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यज्ञ एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है-श्री शनिदेव जी महाराज

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Published On: July 13, 2024

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यज्ञ एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है-श्री शनिदेव जी महाराज

सोनभद्र ब्यूरो चीफ दिनेश उपाध्याय-(ओबरा/सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)डिजिटल भारत न्यूज टुडे नेटवर्क 24×7 LIVE
ओबरा/सोनभद्र।यज्ञ एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है,जिसके द्वारा मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकता है। यज्ञ के जरिये आध्यात्मिक सम्पदा की भी प्राप्ति होती है। श्रीमद्भागवत्गता में भगवान श्रीकृष्ण ने यज्ञ करने वालों को परमगति की प्राप्ति की बात की है।यह बातें शनि शिंगणापुर से पधारे शनि पीठाधीश्वर बालयोगेश्वर श्री शनिदेव जी महाराज ने शनि मंदिर सेक्टर आठ ओबरा में शनिवार को विशेष पूजन यज्ञाहुति के उपरांत भक्तो के सम्मुख अपने प्रवचन में कही।श्री महाराज जी ने आगे कहा कि यज्ञ से देवताओं को प्रसन्न किया जा सकता है साथ ही मनचाहा फल भी प्राप्त किया जा सकता है। ब्रह्मा ने मनुष्य के साथ ही यज्ञ हवन की भी रचना की और मनुष्य से कहा इस के द्वारा ही तुम्हारी उन्नति होगी।यज्ञ तुम्हारी इच्छित कामनाओं, आवश्यकताओं को पूर्ण करेगा। तुम इसके द्वारा देवताओं को पुष्ट करो, वे तुम्हारी उन्नति करेंगे। यज्ञ भारतीय संस्कृति का आदि प्रतीक है। हमारे धर्म में जितनी महानता यज्ञ को दी गई है,उतनी और किसी को नहीं दी गयी है। जीवन का कोई भी कर्म हो,शायद ही यज्ञ के बिना पूर्ण माना जाता हो। जन्म से पूर्व से लेकर मरण पर्यन्त सम्पन्न होने वाले संस्कार यज्ञ के माध्यम से ही सम्पन्न होते हैं। वैदिक यज्ञ व्यक्ति को सर्वशक्तिमान देवताओं से जोड़ता है। यह मानवता के लिए उनकी भलाई के लिए सभी देवताओं को प्रसन्न करने और उनका सम्मान करने का एक साधन है। मंत्रों से निकलने वाली ध्वनि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से बहुत सुकून देने वाली होती है।

यज्ञ मन,शरीर,आत्मा और वातावरण को शुद्ध करता है। विधिवत किये गये यज्ञ इतने प्रभावशाली होते हैं,जिसके द्वारा मानसिक दोषों-र्दुगुणों का निष्कासन एवं सद्भावों का अभिवर्धन नितान्त संभव है। काम,क्रोध,लोभ,मोह,मद,मत्सर,ईष्र्या,द्वेष,कायरता,कामुकता,आलस्य,आवेश,संशय आदि मानसिक उद्वेगों की चिकित्सा के लिए यज्ञ एक विश्वस्त पद्धति है। शरीर के असाध्य रोगों तक का निवारण उससे हो सकता है।कार्यक्रम का समापन पवनसुत हनुमानजी एवम शनिदेव भगवान की आरती व प्रसाद वितरण के साथ संपन्न हुआ।इस अवसर पर शनि मंदिर के पुजारी कमलेश दास जी,शनिदेव के अनन्य भक्त दीना नाथ शर्मा,राजन शर्मा,दिनेश पांडेय,कमलेश पांडेय,मधु,उर्मिला,नूतन,आस्था,राजुल पांडेय विष्णु गुप्ता,धुरंधर शर्मा,सत्यप्रकाश सहित तमाम भक्त उपस्थित रहे।

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