मुडिसेमर में गूंजा सनातन का शंखनाद: श्री विष्णु महायज्ञ से जगी हिंदुत्व की नई चेतना, उमड़ा आस्था का महासैलाब!

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मुडिसेमर में गूंजा सनातन का शंखनाद: श्री विष्णु महायज्ञ से जगी हिंदुत्व की नई चेतना, उमड़ा आस्था का महासैलाब!

विंढमगंज (सोनभद्र):सनातन धर्म की रक्षा और जन-कल्याण की भावना को प्रबल करने के उद्देश्य से, सोनभद्र के विंढमगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत मुडिसेमर में आयोजित 9 दिवसीय श्री विष्णु महायज्ञ का भव्य समापन हुआ। मालिया नदी के तट पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में आयोजित इस अनुष्ठान ने न केवल क्षेत्र को भक्तिमय कर दिया, बल्कि हिंदुत्व की एकता और सांस्कृतिक चेतना का एक अनुपम उदाहरण भी पेश किया।

वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान हुआ आकाश

यज्ञ के अंतिम दिन विद्वान पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ हवन-पूजन संपन्न हुआ। जैसे ही ‘स्वाहा’ के साथ अंतिम आहुति दी गई, पूरा परिसर ‘जय श्री हरि’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गूंज उठा। उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और सनातन धर्म की उन्नति की कामना की।

संतों का संदेश: धर्म ही समाज का आधार

इस भव्य आयोजन का नेतृत्व कर रहे संत वेद मोहनदास ब्रह्मचारी बाबा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि, “यज्ञ और आध्यात्मिक आयोजन केवल कर्मकांड नहीं हैं, बल्कि ये समाज में सकारात्मक ऊर्जा और हिंदुत्व के प्रति गौरव जगाने का माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से हमारी आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कारों का बोध होता है।”

कथा के रस में डूबे श्रद्धालु

यज्ञ के दौरान झांसी से पधारीं कृतिका किशोरी जी एवं रेशमी शास्त्री जी ने भगवान विष्णु की महिमा और उनके अवतारों का ऐसा भावपूर्ण वर्णन किया कि भक्त भाव-विभोर हो गए। उन्होंने अपने प्रवचनों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव और हिंदू धर्म के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला।

समर्पण और सेवा का भाव

इस धार्मिक महाकुंभ को सफल बनाने में यज्ञ समिति के समर्पित सदस्यों—राकेश पासवान, जय मौर्या, रोहित मौर्य, बनवारी यादव, सरजू यादव, बिनोद पासवान, पिंटू शर्मा सहित तमाम ग्रामीणों का विशेष योगदान रहा। उनकी निस्वार्थ सेवा ने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज एकजुट होता है, तो धर्म की पताका सदैव ऊँची रहती है।

विशाल भंडारे में उमड़ी श्रद्धा

पूर्णाहुति के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। ‘प्रसाद’ ग्रहण करने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। बिना किसी भेदभाव के हजारों लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया, जो हिंदू समाज की अटूट एकता और समरसता का जीवंत दृश्य था।

मुडिसेमर का यह महायज्ञ क्षेत्र के लोगों के लिए केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और धर्म के प्रति पुनः समर्पित होने का एक पवित्र संकल्प बनकर संपन्न हुआ।

धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो!

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