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पहली लीड हीरो वाली फिल्म से मिले 150 रुपए, फिर 1971 में दी ऐसी ब्लॉकबस्टर, बॉक्स ऑफिस पर तोड़ दिए थे कई रिकॉर्ड

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Published On: April 6, 2026

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हिंदी सिनेमा में पहचान बनाने के लिए हर एक्टर को दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है. किसी भी नए अभिनेता को पहली फिल्म मिलना किस्मत के चमक जाने के जैसा होता है, लेकिन जितेंद्र के लिए यह घाटे का सौदा साबित हुआ था.

महज 150 रुपए से फिल्मों में कदम रखने वाले जितेंद्र ने कभी नहीं सोचा था कि वे फिल्मों में काम करेंगे, लेकिन पैसे कमाने और पहचान बनाने की चाह में अभिनेता ने बॉडी डबल के साथ हिंदी सिनेमा में कदम रखा था, लेकिन पहली लीड हीरो वाली फिल्म को पाने के लिए जितेंद्र को खूब पापड़ बेलने पड़े थे?

कल यानी 7 अप्रैल 1942 को जितेंद्र का जन्मदिन है. उनके पिता की नकली ज्वेलरी की दुकान थी, जो फिल्मों के सेट पर भी अपने नकली गहने बेचा करते थे. जितेंद्र भी अपने पिता के काम में हाथ बांटते थे. वे बचपन से ही फिल्मों के शौकीन थे लेकिन नहीं पता था कि गहने बेचने का काम ही हिंदी सिनेमा में कदम रखने का पहला रास्ता है.

अभिनेता के करियर की शुरुआत भले ही ‘गीत गाया पत्थरों ने’ से हुई थी. लेकिन उससे पहले वो फिल्म ‘सेहरा’ पर काम कर चुके थे और इसी फिल्म में अभिनेता की बहादुरी और लगन देखने के बाद निर्देशक वी. शांताराम ने जितेंद्र को पहली लीड हीरो वाली फिल्म दी थी.

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दरअसल, जितेंद्र ने फिल्म ‘सेहरा’ के सेट पर हर तरीके का काम किया था. वे आर्टिस्ट का सारा काम करते थे और उनकी जरूरतों का ध्यान भी रखते थे. उस वक्त एक महीने की तनख्वाह 150 रुपए थी. इसी फिल्म के दौरान अभिनेता ने वी. शांताराम को प्रभावित करने के लिए चापलूसी की सारी हदें पार कर दी थीं. ये खुद जितेंद्र ने भी कई बार कहा है.

खुद जितेंद्र ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक्ट्रेस संध्या को एक सीन करना था, जिसमें ऊंट पर कूदना था. निर्देशक ऐसे शख्स की तलाश में थे, जो यह सीन कर सके और बिल्कुल संध्या जैसा दिखे. वी. शांताराम को इम्प्रेस करने के लिए अभिनेता ने सीन को करने के लिए हां कर दिया और ऊंट पर छलांग लगा दी. वो सीन सिर्फ पैसे के लिए नहीं किया था, बल्कि खुद को साबित करने के लिए किया था.

इसके बाद तो जितेंद्र देखते ही देखते स्टार बन गए थे. साल 1971 में तो जितेंद्र और आशा पारेख की फिल्म ‘कारवां’ ने बॉक्स ऑफिस को हिलाकर रख दिया था. सारिलीज होते ही बॉस्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़ दिए थे. ‘शोले’ के करीब 25 करोड़ टिकट बिके थे. जबकि जितेंद्र की फिल्म ‘कारवां’ के लिए फिल्म के लाइफटाइम में 31 करोड़ से ज्यादा टिकट बिके थे.

इतना ही नहीं जितेंद्र के करियर के लिए ये फिल्म वरदान साबित हुई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘कारवां’ का ग्रॉस कलेक्शन 1300 करोड़ रुपये से भी ज्यादा रहा था. फिल्म के गाने भी काफी हिट हुए थे.

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