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नई दिल्ली. भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो केवल पर्दे पर नजर नहीं आते, ब्लकि वो एक अभिनेता की पहचान बन जाते हैं. जब हम फिल्म ‘बाहुबली’ का नाम लेते हैं, तो आंखों के सामने एक निडर, स्वाभिमानी और जंजीरों में जकड़ी हुई लेकिन आंखों में प्रतिशोध की ज्वाला लिए एक महिला का चेहरा आता है. वह चेहरा अनुष्का शेट्टी का है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस आइकॉानिक रोल के लिए अनुष्का शेट्टी पहली पसंद नहीं थीं.
ये किस्सा साल 2013 का है, जब दूरदर्शी निर्देशक एस.एस. राजामौली भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्म ‘बाहुबली’ की रूपरेखा तैयार कर रहे थे. राजामौली के मन में ‘देवसेना’ का किरदार एक ऐसी महिला का था जो न केवल कोमल हो, बल्कि जिसमें एक योद्धा की आत्मा हो.

एसएस राजामौली के इस किरदार ने अनुष्का शेट्टी को न सिर्फ सुपरस्टारडम दिलाया बल्कि उन्हें एक मजबूत पैन इंडिया प्रेजेंस भी दिलाई. लेकिन वो इसके लिए फिल्ममेकर की पहली पसंद नहीं थीं. इस रोल में राजामौली नयनतारा को कास्ट करना चाहते थे.

‘बाहुबली’ कोई साधारण फिल्म नहीं थी; यह एक तपस्या थी. राजामौली ने शर्त रखी थी कि मुख्य कलाकारों को कम से कम दो से पांच साल का समय केवल इसी फिल्म को देना होगा. वो बाहुबली की शूटिंग के साथ ही कोई और फिल्म नहीं कर सकते थे. इसी शर्त के चलते नयनतारा इस फिल्म का हिस्सा नहीं बन पाईं.
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‘लेडी सुपरस्टार’ के नाम से मशहूर नयनतारा उस वक्त अपने करियर के पीक पर थीं. एक्ट्रेस लगातार फिल्में कर रही थीं. वो एक साथ कई प्रोजेक्ट्स का हिस्सा थीं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने एक ही प्रोजेक्ट को इतना समय देने से इनकार कर दिया था. यहीं से किस्मत ने एक नया मोड़ लिया और देवसेना की तलाश अनुष्का शेट्टी पर जाकर रुकी.

टॉलीवुड में अनुष्का शेट्टी केवल एक ग्लैमरस अभिनेत्री नहीं थीं. उन्होंने ‘अरुंधति’ जैसी हॉरर-थ्रिलर फिल्म से यह साबित कर दिया था कि उनमें अकेले अपने दम पर फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनाने की काबिलियत है. जब उनके पास ‘बाहुबली’ का प्रस्ताव आया, तो उन्होंने जोखिम को समझते हुए भी इसे स्वीकार किया. एक्शन किरदारों के उनके पिछले अनुभव और उनकी राजसी कद-काठी ने उन्हें कुंतला राज्य की राजकुमारी के रूप में फिट बैठा दिया.

‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ में हमने देवसेना को एक पीड़ित मां के रूप में देखा, लेकिन ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूजन’ में अनुष्का ने अपनी असली ताकत दिखाई. तलवारबाजी हो, तीरंदाजी हो या महिष्मती के दरबार में स्वाभिमान के लिए खड़े होना. अनुष्का ने देवसेना को जीवंत कर दिया. प्रभास के साथ उनकी केमिस्ट्री और स्क्रीन प्रेजेंस इतनी जबरदस्त थी कि दर्शक उन्हें वास्तविक राजकुमारी मानने लगे.

इस फ्रेंचाइजी ने न केवल भारतीय बॉक्स ऑफिस के समीकरण बदल दिए, बल्कि 2,400 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा का परचम लहराया. अनुष्का, जो पहले दक्षिण भारत की जान थीं, अब एक पैन-इंडिया स्टार बन चुकी थीं.

नयनतारा की एक ना ने अनुष्का शेट्टी की किस्मत चमका दी. फिल्म में प्रभास के अपोजिट उनकी केमिस्ट्री को काफी पसंद किया गया था. इसके साथ ही नॉर्थ इंडिया में अनुष्का शेट्टी की फैन फॉलोइंग में काफी इजाफा हुआ.


