Last Updated:
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर चिंता बढ़ गई है. ऐसे माहौल में एलपीजी यानी कुकिंग गैस की सप्लाई और कारोबार को लेकर लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ रही है. अगर आप स्थिर और लंबे समय तक चलने वाला कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो एलपीजी गैस एजेंसी एक अच्छा विकल्प बन सकती है. सही जगह पर एजेंसी मिलने पर हर महीने अच्छी कमाई की संभावना रहती है.
गैस एजेंसी शुरू करने के लिए 10वीं कक्षा तक की पढ़ाई अनिवार्य है.
नई दिल्ली. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया में ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. तेल और गैस से जुड़ी खबरें लगातार सुर्खियों में हैं. ऐसे समय में एलपीजी गैस का कारोबार एक ऐसा बिजनेस माना जाता है जिसकी मांग लगभग हर घर में बनी रहती है. भारत में घरेलू कुकिंग गैस की सप्लाई मुख्य रूप से सरकारी कंपनियों के जरिए होती है. इनमें आईओसीएल का इंडेन गैस ब्रांड, एचपीसीएल का एचपी गैस और बीपीसीएल का भारत गैस सबसे बड़े नाम हैं. देश में ज्यादातर एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर इन्हीं कंपनियों से जुड़े होते हैं.
एलपीजी गैस एजेंसी का मतलब है किसी ऑयल मार्केटिंग कंपनी की आधिकारिक डिस्ट्रीब्यूटरशिप लेना और अपने इलाके में घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई करना. एजेंसी को कंपनी से सिलेंडर मिलते हैं और वह ग्राहकों तक उनकी डिलीवरी करती है. देशभर में हजारों गैस एजेंसियां काम कर रही हैं और यह बिजनेस स्थिर मांग की वजह से लंबे समय तक चलने वाला माना जाता है.
कौन खोल सकता है गैस एजेंसी
एलपीजी गैस एजेंसी लेने के लिए कुछ बुनियादी शर्तें होती हैं. आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसकी उम्र आम तौर पर 21 से 60 साल के बीच होनी चाहिए. कम से कम दसवीं पास होना जरूरी है. इसके अलावा आवेदक के पास गैस गोदाम और शोरूम के लिए जमीन होनी चाहिए या लीज पर लेनी होती है. सरकारी नियमों के अनुसार सामान्य, ओबीसी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए अलग अलग आरक्षण भी लागू होता है.
आवेदन कैसे किया जाता है
सरकारी तेल कंपनियां समय समय पर अलग अलग शहरों और गांवों के लिए नई गैस एजेंसी की घोषणा करती हैं. इसके लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किए जाते हैं. आवेदन प्रक्रिया एक केंद्रीय पोर्टल के जरिए होती है जहां इच्छुक लोग अपनी जानकारी भरकर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन के बाद पात्र उम्मीदवारों के बीच लॉटरी के जरिए चयन किया जाता है. चयन होने पर कंपनी की तरफ से लेटर ऑफ इंटेंट दिया जाता है और इसके बाद एजेंसी शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है.
गैस एजेंसी खोलने में कितना खर्च आता है
एलपीजी गैस एजेंसी शुरू करने में निवेश जगह और कैटेगरी के हिसाब से अलग अलग हो सकता है. आम तौर पर कुल निवेश करीब 10 लाख से 30 लाख रुपये तक हो सकता है. इसमें सिक्योरिटी डिपॉजिट, गोदाम बनाने या किराए पर लेने का खर्च, डिलीवरी वाहन, सुरक्षा उपकरण और शुरुआती वर्किंग कैपिटल शामिल होता है. बड़े शहरों में निवेश थोड़ा ज्यादा हो सकता है जबकि ग्रामीण इलाकों में लागत कम भी हो सकती है. रजिस्ट्रेशन के लिए 10,000 रुपये भी लिए जाते हैं जो नॉन-रिफंडेबल होते हैं.
कमाई कितनी हो सकती है
गैस एजेंसी की कमाई मुख्य रूप से सिलेंडर की बिक्री पर मिलने वाले कमीशन से होती है. घरेलू सिलेंडर पर डिस्ट्रीब्यूटर को आम तौर पर प्रति सिलेंडर करीब 40 से 60 रुपये तक कमीशन मिलता है. अगर किसी एजेंसी से हर महीने सैकड़ों या हजारों सिलेंडर की डिलीवरी होती है तो मासिक कमाई अच्छी हो सकती है. कई अच्छी लोकेशन वाली एजेंसियों में महीने का मुनाफा करीब 50 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये या उससे ज्यादा भी हो सकता है. कमर्शियल सिलेंडर में कमीशन ज्यादा होने की वजह से वहां से भी अतिरिक्त कमाई होती है. वहां आपका 100-200 रुपये का मार्जिन मिल सकता है.
क्यों बढ़ रही है इस बिजनेस की मांग
भारत में एलपीजी की मांग लगातार बढ़ रही है. खासकर ग्रामीण इलाकों में सरकार की उज्ज्वला योजना के बाद लाखों नए परिवार गैस कनेक्शन से जुड़े हैं. ऐसे में गैस एजेंसी का बिजनेस लंबी अवधि में स्थिर मांग वाला कारोबार माना जाता है. हालांकि इसमें सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी होता है और गोदाम व डिलीवरी सिस्टम को लेकर सख्त नियम लागू होते हैं. कुल मिलाकर अगर आपके पास सही लोकेशन, जमीन और शुरुआती निवेश है तो एलपीजी गैस एजेंसी ऐसा बिजनेस बन सकता है जो लंबे समय तक स्थिर कमाई का जरिया बन सकता है.
About the Author

जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें


