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पाक्सो एक्ट: दोषी बच्चा पांडेय को 5 वर्ष की कैद

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Published On: March 29, 2024

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पाक्सो एक्ट: दोषी बच्चा पांडेय को 5 वर्ष की कैद
– 17 हजार रूपये अर्थदंड, न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी
– जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित की जाएगी
– अर्थदंड की धनराशि में से 13 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी
– सात वर्ष पूर्व घर में घुसकर नाबालिग लड़की के साथ हुए छेड़खानी का मामला

सोनभद्र ब्यूरो चीफ दिनेश उपाध्याय-(ओबरा/सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)डिजिटल भारत न्यूज टुडे नेटवर्क 24×7 LIVE

सोनभद्र। सात वर्ष पूर्व घर में घुसकर नाबालिग लड़की के साथ हुए छेड़खानी के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट सोनभद्र अमित वीर सिंह की अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी बच्चा पांडेय उर्फ घनश्याम पांडेय को 5 वर्ष की कैद एवं 17 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई।अर्थदंड न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित की जाएगी। वहीं अर्थदंड की धनराशि में से 13 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक शाहगंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी नाबालिग पीड़िता ने 12 अप्रैल 2017 को थाने में दी तहरीर में आरोप लगाया था कि 7 अप्रैल 2017 को वह घर पर अकेली थी तभी रात्रि 11 बजे बच्चा पांडेय उर्फ घनश्याम पांडेय पुत्र कैलास पांडेय,निवासी रैपुरा, थाना शाहगंज,जिला सोनभद्र घर में घुस आया और आते ही उसके साथ जोर जबर्दस्ती करने लगा। विरोध करने पर उसका कपड़ा भी फाड़ दिया।हो हल्ला करने पर वह उसे छोड़कर भाग गया।तथा किसी से बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी।इस तहरीर पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना किया।

विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने कोर्ट में छेड़खानी और पाक्सो एक्ट में चार्जशीट दाखिल किया था।मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने,गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी बच्चा पांडेय उर्फ घनश्याम पांडेय को 5 वर्ष की कैद एवं 17 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित की जाएगी। वहीं अर्थदंड की धनराशि में से 13 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी। अभियोजन पक्ष की तरफ से सरकारी वकील दिनेश कुमार अग्रहरी,सत्य प्रकाश त्रिपाठी एवं नीरज कुमार सिंह ने बहस की।

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