नई दिल्ली: कालजयी फिल्म ‘गाइड’ का एक गाना 60 साल बाद भी नया लगता है जो प्रेमी के अकेलेपन की ऐसी दास्तां बयां करता है, जो रूह को छू लेती है. मास्टरपीस के पीछे तीन दिग्गजों की मेहनत और कलाकारी छिपी है. मोहम्मद रफी की मखमली और दर्द भरी आवाज ने हर दिल को छुआ, लेकिन क्या आपको पता है कि दिग्गज संगीतकार ने इस गाने को 47 रीटेक में रिकॉर्ड किया था. शैलेंद्र के गहरे अर्थ वाले बोल और एसडी बर्मन का रूहानी संगीत इसे अमर बनाते हैं. गाने को देवानंद पर फिल्माया गया है, जो अपनी आंखों और भावों से एक ऐसे शख्स के खालीपन को दर्शाया है, जो अपनी प्रेमिका (वहीदा रहमान) के बिना अधूरा है. यह गाना सिर्फ एक विरह गीत नहीं है, बल्कि यह इंसान के अंतर्मन में चलने वाली कश्मकश और अंतहीन रातों के इंतजार का प्रतीक है. आज भी जब यह गाना बजता है, तो माहौल में एक अजीब सी खामोशी और सुकून घुल जाता है.


