वॉशिंगटन के सत्ता गलियारों में जब डोनाल्ड ट्रंप की मैक्सिमम प्रेशर नीति का डंका बज रहा था, ठीक उसी वक्त चेन्नई में जन्मी अमेरिका की एक महिला सांसद ने उस चक्रव्यूह को भेदने का साहस दिखाया जिसे तोड़ने की हिम्मत बड़े-बड़े दिग्गज नहीं जुटा पाए. भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने ट्रंप की सीधी धमकियों और तेल नाकाबंदी के कड़े पहरे की परवाह किए बिना सीधे क्यूबा की सरजमीं पर कदम रख दिया. एक तरफ दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्रपति का हठ था तो दूसरी तरफ प्रमिला का वो साहस जिसने हवाना के बदहाल अस्पतालों और तड़पते मरीजों के बीच पहुंचकर वाइटहाउस की क्रूर नीतियों को मानवता के कटघरे में खड़ा कर दिया. यह महज एक दौरा नहीं बल्कि ट्रंप के उस अहंकार को सीधी चुनौती थी जो 90 मील दूर एक पूरे देश को घुटनों पर लाने की जिद पाले बैठा है.
चेन्नई से वॉशिंगटन तक का सफर
प्रमिला जयपाल का जन्म 21 सितंबर 1965 को भारत के चेन्नई में हुआ था. उनका बचपन इंडोनेशिया और सिंगापुर में बीता लेकिन 16 साल की उम्र में वे अकेले ही पढ़ाई के लिए अमेरिका चली गईं.
· शिक्षा: जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए.
· नागरिकता: साल 2000 में वे अमेरिकी नागरिक बनीं.
· रिकॉर्ड: 2017 में वे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला बनीं.
ट्रंप से क्यों है ‘छत्तीस का आंकड़ा’?
प्रमिला जयपाल डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील विंग की सबसे मुखर आवाज मानी जाती हैं. वे ‘प्रोग्रेसिव कॉकस’ की अध्यक्ष रही हैं जो अमेरिकी संसद का सबसे प्रभावशाली समूह है.
1. मानवाधिकार की पैरोकार: 9/11 के हमलों के बाद उन्होंने वन अमेरिका नामक संस्था बनाई जिसने प्रवासियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा के विरुद्ध लड़ाई लड़ी.
2. ट्रंप की नीतियों का विरोध: वे ट्रंप की चाइल्ड सेपरेशन पॉलिसी (बच्चों को माता-पिता से अलग करने) और मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाने के फैसले की कट्टर आलोचक रही हैं.
3. ताजा विवाद: ट्रंप ने क्यूबा को आतंकवाद का प्रायोजक घोषित कर वहां की तेल सप्लाई रोक दी है. जयपाल ने सीधे क्यूबा के कैंसर वार्डों और अस्पतालों का दौरा किया और वहां से रिपोर्ट दी कि कैसे ट्रंप के फैसले बेगुनाह बच्चों और मरीजों की जान ले रहे हैं.
क्यूबा में क्या कहा प्रमिला ने?
हवाना में विदेशी पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने बिना डरे कहा, “यह केवल तेल की नाकाबंदी नहीं है, यह एक देश के बुनियादी ढांचे पर आर्थिक बमबारी है. यह दशकों पुरानी शीत युद्ध की सड़ी-गली मानसिकता है जिसे अब खत्म होना चाहिए.” उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप का अहंकार अमेरिका के लिए ही भविष्य में ‘शरणार्थी संकट’ पैदा करेगा.
सवाल-जवाब
प्रमिला जयपाल अमेरिका में किस पद पर हैं? वे वॉशिंगटन के 7वें कांग्रेस जिले से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य हैं और प्रोग्रेसिव कॉकस की चेयरपर्सन रह चुकी हैं.
प्रमिला जयपाल का भारत से क्या नाता है? उनका जन्म चेन्नई, भारत में हुआ था और वे अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला सांसद हैं.
उन्होंने क्यूबा की यात्रा क्यों की? वे ट्रंप प्रशासन द्वारा क्यूबा पर लगाई गई तेल नाकाबंदी के मानवीय असर को करीब से देखने और इस ‘अवैध’ प्रतिबंध के खिलाफ आवाज उठाने वहां पहुंची थीं.
ट्रंप और जयपाल के बीच मुख्य विवाद क्या है? जयपाल का मानना है कि ट्रंप की नीतियां क्रूर और तानाशाही वाली हैं, जबकि ट्रंप उन्हें अक्सर अपना राजनीतिक दुश्मन बताते रहे हैं.


