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दोषी सिंटू उर्फ सुरेंद्र कुमार को 10 वर्ष की कठोर कैद

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Published On: December 6, 2025
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दोषी सिंटू उर्फ सुरेंद्र कुमार को 10 वर्ष की कठोर कैद
-एक लाख रुपये अर्थदंड, न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी
– जेल में बिताई अवधि सजा में होगी समाहित
– अर्थदंड की सम्पूर्ण धनराशि एक लाख रुपये पीड़िता को मिलेगी
– 6 वर्ष पूर्व शादी का झांसा देकर 21 वर्षीय लड़की को बहला फुसलाकर भगा ले जाने व बलात्कार करने का मामला

सोनभद्र ब्यूरो चीफ दिनेश उपाध्याय-(ओबरा/सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)डिजिटल भारत न्यूज टुडे नेटवर्क 24×7 LIVE
सोनभद्र। छह वर्ष पूर्व शादी का झांसा देकर 21 वर्षीय लड़की को बहला फुसलाकर भगा ले जाने व उसके साथ बलात्कार करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी/सीएडब्लू ,सोनभद्र अर्चना रानी की अदालत ने शनिवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी सिंटू उर्फ सुरेंद्र कुमार को 10 वर्ष की कठोर कैद व एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित होगी। वहीं अर्थदंड की सम्पूर्ण धनराशि एक लाख रुपये पीड़िता को मिलेगी।अभियोजन पक्ष के मुताबिक जुगैल थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता ने 28 फरवरी 2020 को जुगैल थाने में दी तहरीर में आरोप लगाया था कि 17 सितंबर 2019 को शादी का झांसा देकर उसे बहला फुसलाकर सिंटू उर्फ सुरेंद्र कुमार पुत्र रामबचन खरवार निवासी खेवन्धा, थाना जुगैल, जिला सोनभद्र भगा ले गया और उसके साथ करीब 5 माह तक बलात्कर करता रहा।

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जब उसने कोर्ट मैरिज कराने के लिए कहने लगी तो उसने इनकार कर दिया। इस बात को लेकर पंचायत भी हुई थी, लेकिन रखने को तैयार नहीं हुआ और उसे भगा दिया। आवश्यक कार्रवाई करने की कृपा करें। इस तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने विवेचना किया। पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने चार्जशीट दाखिल किया था।मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान और पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी सिंटू उर्फ सुरेंद्र कुमार को 10 वर्ष की कठोर कैद व एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित होगी। वहीं अर्थदंड की सम्पूर्ण धनराशि एक लाख रुपये पीड़िता को मिलेगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने बहस की।

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