गया तो उनका जवाब भी विवादों में घिर गया. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ने ईरान के एक लड़कियों के स्कूल पर बम गिराया था तो ट्रंप इस सवाल पर साफ तौर पर नाराज दिखे. उन्होंने तुरंत जवाब दिया कि जो जानकारी उन्होंने देखी है उसके मुताबिक यह हमला ईरान ने खुद किया. हालांकि शुरुआती जांच और कुछ अमेरिकी अधिकारियों के बयान इस दावे से अलग कहानी बताते हैं. यही वजह है कि ट्रंप के बयान पर अब सवाल उठ रहे हैं और आलोचक कह रहे हैं कि जंग के बीच सच को छिपाने की कोशिश की जा रही है.

स्कूल पर बमबारी को लेकर अमेरिका-ईरान के बीच आरोप-प्रत्यारोप

  • दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में स्थित शजरह तैय्येबेह नाम के एक प्राथमिक स्कूल पर जंग के पहले दिन हवाई हमला हुआ था. इस हमले में कम से कम 168 लोगों की मौत होने की खबर सामने आई है. इनमें बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं. शुरुआती संकेत मिले कि हमले में इस्तेमाल किया गया हथियार अमेरिकी हो सकता है. हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर इसकी जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है.
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने बंद कमरे में हुई एक बैठक में सांसदों को बताया कि हमले के समय अमेरिकी सेना उसी इलाके में ऑपरेशन चला रही थी जहां यह स्कूल स्थित है. वहीं यह भी कहा गया कि इस हमले में इजरायल की कोई भूमिका नहीं थी. फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है.
मिनाब शहर के प्राथमिक स्कूल पर हुए इस हमले में कम से कम 168 लोगों की मौत हुई है. (फोटो AP)

ट्रंप ने ब्रिटेन की मदद भी ठुकराई

इस विवाद के बीच एक और दिलचस्प मोड़ तब आया जब ब्रिटेन ने मध्य पूर्व में अपने विमानवाहक पोत को तैनात करने की तैयारी दिखाई. ब्रिटेन की रॉयल नेवी का एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स कैरियर इस मिशन के लिए तैयार किया जा रहा था. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका को इस जंग में ब्रिटेन की मदद की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर मदद करनी थी तो दो हफ्ते पहले करनी चाहिए थी. अब इसकी जरूरत नहीं है.

ईरान के स्कूल पर हमले को लेकर विवाद क्यों बढ़ गया है?

इस हमले को लेकर विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि शुरुआती जांच में संकेत मिले कि हमले में अमेरिकी हथियार का इस्तेमाल हो सकता है. वहीं ट्रंप प्रशासन ने साफ तौर पर कहा कि अमेरिका इस हमले के लिए जिम्मेदार नहीं है. ट्रंप ने दावा किया कि यह हमला खुद ईरान ने किया होगा. इसी विरोधाभास की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना को लेकर बहस तेज हो गई है और कई देश पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं.

इस हमले में कितने लोगों की मौत हुई?

रिपोर्ट्स के मुताबिक मिनाब शहर के प्राथमिक स्कूल पर हुए इस हमले में कम से कम 168 लोगों की मौत हुई है. मरने वालों में बड़ी संख्या में बच्चे शामिल बताए जा रहे हैं क्योंकि हमला स्कूल परिसर में हुआ था. हालांकि मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स में थोड़ा अंतर भी सामने आया है.

अमेरिका और ब्रिटेन के बीच इस मामले में क्या हुआ?

ब्रिटेन ने मिडिल ईस्ट में अपने विमानवाहक पोत को तैनात करने की तैयारी दिखाई थी ताकि जरूरत पड़ने पर अमेरिका का समर्थन किया जा सके. लेकिन ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि अमेरिका को इस जंग में ब्रिटेन की मदद की जरूरत नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ब्रिटेन को मदद करनी थी तो पहले करनी चाहिए थी.

जांच के नतीजों पर टिकी दुनिया की नजर

फिलहाल इस हमले को लेकर जांच जारी है और अमेरिकी प्रशासन भी आंतरिक जांच कर रहा है. शुरुआती संकेतों में कहा गया है कि हमले में अमेरिकी हथियार का इस्तेमाल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. अगर जांच में यह साबित होता है तो यह अमेरिका के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन सकता है. दूसरी ओर ईरान भी इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहा है.

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Sumit Kumar

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें

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