ईरान का $35 हजार के मामूली शाहेद ड्रोन इस युद्ध में करोड़ों की अमेरिकी साख को मिट्टी में मिला रहा है। पेंटागन के पास शाहेद यानी ‘कौड़ियों’ के भाव वाले ड्रोन को गिराने के लिए एक ही रास्ता है और वो है 18 करोड़ की कीमती वाली टॉमहॉक मिसाइलें। यह वैसा ही है जैसे मच्छर मारने के लिए तोप चलाना। अब डोनाल्ड ट्रंप की नाक कटने से बचाने के लिए अमेरिका एक ‘कंजूस’ मगर कातिलाना जुगाड़ ढूढ़ लिया है। इसका नाम है ARMD। यह एक ऐसी किफायती मिसाइल है जो न केवल सुपरसोनिक रफ्तार से दुश्मन के छक्के छुड़ाएगी बल्कि पेंटागन के खजाने पर पड़ने वाले डाके को भी रोक देगी। हाइपरसोनिक मिसाइलों की वैश्विक रेस में अब तक पिछड़ता दिख रहा अमेरिका अब एक ऐसे गेम चेंजर हथियार के साथ वापस लौटा है जो न केवल तेज है बल्कि सस्ता भी है. एयरफोर्स रिसर्च लैब (AFRL) और एयरोस्पेस कंपनी उरसा मेजर ने हाल ही में अफोर्डेबल रैपिड मिसाइल डेमोंस्ट्रेटर (ARMD) का सफल सुपरसोनिक परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया है. मौजूद युद्ध में अभी यह मिसाइल उपलब्ध नहीं हो सकती है.
हाइपरसोनिक मिसाइलों की वैश्विक रेस में अब तक पिछड़ता दिख रहा अमेरिका अब एक ऐसे गेम चेंजर हथियार के साथ वापस लौटा है जो न केवल तेज है बल्कि सस्ता भी है. एयरफोर्स रिसर्च लैब (AFRL) और एयरोस्पेस कंपनी उरसा मेजर ने हाल ही में अफोर्डेबल रैपिड मिसाइल डेमोंस्ट्रेटर (ARMD) का सफल सुपरसोनिक परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया है.
क्या है ARMD मिसाइल की खासियत?
इस मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसका ड्रेपर इंजन है. यह इंजन रॉकेट साइंस की दो पुरानी चुनौतियों का एक अनोखा समाधान है:
1. लिक्विड फ्यूल की फुर्ती: इसे जरूरत पड़ने पर रोका, शुरू या थ्रॉटल (इंजन की गति को नियंत्रित करने वाला वाल्व) किया जा सकता है, जिससे मिसाइल को हवा में मोड़ना (Maneuverability) आसान होता है.
2. सॉलिड फ्यूल की मजबूती: इसे सालों तक स्टोर करके रखा जा सकता है जबकि पारंपरिक लिक्विड फ्यूल बहुत अस्थिर होते थे.
ड्रेपर इंजन में गैर-विषाक्त हाइड्रोजन पेरोक्साइड और केरोसिन का उपयोग किया गया है जो इसे सॉलिड इंजन जैसी स्टायबिलिटी और लिक्विड जैसी फ्लेक्सिबिलिटी देता है.
रेंज, पेलोड और कीमत का गणित
अभी यह तकनीक डेमोंस्ट्रेटर चरण में है इसलिए आधिकारिक आंकड़े गोपनीय हैं लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर:
· रफ्तार: वर्तमान परीक्षण में इसने सुपरसोनिक रफ्तार पकड़ी है लेकिन अंतिम लक्ष्य मैक 5 (6,174 किमी/घंटा) से अधिक की हाइपरसोनिक गति हासिल करना है.
· रेंज: ड्रेपर इंजन का उपयोग हैवक मिसाइल सिस्टम में भी हो रहा है जो एक मध्यम दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल है. इसकी संभावित रेंज 1,000 से 2,500 किमी के बीच हो सकती है.
· पेलोड: इसे बूस्ट-ग्लाइड सिस्टम के बजाय अपनी पूरी उड़ान के दौरान संचालित रहने के लिए डिज़ाइन किया गया है. यह पारंपरिक और संभवतः छोटे परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम होगा.
· कीमत: इसका नाम ही अफोर्डेबल (किफायती) है. जहां एक अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल की कीमत $2.2 मिलियन (करीब ₹18 करोड़) है, वहीं ARMD का लक्ष्य इसे बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए इतना सस्ता बनाना है कि यह दुश्मन के सस्ते ड्रोनों (जैसे ईरान का शहीद-136, जो मात्र $35,000 का है) का मुकाबला कर सके.
क्यों जरूरी है ARMD?
अब तक अमेरिका हाइपरसोनिक रेस में चीन और रूस से पीछे माना जाता था. रूस की जिरकॉन और चीन की DF-17 पहले से ही तैनात हैं. अमेरिका के पिछले प्रयास महंगे और जटिल थे जिन्हें एंग्री टोर्टोइज जैसे मजाकिया नाम दिए गए थे. ARMD के जरिए अमेरिका क्वांटिटी प्लस क्वालिटी की रणनीति पर काम कर रहा है. अगर युद्ध छिड़ता है तो महंगे टॉमहॉक कम संख्या में होंगे लेकिन अगर अमेरिका के पास हजारों की संख्या में सस्ते हाइपरसोनिक ARMD होंगे तो वह दुश्मन के एयर डिफेंस को आसानी से तबाह कर सकेगा.
सवाल-जवाब
हाइपरसोनिक और सुपरसोनिक रफ्तार में क्या अंतर है?
सुपरसोनिक रफ्तार ध्वनि की गति (Mach 1) से तेज होती है, जबकि हाइपरसोनिक रफ्तार ध्वनि की गति से कम से कम पांच गुना (Mach 5) ज्यादा होती है.
ड्रेपर इंजन पारंपरिक इंजनों से अलग कैसे है?
यह लिक्विड इंजन की कंट्रोलिंग पावर और सॉलिड इंजन की स्टोरेज क्षमता को मिलाता है. यह उड़ान के ‘ग्लाइड फेज’ में भी पावर देता है, जिससे इसे रोकना लगभग असंभव हो जाता है.
क्या यह मिसाइल भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है?
जी हाँ, भारत भी अपनी हाइपरसोनिक तकनीक विकसित कर रहा है. अमेरिका की इस ‘किफायती’ तकनीक की सफलता वैश्विक रक्षा बाजार में कम लागत वाले हाइपरसोनिक हथियारों का रास्ता खोलेगी.


