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सिल्क स्मिता इंडियन सिनेमा की एक ऐसी शख्सियत थीं, जिन्होंने आइटम सॉन्ग्स और वैम्प रोल निभाकर सुपरस्टार जैसा मुकाम हासिल किया. बाबू मोहन ने हाल में उनकी आलीशान लाइफस्टाइल का खुलासा करते हुए बताया कि सिल्क का घर किसी महल से कम नहीं था और उनकी शान-ओ-शौकत बेमिसाल थी. स्ट्रगल से भरा उनका सफर मेकअप आर्टिस्ट से शुरू होकर 400 फिल्मों तक पहुंचा. उन्होंने सक्सेस की पीक पर होने के बावजूद दुखों और तंगी की वजह से 1996 में खुदकुशी कर ली. आज भी सिल्क स्मिता अपनी जादुई आंखों और बेबाक अंदाज के लिए याद की जाती हैं.
नई दिल्ली: एक्ट्रेस भारतीय सिनेमा का वो नाम है जिसे कोई चाहकर भी नहीं भूल सकता. वो इकलौती ऐसी एक्ट्रेस थीं जिन्होंने सिर्फ आइटम सॉन्ग्स और वैम्प किरदारों के दम पर बड़े-बड़े सुपरस्टार्स को भी पीछे छोड़ दिया था. दिग्गज अभिनेता बाबू मोहन ने हाल में एक इंटरव्यू में सिल्क स्मिता की लाइफस्टाइल और उनके कुछ अनसुने राज खोलकर सबको हैरान कर दिया.

बाबू मोहन बताते हैं कि सिल्क स्मिता का असली नाम वदलपति विजयलक्ष्मी था और उनका जन्म आंध्र प्रदेश के एलुरु में हुआ था. ‘न्यूज18 तेलुगू’ की रिपोर्ट के अनुसार, सिल्क की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी. वे छोटी उम्र में शादी, फिर ससुरालवालों के जुल्मों से तंग आकर मद्रास भाग आई थीं. उन्होंने वहां एक मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर काम शुरू किया और फिर उन्हें पहचान मिली.

मलयालम डायरेक्टर एंटनी ने उन्हें फिल्मों में ब्रेक दिया और उनका नाम बदलकर ‘सिल्क स्मिता’ रख दिया. उन्होंने देखते ही देखते लगभग 400 फिल्मों में काम किया और वो इतनी बड़ी स्टार बन गईं कि उस दौर में माना जाता था कि अगर फिल्म में सिल्क का एक गाना नहीं है, तो वो बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलेगी. उनका क्रेज उस समय सातवें आसमान पर था.
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बाबू मोहन ने सेट पर उनके बर्ताव को याद करते हुए बताया कि सिल्क हमेशा काला चश्मा पहनकर और पैर पर पैर चढ़ाकर बहुत ही गंभीर मुद्रा में बैठती थीं. बड़े से बड़ा हीरो सामने खड़ा हो, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता था. जब बाबू मोहन ने उनसे एक बार इस अंदाज की वजह पूछी, तो उन्होंने बड़े ही बिंदास तरीके से जवाब दिया था कि वो बस ये देख रही हैं कि मर्द उन्हें किस नजर से देखते हैं.

बाबू मोहन ने बताया कि एक बार सिल्क उन्हें अपने घर ले गई थीं, जो किसी घर जैसा नहीं बल्कि एक आलीशान महल जैसा था. उन्होंने कहा कि आज के दौर में भले ही किसी के पास हजारों करोड़ की संपत्ति हो, लेकिन वो सिल्क स्मिता जैसी शान-ओ-शौकत वाली जिंदगी नहीं जी सकता. वे अपने फिल्मों के कपड़ों और साजो-सामान को भी बहुत रॉयल अंदाज से संभाल कर रखती थीं.

सिल्क स्मिता की आंखों में जो जादू था और जो उनका स्क्रीन प्रेजेंस था, उसकी बराबरी आज तक कोई नहीं कर पाया. वे जितनी बाहर से सख्त और ग्लैमरस दिखती थीं, अंदर से शायद उतनी ही अकेली थीं. बाबू मोहन का कहना है कि उनकी लाइफस्टाइल इतनी रॉयल थी कि उसे देख पाना भी हर किसी के नसीब में नहीं होता था, लेकिन उसी चमक-दमक के पीछे कई गहरे राज भी दबे थे.

अफसोस की बात ये है कि इतनी शोहरत और दौलत के बावजूद सिल्क स्मिता का अंत बहुत ही दर्दनाक रहा. फिल्मों में पैसा लगाने की वजह से हुई आर्थिक तंगी और प्यार में मिले धोखे ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था. वे डिप्रेशन का शिकार हो गईं और आखिरकार 23 सितंबर 1996 को उन्होंने खुदकुशी कर ली. उनकी मौत ने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया था.

बाबू मोहन आज भी उन्हें याद कर इमोशनल हो जाते हैं. उनका कहना है कि इतनी कम उम्र में उनका चले जाना सिनेमा के लिए एक बहुत बड़ी क्षति थी. सिल्क स्मिता भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसे ध्रुव तारे की तरह हैं, जिनकी चमक उनकी मौत के दशकों बाद भी कम नहीं हुई है और फैंस के बीच उनका क्रेज आज भी बरकरार है.


