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हत्या के चार दोषियों को उम्रकैद

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Published On: November 12, 2025
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हत्या के चार दोषियों को उम्रकैद
– 20-20 हजार रुपये अर्थदंड, अर्थदंड न देने पर 4-4 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी
– जेल में बितायी अवधि सजा में होगी समाहित
– करीब साढ़े 10 वर्ष पूर्व हुए प्रेमकली हत्याकांड का मामला
– कोर्ट ने चारों दोषियों को न्यायिक हिरासत में लेकर जिला कारागार गुरमा भेज दिया

सोनभद्र ब्यूरो चीफ दिनेश उपाध्याय-(ओबरा/सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)डिजिटल भारत न्यूज टुडे नेटवर्क 24×7 LIVE
सोनभद्र। करीब साढ़े 10 वर्ष पूर्व हुए प्रेमकली हत्याकांड के मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम जीतेंद्र कुमार द्विवेदी की अदालत ने दोषसिद्ध पाकर चारों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही 20-20 हजार रूपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर 4-4 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित होगी। कोर्ट ने चारों दोषियों को न्यायिक हिरासत में लेकर जिला कारागार गुरमा भेज दिया।अभियोजन पक्ष के मुताबिक राम प्रसाद गोड़ पुत्र स्वर्गीय गजाधर गोड़ निवासी बभनी, थाना घोरावल, जिला सोनभद्र ने 24 मई 2015 को घोरावल थाने में दी तहरीर में अवगत कराया था कि 23/24 मई 2015 की रात में उसकी पत्नी प्रेमकली दरवाजे पर सोयी थी। उसके गांव के रामनरेश पुत्र हीरालाल, रामबदन पुत्र भीरू, माता प्रसाद पुत्र भीरू व राम प्रसाद गोड़ पुत्र स्वर्गीय मटुकधारी गोड़ जंगल की जमीन के कब्जेदारी के विवाद को लेकर उसकी पत्नी प्रेमकली की टँगारी से मारकर हत्या कर दी है।

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उसकी पत्नी का शव मौके पर पड़ा है। एफआईआर दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई करें। इस तहरीर पर पुलिस ने हत्या की एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दिया।विवेचक ने पर्याप्त सबूत मिलने पर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया था। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान व पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषियों राम नरेश गोड़, राम बदन गोड़, माता प्रसाद व राम प्रसाद गोड़ को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 20-20 हजार रुपये अर्थदण्ड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर 4-4 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित होगी। कोर्ट ने चारों दोषियों को न्यायिक हिरासत में लेकर जिला कारागार गुरमा भेज दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील विनोद कुमार पाठक ने बहस की।

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