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सबरीमाला: परंपरा को अंधविश्वास बता फैसला सुना सकता है कोर्ट? CJI समेत 9 जजों की बेंच और केंद्र में तीखी बहस

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By Vikash Raghuwanshi Editor
Published On: April 8, 2026

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके पास धार्मिक प्रथाओं में ‘अंधविश्वास’ निर्धारित करने का अधिकार है. केंद्र की इस दलील को खारिज करते हुए कि अदालतें धर्म की विशेषज्ञ नहीं हैं, पीठ ने कहा कि विधायिका की चुप्पी पर न्यायपालिका मूकदर्शक नहीं रह सकती. नौ जजों की पीठ अब यह तय करेगी कि धार्मिक स्वतंत्रता का दायरा क्या है और क्या स्वास्थ्य या नैतिकता के आधार पर परंपराओं में सुधार किया जा सकता है.

​सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके पास धार्मिक प्रथाओं में ‘अंधविश्वास’ निर्धारित करने का अधिकार है. केंद्र की इस दलील को खारिज करते हुए कि अदालतें धर्म की विशेषज्ञ नहीं हैं, पीठ ने कहा कि विधायिका की चुप्पी पर न्यायपालिका मूकदर्शक नहीं रह सकती. नौ जजों की पीठ अब यह तय करेगी कि धार्मिक स्वतंत्रता का दायरा क्या है और क्या स्वास्थ्य या नैतिकता के आधार पर परंपराओं में सुधार किया जा सकता है.  

विकाश रघुवंशी संस्थापक एवं प्रधान संपादक डिजिटल भारत न्यूज़ (डिजिटल मीडिया) एवं रघुवंशी वाइसहब (प्रिंट मीडिया) 📞 7403888881 विकाश रघुवंशी Digital Bharat News में पिछले छह वर्षों से सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में उन्हें 6 वर्ष से अधिक का अनुभव है। सोनभद्र में पत्रकारिता करते हुए उन्होंने स्थानीय मुद्दों, जनसरोकार और प्रशासनिक खबरों पर मजबूत पकड़ बनाई है। उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम और सामाजिक विषयों पर उनकी विशेष पकड़ है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी वे नियमित रूप से लिखते हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है। सरल और प्रभावी भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुँचाना उनकी विशेषता है। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने और लिखने में भी उनकी गहरी रुचि है। || भारत का तेजी से उभरता हुआ हिन्दी समाचार पत्र ||… Read More

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