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Lata Mangeshkar Udit Narayan Iconic song : कोई ब्लॉकबस्टर रोमांटिग सॉन्ग सुनने में जितना कर्णप्रिय-मेलोडियस लगता है, उसके बनने की कहानी उतनी ही दिलचस्प होती है. हर नायाब गाने के पीछे संगीतकार-गीतकार और सिंगर की अटूट मेहनत होती है. 90 के दशक के गाने इसीलिए दिल में अलग अहसास जगाते हैं. 90 का एक गाने के तो 23 मुखड़े रिजेक्ट किए गए थे. फिर ऐसा आइकॉनिक सॉन्ग बनकर तैयार हुआ जिसने हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया. इस गाने में चार चांद लता मंगेशकरऔर उदित नारायण ने लगाए. दोनों ने दिलकश अंदाज में गाकर इस गाने को अमर कर दिया. मूवी ने ऐसा इतिहास रचा जिसकी कल्पना 90 के दशक में कोई नहीं कर सकता था. यह गाना कौन सा था और वो टाइलेस रोमांटिक फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं स्पेशल स्टोरी में…….
‘डीडीएलजे’ का नाम लेते ही मन में राज और सिमरन के नाम, उनकी लव स्टोरी और ट्रेन का आइकॉनिक सीन उभरने लगते हैं. शाहरुख खान और काजोल ने इतनी शिद्दत से इस फिल्म में अपने-अपने रोल किए कि डीडीएलजे फिल्म उनकी पहचान बन गई. इस फिल्म का गाने आपने भी कहीं ना कहीं जरूर सुने होंगे. आईपीएल 2026 के सीजन में ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ की ट्यून धूम मचाए हुए है. जब भी यह ट्यून बजती है, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ फिल्म की यादें ताजा होने लगती है. यह बॉलीवुड की पहली ऐसी मूवी है जिसने 100 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया था. फिल्म का म्यूजिक ब्लॉकबस्टर था. हर गाना सुपरहिट था. फिल्म का सबसे आइकॉनिक सॉन्ग ‘मेहंदी लगाके रखना’ के 23 मुखड़े रिजेक्ट हुए थे. इस सुपरहिट गाने और फिल्म से जुड़े दिलचस्प किस्सों को आइये जानते हैं……

‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ फिल्म में भारतीयता, विदेश में भारतीय संस्कृति, मिट्टी की सुगंध, करवा चौथ, प्यार-लव स्टोरी जैसे एलिमेंट थे. गीत-संगीत बेजोड़ था. फिल्म की कहानी आदित्य चोपड़ा ने लिखी थी. डायलॉग जावेद सिद्दीकी ने लिखे थे. फिल्म का डायरेक्शन आदित्य चोपड़ा ने ही किया था. प्रोड्यूसर यश चोपड़ा थे. फिल्म के सीन-गाने, डायलॉग सबकुछ आइकॉनिक था. म्यूजिक जतिन-ललित का था. गीतकार आनंद बख्शी थे. मूवी ने 10 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते थे.

संगीतकार जोड़ी जतिन-ललित के ललित पंडित ने इस फिल्म का सबसे आइकॉनिक सॉन्ग ‘मेहंदी लगाके रखना’ के बनने का किस्सा अपने एक इंटरव्यू में शेयर किया था. उन्होंने बताया था कि इस गाने 25 मुखड़े आनंद बख्शी ने लिखे थे. उन्होंने मुखड़ों की लिस्ट पूरी यूनिट को थमा दी थी. हर किसी को अपनी पसंद या नापसंद लिखनी थी. हर मुखड़ा खूबसूरत था. पूरे दो घंटे तक यही चलता रहा. हर कोई कन्फ्यूज्ड था. अंत में आदित्य चोपड़ा ने बख्शी साहब से कहा कि आप अपनी पसंद का मुखड़ा बताइये. फिर उन्होंने ‘मेहंदी लगाके रखना’ मुखड़ा फाइनल किया.
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‘मेहंदी लगाके रखना’ गाने के फाइनल सेशन के दौरान आदित्य चोपड़ा खुश नहीं थे. वो इस गाने में शाहरुख खान की एंट्री के लिए कुछ लिखवाना चाहते थे. वो पंजाबी में बश्खी साहब को बोल रहे थे कि ‘वो मुंडा एंट्री लेता है, मैनू एंट्री नहीं मिल रही.’ बख्शी साहब सुनते रहे. फिर अचानक उन्होंने ‘ये कुड़ियां, नशे की पुड़ियां, ये मुंडे, गली के गुंडे’ गुनगुनाया. इसी को सॉन्ग की शुरुआत में रखा गया जिससे शाहरुख खान की एंट्री शानदार हो गई. इस सॉन्ग इंट्रोडक्शन को आनंद बख्शी ने कंपोज किया था.

‘मेहंदी लगाके रखना’ गाने को लता मंगेशकर-उदित नारायण ने अपनी खूबसूरत आवाज से सजाया था. उदित नारायण जब स्टूडियो में इस गाने की रिकॉर्ड कर रहे थे और अभी उन्होंने मुखड़ा ही गाया था कि उधर से लता मंगेशकर आ गईं. लता दीदी के आते ही उदित की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई. उन्होंने लता दीदी के पैर छुए और कहा कि मैं आपके सामने गाना नहीं गा पाऊंगा. लता दीदी ने जवाब देते हुए कहा कि मुझे तो गाते हुए ही देखना है. उन्होंने बहुत सी मीठी-मीठी बातें कीं. मुझे कंफर्ट किया, फिर मैंने गाना पूरा किया. पूरे 5 साल बाद उदित नारायण को इस गाने के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

डीडीएलजे के ज्यादातर गाने लता मंगेशकर-उदित नारायण ने ही गाए थे मगर फिल्म का एक और आइकॉनिक सॉन्ग ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ कुमार सानू ने लता दीदी के साथ मिलकर गाया था. शायद ही लोग इस बात को जानते हों कि ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम, प्यार होता है दीवाना सनम, अब यहां से कहां जाएं हम….ये पूरी लाइन आदित्य चोपड़ा ने लिखी थी. इस गाने के मुखड़े की आखिरी लाइन ‘तेरी बांहों में मर जाएं हम’ आनंद बख्शी ने लिखी और पूरा गाना कंप्लीट किया था. इसका खुलासा संगीतकार ललित पंडित ने अपने इंटरव्यू में किया था.

लता मंगेशकर पहली बार जतिन-ललित के संगीत निर्देशन में बने गानों में गा रही थीं. दोनों भाई बहुत खुश थे. उन्होंने ऐसे में ख्याल ही नहीं रहा कि आशा भोसले को कोई गाना दें. मजेदार बात यह है कि आशा भोसले ने ही उनके नाम की सिफारिश यश चोपड़ा से की थी. दोनों भाइयों ने आनन-फानन आशा ताई से संपर्क किया. एक गाना बचा था सो आशा भोसले को दे दिया. इस गाने के बोल थे : ‘जरा सा झूम लूं मैं, अरे ना रे ना रे ना’. इस गाने को आशा भोसले-अभिजीत ने गाया था.

20 अक्टूबर 1995 को रिलीज शाहरुख खान-काजोल स्टारर ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ हिंदी सिनेमा की 100 मस्ट वॉच फिल्म में शामिल है. यह भारतीय सिनेमा की अनमोल धरोहर है. फिल्म में सिर्फ एक ही एक्शन सीन था जिसे शाहरुख खान ने जबर्दस्ती रखवाया था. आदित्य चोपड़ा इस बात पर बेहद नाराज हुए थे. खूबसूरत लव स्टोरी पर बेस्ड इस फिल्म ने सिर्फ 4 करोड़ रुपये था. मूवी ने 103 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. फिल्म का एक गाना-हर एक डायलॉग लोगों को मुंह जुबानी याद है. यही इस फिल्म की सबसे बड़ी कामयाबी है. डीडीएलजे जैसी फिल्मों वर्षों में एक बार बनती हैं.


