ससुराल और मायके के झगड़े में गई नवजात की जान |
सीएचसी दुद्धी में हुआ हंगामा, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग कर रहे जांच ||
🔴 मुख्य बिंदु:
स्थान: सीएचसी दुद्धी, सोनभद्र
घटना: ससुराल और मायके के बीच विवाद में एक नवजात बच्ची की संदिग्ध मौत
मृतक: नवजात बालिका, जन्म के अगले दिन संदिग्ध हालात में मौत
प्रसूता महिला: फुलवंती (29), पत्नी रंगबहादुर, निवासी बीडर
ससुराल पक्ष का आरोप: बच्ची की हत्या कर शव गायब किया गया
मायके पक्ष का दावा: बच्ची की अचानक मौत हुई और उसे दफना दिया गया

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घटना का विवरण:
1. प्रसव और उपेक्षा:
शुक्रवार रात को फुलवंती ने सीएचसी दुद्धी में एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
ससुराल वालों का कोई समर्थन नहीं मिला, न पति और न अन्य परिजन आए।
2. संदिग्ध मौत और अंतिम संस्कार:
शनिवार को नवजात की हालत बिगड़ने पर उसकी मौत हो गई।
मायके वालों ने अंतिम संस्कार कर दिया, अस्पताल को इसकी सूचना नहीं दी।
3. बवाल और आरोप-प्रत्यारोप:
रविवार को ससुराल पक्ष को सूचना मिली, तो वे अस्पताल पहुंचकर हंगामा करने लगे।
बच्ची को “अपना अधिकार” बताते हुए, उन्होंने हत्या का आरोप लगाया।
4. पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई:
डायल 112 को बुलाया गया, दोनों पक्ष थाने ले जाए गए।
लौवा नदी के तट पर जहां शव दफनाया गया, वहां घंटों तलाश की गई, लेकिन शव नहीं मिला।
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अस्पताल प्रशासन का बयान:
डॉ. शाह आलम अंसारी (चिकित्सा अधीक्षक) के अनुसार:
बच्ची स्वस्थ पैदा हुई थी और मां को सौंप दी गई थी।
अस्पताल को न मौत की सूचना दी गई, न ही कोई पोस्टमार्टम हुआ।
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प्रशासनिक कार्रवाई:
पुलिस जांच: नवजात के शव की तलाश और माता-पिता दोनों से पूछताछ जारी।
स्वास्थ्य विभाग: प्रसूता का पुनः इलाज और देखरेख शुरू कराई गई।
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महत्वपूर्ण सवाल:
1. क्या बच्ची की मौत प्राकृतिक थी या उपेक्षा/हत्या के कारण?
2. क्या बेटी होने के कारण उपेक्षा की गई?
3. क्या पारिवारिक कलह के चलते मासूम की जान गई?
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सामाजिक संदेश:
“बेटी बोझ नहीं, वरदान है”
अगर परिवार में प्रेम, सहयोग और संवेदना होती, तो शायद आज यह बच्ची जीवित होती। यह घटना सिर्फ एक बच्ची की मौत नहीं, हमारे सामाजिक सोच और व्यवहार पर भी सवाल है।
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समाज और प्रशासन से अपेक्षा:
निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई
महिला और नवजात के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो
अस्पतालों में मौत की सूचना और शव की निगरानी व्यवस्था कड़ी हो












