—Advertisement—

Uranus discovery News | Uranus discovery | Solar System Uranus | सौरमंडल में 49 साल पहले खोजा गया था बर्फीला दानव, 98 डिग्री की झुकाव आज भी रहस्य

Author Picture
Published On: March 17, 2026

—Advertisement—

Last Updated:

अंतरिक्ष की आज भी रहस्यों से भरी हुई है. हमारे सौरमंडल का सातवां ग्रह यूरेनस (Uranus) इसका सबसे जीता-जागता उदाहरण है. आज ही के दिन 1977 में 10 मार्च को ही इसकी खोज की गई थी. इस नीले-हरे ग्रह के चारों ओर मौजूद 13 धुंधले छल्लों (Rings) की ऐतिहासिक खोज की गई थी. एक ऐसी अजीबोगरीब दुनिया जहां एक साल पृथ्वी के 84 सालों के बराबर होता है और जहां 21 साल तक लगातार दिन और 21 साल तक खौफनाक रात रहती है.

Zoom

आज ही के दिन 1977 में यूरेनस की खोज की गई थी.

नई दिल्ली: सौरमंडल का सातवां ग्रह यूरेनस अपने अनोखे झुकाव और रहस्यमयी संरचना के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह अपनी धुरी पर लगभग 98 डिग्री के झुका हुआ है. यह सूर्य की परिक्रमा किसी गेंद की तरह लुढ़कते हुए करता दिखाई देता है. विज्ञान के इतिहास में 10 मार्च 1977 का दिन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी दिन वैज्ञानिकों ने पहली बार यूरेनस के चारों ओर मौजूद धुंधले छल्लों (Rings) की खोज की थी.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार यूरेनस सोलर सिस्टम का तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है. इसका इक्वेटोरियल व्यास लगभग 51,118 किलोमीटर है, जो पृथ्वी से करीब चार गुना अधिक चौड़ा है. यह ग्रह सूर्य से औसतन 2.9 अरब किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. सूर्य की रोशनी को यहां तक पहुंचने में लगभग 2 घंटे 40 मिनट का समय लगता है. यूरेनस पर एक दिन लगभग 17 घंटे का होता है, जबकि सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में इसे 84 पृथ्वी वर्ष लगते हैं.

यूरेनस के छल्लों की खोज 1977 में की गई थी.

अक्ष पर झुकाव की वजह

इस ग्रह का झुकाव इतना असामान्य है कि यहां मौसम भी बेहद विचित्र होते हैं. यूरेनस के एक ध्रुव पर लगभग 21 साल तक लगातार सूर्य की रोशनी रहती है, जबकि दूसरा ध्रुव उतने ही समय तक गहरे अंधेरे में डूबा रहता है. यूरेनस और वीनस ऐसे ग्रह हैं जो अधिकांश ग्रहों के विपरीत दिशा में घूमते हैं. यूरेनस के चारों ओर कुल 13 प्रमुख धुंधले छल्ले पाए जाते हैं. ये छल्ले बेहद पतले और गहरे भूरे रंग के होते हैं, जिनमें से कुछ छल्ले बारीक धूल की परतों से घिरे हुए हैं. इनमें से दो बाहरी छल्ले लाल और नीले रंग के दिखाई देते हैं, जो इस ग्रह की संरचना को और भी रहस्यमयी बनाते हैं.

नीला-हरा ग्रह

इसके अलावा यूरेनस के 28 ज्ञात चंद्रमा (Moons) हैं. इन चंद्रमाओं के नाम प्रसिद्ध लेखक विलियम शेक्सपियर और अलेक्जेंडर पोप की रचनाओं के पात्रों पर रखे गए हैं. टाइटेनिया, ओबेरॉन और मिरांडा जैसे चंद्रमा इनमें प्रमुख हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार ये चंद्रमा मुख्य रूप से पानी की बर्फ और चट्टानों से बने हुए हैं. यूरेनस को आइस जायंट (Ice Giant) ग्रह भी कहा जाता है. इसका अधिकांश हिस्सा पानी, मीथेन और अमोनिया के गर्म तरल रूप से बना हुआ है. मीथेन गैस की मौजूदगी के कारण यह ग्रह नीला-हरा दिखाई देता है. यहां का तापमान -224 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, जो इसे सौरमंडल के सबसे ठंडे ग्रहों में से एक बनाता है. यहां हवाओं की रफ्तार 900 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है.

गैस और तरल पदार्थ से बना यह ग्रह

यूरेनस की सतह ठोस नहीं है, बल्कि यह मुख्य रूप से घूमते हुए गैस और तरल पदार्थों से बना हुआ है. इसी वजह से किसी भी स्पेसक्राफ्ट का यहां उतरना या सुरक्षित उड़ान भरना लगभग असंभव माना जाता है. साल 1986 में नासा के वॉयेजर-2 स्पेसक्राफ्ट ने यूरेनस के पास से उड़ान भरी थी और इस ग्रह के छल्लों, चंद्रमाओं तथा मौसम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां पृथ्वी तक पहुंचाई थीं. हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने यूरेनस के बादलों में तेज बदलाव भी देखे हैं. इस ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र भी बेहद अनोखा है. यह ग्रह के घूमने वाले अक्ष से लगभग 60 डिग्री झुका हुआ है और ग्रह के केंद्र से भी थोड़ा हटकर स्थित है. यही कारण है कि यहां बनने वाली ऑरोरा (Aurora) रोशनी ध्रुवों पर सीधे नहीं बनती.

About the Author

authorimg

Deep Raj Deepak

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें

Related News
Home
Facebook
Telegram
X