अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब केवल हथियारों, मिसाइलों की नहीं रह गई है, बल्कि यह डॉलर की एक ऐसी भट्टी बन चुकी है जिसमें अमेरिकी खजाना बेतहाशा स्वाहा हो रहा है. युद्ध की शुरुआत के महज कुछ ही दिनों के भीतर जिस तरह से अरबों डॉलर धुएं में उड़ गए, उसने ट्रंप के भी कान खड़े कर दिए हैं. अब व्हाइट हाउस ने ईरान के खिलाफ इस युद्ध को अंजाम तक पहुंचाने के लिए 200 अरब डॉलर का फंड अमेरिकी संसद से मांगा है. यह साफ संकेत है कि यह जंग कितनी खर्चीली होने वाली है. इस बेतहाशा खर्च के आंकड़े को देखकर अब इस बात का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह युद्ध कब तक खिंचेगा.
ईरान जंग में अब तक कितने हुए खर्च
ट्रंप के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने हाल ही में चौंकाने वाला खुलासा किया था. उन्होंने बताया था कि ईरान के साथ इस युद्ध में अमेरिका को शुरुआती दौर में ही 12 अरब डॉलर का भारी नुकसान उठाना पड़ा है. अगर युद्ध के शुरुआती महज छह दिनों के भीतर ही 11 से 12 अरब डॉलर फूंक दिए गए, तो 200 अरब डॉलर का बजट यह बताता है कि पेंटागन एक लंबी और विनाशकारी योजना पर काम कर रहा है.
अमेरिका को क्यों चाहिए इतना पैसा
क्यों हुई हथियारों की कमी
हथियारों की इस कमी के पीछे एक बहुत बड़ा कारण यूक्रेन युद्ध भी है. राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि उनका प्रशासन भारी मात्रा में गोला-बारूद का सुरक्षित भंडार रखना चाहता था, लेकिन यूक्रेन को रूस के खिलाफ युद्ध में इतना अधिक गोला-बारूद दे दिया गया कि अमेरिका की अपनी यह इच्छा और क्षमता दोनों कम हो गईं.
आंकड़े बताते हैं कि फरवरी 2022 में रूस के आक्रमण के बाद से अमेरिकी कांग्रेस ने यूक्रेन की मदद के लिए 188 अरब डॉलर की विशाल धनराशि को मंजूरी दी थी. इस धनराशि पर नजर रखने वाले विशेष महानिरीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल दिसंबर तक ही इसमें से लगभग 110 अरब डॉलर खर्च किए जा चुके थे. यूक्रेन में बेतहाशा पैसा और हथियार बहाने के बाद अब अमेरिका को ईरान के मोर्चे पर अपने ही खजाने से 200 अरब डॉलर और निकालने पड़ रहे हैं.


