सरकारी जमीन बचाने वाले पर ही शांति भंग के तहत भेजा गया नोटिस, लेखपाल पुलिस की भूमिका संदिग्ध

विंढ़मगंज/सोनभद्र सरकारी जमीन को बचाने की आवाज उठाना अब अपराध बनता जा रहा है। विंढ़मगंज थाना क्षेत्र के ग्राम बूटबेढ़वा में ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है,जहां ग्राम सभा की सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण के विरोध में खड़े हुए ग्राम सभा सदस्य प्रतिनिधि मुन्ना पासवान को ही पुलिस ने शांति भंग की धारा में चालान कर दिया। इस कार्रवाई ने न केवल पुलिस की भूमिका पर बल्कि पूरे राजस्व तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं,स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस सरकारी जमीन को बचाने की बात ग्राम सभा प्रतिनिधि कर रहे थे,उसी जमीन के मामले में क्षेत्रीय लेखपाल की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है वहीं सवाल यह है कि जब सरकारी जमीन की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर है, वही संदेह के घेरे में हों,तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करे सबसे गंभीर सवाल विंढ़मगंज थाने की कार्रवाई को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि पुलिस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किए बिना ही सरकारी जमीन के पक्ष में खड़े व्यक्ति को ही आरोपी बना दिया। और विवादित भूमि पर मकान बनवा दिया गया इससे यह संदेश गया है कि अतिक्रमण के खिलाफ बोलने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है,ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि इस पूरे प्रकरण की जांच उच्च स्तर के अधिकारी से निष्पक्ष कराई जाए,थाने के जांच अधिकारी की भूमिका की भी गंभीर समीक्षा हो,तथा लेखपाल,कानूनगो और पुलिस के बीच संभावित मिलीभगत की जांच की जाए,क्षेत्र में यह मामला अब चर्चा ही नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता की परीक्षा बन चुका है, यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई,तो इससे सरकारी जमीनों पर कब्जे को खुला संरक्षण मिलने का संदेश जाएगा और जनविश्वास को गहरी ठेस पहुंचेगी।
