ईरान के साथ जारी जंग के बीच अमेरिका में बड़ा सैन्य फेरबदल देखने को मिला है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने आर्मी चीफ जनरल रैंडी जॉर्ज को तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने और रिटायर होने का निर्देश दिया है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति के अनुरूप सेना में नेतृत्व बदलाव की जरूरत बताई जा रही है.
ईरान जंग के बीच क्यों हुई छुट्टी?
जनरल जॉर्ज के पद छोड़ने के बाद सेना उप प्रमुख जनरल क्रिस्टोफर लानेव को कार्यवाहक आर्मी चीफ बनाया गया है. उन्हें एक अनुभवी और जमीनी स्तर पर लड़ाई का अनुभव रखने वाला अधिकारी माना जाता है. पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने उन्हें ‘युद्ध परीक्षित लीडर’ बताते हुए कहा कि वे प्रशासन की प्राथमिकताओं को प्रभावी तरीके से लागू करने में सक्षम हैं.
कौन हैं रैंडी जॉर्ज?
जनरल रैंडी जॉर्ज का करियर बेहद लंबा और अहम रहा है. वे वेस्ट पॉइंट मिलिट्री अकादमी के ग्रेजुएट हैं और 1988 में सेना में शामिल हुए थे. उन्होंने अपने करियर के दौरान कई बड़े सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया, जिनमें ऑपरेशन डेजर्ट शील्ड, डेजर्ट स्टॉर्म, इराकी फ्रीडम और एंड्योरिंग फ्रीडम शामिल हैं.
अमेरिकी आर्मी चीफ बनने से पहले वे वाइस चीफ ऑफ स्टाफ रह चुके थे और पूर्व रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन के वरिष्ठ सैन्य सहायक के रूप में भी काम कर चुके हैं. उन्हें 2023 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस पद के लिए नामित किया था और उनका कार्यकाल 2027 तक चलना था, लेकिन अब उन्हें समय से पहले ही पद छोड़ना पड़ा.
गौरतलब है कि पीट हेगसेथ के कार्यकाल में कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटाया या बदला जा चुका है. इससे यह संकेत मिलता है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन सेना में अपने हिसाब से बदलाव कर रहा है, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और युद्ध की स्थिति बनी हुई है.
जनरल रैंडी जॉर्ज की अचानक विदाई यह दिखाती है कि अमेरिका मौजूदा युद्ध परिस्थितियों में अपनी सैन्य रणनीति को और आक्रामक और केंद्रित बनाना चाहता है. नए नेतृत्व के साथ आने वाले समय में अमेरिका की सैन्य नीति में और सख्ती देखने को मिल सकती है.


