ऐसा लगता है कि भारत सरकार देशभर के सिविल लाइंस जैसी पहचान को खत्म करना चाहती है ताकि देश में ये औपनिवेशिक पहचान बची नहीं रहे. सिविल लाइंस अलग‑थलग रिहायशी इलाके के रूप में विकसित हुए थे, इसलिए इन्हें “औपनिवेशिक विरासत” का हिस्सा माना जाता रहा है.
ऐसा लगता है कि भारत सरकार देशभर के सिविल लाइंस जैसी पहचान को खत्म करना चाहती है ताकि देश में ये औपनिवेशिक पहचान बची नहीं रहे. सिविल लाइंस अलग‑थलग रिहायशी इलाके के रूप में विकसित हुए थे, इसलिए इन्हें “औपनिवेशिक विरासत” का हिस्सा माना जाता रहा है.













