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बॉलीवुड में फ्रेंचाइजी फिल्मों का ट्रेंड नया नहीं है, लेकिन ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि किसी एक लीड कास्ट की कहानी सफलता से असफलता तक पहुंच जाए. हम देओल परिवार की ‘यमला पगला दीवाना’ सीरीज की बात कर रहे हैं. जब 2011 में धर्मेंद्र, सनी देओल और बॉबी देओल पहली बार स्क्रीन पर आए, तो उन्होंने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया था, लेकिन किस्मत और कंटेंट का पहिया ऐसा घूमा कि अगली दो फिल्मों ने इस कल्ट ब्रांड को ‘डिजास्टर’ की कैटेगरी में पहुंचा दिया. सिर्फ 7 साल के अंदर, एक ही कास्ट के साथ बनी ये तीनों फिल्में ‘हिट’ के तौर पर शुरू हुईं और ‘डिजास्टर’ के तौर पर खत्म हुईं.
नई दिल्ली. देओल परिवार का बॉलीवुड में शुरू से ही एक खास रुतबा रहा है. जब भी धर्मेंद्र अपने दोनों बेटों सनी देओल और बॉबी देओल के साथ स्क्रीन पर आए, तो दर्शकों की उम्मीदें हमेशा से बढ़ती रहीं. 2011 में डायरेक्टर समीर कार्णिक ने ‘यमला पगला दीवाना’ से इस तिकड़ी को इंट्रोड्यूस किया. फिल्म के टाइटल से धर्मेंद्र के क्लासिक गाने की यादें ताजा हो गईं. हालांकि, फ्रेंचाइजी का ग्राफ इतना नीचे चला गया कि ट्रेड एक्सपर्ट भी हैरान रह गए. सिर्फ 7 सालों में, इस सीरीज ने सफलता और असफलता का कड़वा स्वाद दोनों चखा. (इस तस्वीर को बनाने में AI की मदद ली गई है.)

यमला पगला दीवाना (2011): जब यह फिल्म रिलीज हुई तो ‘धरम-पाजी’ का स्टाइल और सनी देओल का ढाई किलो का हाथ देखने के लिए सिनेमाघरों में भीड़ उमड़ पड़ी. फिल्म की कहानी पंजाब और वाराणसी के बैकग्राउंड पर सेट थी, जिसमें धर्मेंद्र और बॉबी ने एक धोखेबाज पिता और बेटे का रोल किया था, जबकि सनी, एक ईमानदार NRI बड़े भाई के रोल में उन्हें सुधारने आए थे. फिल्म में कॉमेडी और इमोशन का एकदम सही बैलेंस था. धर्मेंद्र की कॉमिक टाइमिंग ने साबित कर दिया कि उनके लिए उम्र सिर्फ एक नंबर है. फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर लगभग 55 करोड़ की कमाई की, जो उस समय एक बड़ी हिट थी. ऑडियंस ने इन तीनों को पसंद किया और ‘यमला पगला दीवाना’ एक ब्रांड बन गई.

यमला पगला दीवाना 2 (2013): पहली फिल्म की जबरदस्त सफलता के बाद, मेकर्स ने दो साल के अंदर इसका सीक्वल रिलीज करने का फैसला किया. इस बार संगीत सिवन डायरेक्ट कर रहे थे और लोकेशन स्कॉटलैंड कर दी गई. फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी स्क्रिप्ट थी. ऑडियंस को लगा कि पहली फिल्म की सादगी और पंजाबीपन इसमें नहीं है. जबरदस्ती की कॉमेडी ने ऑडियंस को निराश किया. हालांकि फिल्म की ओपनिंग अच्छी थी, लेकिन खराब वर्ड-ऑफ-माउथ की वजह से इसकी ग्रॉस कमाई लगभग 40 करोड़ रही. अपने ज्यादा बजट की वजह से इसे फ्लॉप घोषित कर दिया गया. यहीं से देओल परिवार की फ्रैंचाइजी पर संकट आने लगा.
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यमला पगला दीवाना: फिर से (2018): देओल फैमिली को लगा कि शायद पुरानी यादें ताजा करने से उनका जादू चलेगा. 2018 में ‘यमला पगला दीवाना: फिर से’ रिलीज हुई. इस बार लीड कास्ट वही रही- धर्मेंद्र, सनी और बॉबी देओल. फिल्म में ग्लैमर का टच जोड़ने के लिए सलमान खान, रेखा और सोनाक्षी सिन्हा जैसे स्टार्स के कैमियो भी शामिल किए गए, लेकिन फिल्म का कंटेंट इतना कमजोर था कि उसे हैंडल करना मुश्किल हो गया था.

कहानी में कोई नयापन नहीं था और कॉमेडी काफी आउटडेटेड लगी. फिल्म ने पहले दिन सिर्फ 1.5 करोड़ कमाए और इसका लाइफटाइम कलेक्शन 10 करोड़ भी पार नहीं कर पाया. ट्रेड पंडितों ने इसे ‘बड़ी डिजास्टर’ घोषित कर दिया और 7 साल के अंदर, एक सुपरहिट ब्रांड पूरी तरह से खत्म हो गया.

इस फ्रैंचाइज को एनालाइज करने पर पता चलता है कि फिल्में सिर्फ स्टार पावर और लीड कास्ट के दम पर नहीं चलतीं. तीनों फिल्मों के डायरेक्टर अलग-अलग थे (समीर कार्निक, संगीत सिवन और नवनीत सिंह), जिससे कॉमेडी के टोन और स्टाइल में बदलाव आया. पहली फिल्म में दर्शकों को सनी देओल का चिल्लाना और धर्मेंद्र का शराब पीना मजेदार लगा, लेकिन तीसरी फिल्म तक आते-आते यह दोहराव वाला लगने लगा. 2011 और 2018 के बीच दर्शकों की पसंद बदल गई. वे अब सिर्फ नाम के लिए थिएटर नहीं जाना चाहते थे.

‘यमला पगला दीवाना’ सीरीज बॉलीवुड के लिए एक केस स्टडी है, जो यह दिखाती है कि कैसे, वही लीड कास्ट होने पर भी, अगर कहानी में दम न हो तो दर्शक फिल्म को रिजेक्ट कर देते हैं. सनी देओल ने बाद में ‘गदर 2’ से अपनी काबिलियत साबित की, लेकिन ‘यमला पगला दीवाना’ उनके करियर में एक ऐसा टर्निंग प्वाइंट साबित हुई, जिसने इस फ्रेंचाइजी के भविष्य को खतरे में डाल दिया.


