Agriculture News: प्राकृतिक खेती में ‘जीवामृत’ किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है. यह एक देसी जैविक घोल है, जिसे गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और मिट्टी के मिश्रण से तैयार किया जाता है. जीवामृत का उपयोग करने से मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है, जिससे उसकी उर्वरता मजबूत होती है और फसल उत्पादन में सुधार होता है. खास बात यह है कि इसे बहुत कम लागत में आसानी से तैयार किया जा सकता है, जिससे किसानों को महंगे रासायनिक खाद पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. जीवामृत न केवल फसलों की गुणवत्ता बढ़ाता है, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाता. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इसे नियमित रूप से उपयोग करने पर खेती अधिक टिकाऊ और लाभदायक बन सकती है. यह तकनीक छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है.
Agriculture News: प्राकृतिक खेती में ‘जीवामृत’ किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है. यह एक देसी जैविक घोल है, जिसे गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और मिट्टी के मिश्रण से तैयार किया जाता है. जीवामृत का उपयोग करने से मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है, जिससे उसकी उर्वरता मजबूत होती है और फसल उत्पादन में सुधार होता है. खास बात यह है कि इसे बहुत कम लागत में आसानी से तैयार किया जा सकता है, जिससे किसानों को महंगे रासायनिक खाद पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. जीवामृत न केवल फसलों की गुणवत्ता बढ़ाता है, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाता. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इसे नियमित रूप से उपयोग करने पर खेती अधिक टिकाऊ और लाभदायक बन सकती है. यह तकनीक छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है.













