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पॉक्सो एक्ट: दोषी विजय उर्फ टीपू साहनी को 20 वर्ष की कठोर कैद

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Published On: February 17, 2026
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पॉक्सो एक्ट: दोषी विजय उर्फ टीपू साहनी को 20 वर्ष की कठोर कैद
– 35 हजार रूपये अर्थदंड, न देने पर 2 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी
– अर्थदंड की धनराशि में से 20 हजार रूपये पीड़ित को मिलेगी
– करीब 3 वर्ष 11 माह पूर्व 10 वर्ष के नाबालिग लड़के के साथ हुए अप्राकृतिक दुष्कर्म का मामला

सोनभद्र ब्यूरो चीफ दिनेश उपाध्याय-(ओबरा/सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)डिजिटल भारत न्यूज टुडे नेटवर्क 24×7 LIVE
सोनभद्र। करीब 3 वर्ष 11 माह पूर्व 10 वर्ष के नाबालिग लड़के के साथ हुए अप्राकृतिक दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए पॉक्सो एक्ट में दोषसिद्ध पाकर दोषी विजय उर्फ टीपू साहनी को 20 वर्ष का कठोर कारावास की सजा सुनाई। उसके ऊपर 35 हजार रूपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर 2 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित होगी। जबकि अर्थदंड की धनराशि में से 20 हजार रूपये पीड़ित को मिलेगी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक चोपन थाना क्षेत्र निवासी पीड़ित के पिता ने 21 मार्च 2022 को चोपन थाने में दी तहरीर में अवगत कराया था कि उसके 10 वर्ष के नाबालिग बेटे को 20 मार्च 2022 को शाम 7 बजे विजय उर्फ टीपू साहनी पुत्र बाले साहनी निवासी कुरहुल, थाना चोपन, जिला सोनभद्र ने चना के खेत में बुलाकर अप्राकृतिक दुष्कर्म किया।

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बेटे ने घर आकर इसकी जानकारी अपनी मां को दिया, उसके बाद उसे भी बताया, तब सूचना दे रहा हूं। इस तहरीर पर चोपन पुलिस ने अप्राकृतिक दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट व एससी/ एसटी एक्ट में एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दिया। विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया था।मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्को को सुनने, 8 गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर पॉक्सो एक्ट में दोषी विजय उर्फ टीपू साहनी (27) वर्ष को 20 वर्ष की कठोर कैद व 35 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 2 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित होगी। जबकि अर्थदंड की धनराशि में से 20 हजार रूपये पीड़ित को मिलेगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि, सत्यप्रकाश त्रिपाठी व नीरज कुमार सिंह ने बहस की।

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