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Amitabh Bachchan Superhit Moives 1978 : ‘दीवार’ और ‘शोले’ के ब्लॉकबस्टर साबित होने के बाद अमिताभ बच्चन शोहरत की बुलंदियों पर पहुंच गए. हर प्रोड्यूसर-डायरेक्टर उनके साथ फिल्म बनाने के लिए आतुर था. इसी दौरान राज कपूर, देवानंद और बीआर चोपड़ा ने अमिताभ की आंधी को रोकने की कोशिश की. बॉलीवुड के तीनों दिग्गज डायरेक्टर-प्रोड्यूसर की फिल्मों का मुकाबला 1978 में बॉक्स ऑफिस पर अमिताभ से हुआ लेकिन वो असफल रहे. अमिताभ की इस साल तीन फिल्में टॉप 5 में रहीं. साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म भी उन्हीं की थी. ये फिल्में कौन सी थीं और अमिताभ के सामने ये दिग्गज कैसे बेबस साबित हुए, आइये जानते हैं दिलचस्प किस्सा……
‘जंजीर’, ‘शोले’ और ‘दीवार’ फिल्म की कामयाबी के बाद सलीम-जावेद की जोड़ी के कदम सातवें आसमान पर थे. दोनों अपनी स्टोरी सुनाने से पहले प्रोड्यूसर से एडवांस रकम भी लेने लगे थे. दोनों उस दौर के बड़े-बड़े सितारों के बराबर फीस लेते थे. 1975 के बाद दोनों ने ऋषि कपूर को एक फिल्म करने का ऑफर दिया लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया. इससे सलीम खान बहुत नाराज हुए और उन्होंने ऋषि कपूर को करियर बर्बाद करने की धमकी भी दे डाली थी. इसका खुलासा ऋषि कपूर ने अपनी बॉयोग्राफी ‘खुल्लम खुल्ला’ में किया है. उस दौर के तीन बड़े निमाता-निर्देशक राज कपूर-देवानंद और बीआर चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन की आंधी रोकने की काफी कोशिश की लेकिन तीनों नाकाम रहे. यह बात 1978 की है. इस साल अमिताभ की तीन फिल्में टॉप 5 में थीं. ये फिल्में थीं : मुकद्दर का सिकंदर, त्रिशूल और डॉन.

‘त्रिशूल’ और ‘डॉन’ के राइटर सलीम-जावेद थे. सलीम-जावेद की जोड़ी का स्टारडम कम करने के लिए राज कपूर और देवानंद ने अपनी फिल्मों में सबकुछ झोंक दिया लेकिन वो हवा का रुख नहीं बदल पाए. सबसे पहले बात राज कपूर की करते हैं. ऋषि कपूर ने जब ‘त्रिशूल’ में काम करने से इनकार कर दिया तो सलीम खान ने उनका करियर बर्बाद करने की धमकी दी. राज कपूर ने इस धमकी का जवाब एक फिल्म के जरिये देने की कोशिश की. उन्होंने ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ फिल्म को बनाने का फैसला किया. इस फिल्म में राज कपूर ने हर नुस्खा आजमाने की कोशिश की ताकि बॉक्स ऑफिस पर फिल्म टॉप ग्रासर बने.

‘सत्यम शिवम सुंदरम’ फिल्म में नायिका का रोल इतना बोल्ड था कि रेखा-हेमा मालिनी से लेकर सायरा बानो ने इस फिल्म को करने से इनकार कर दिया.
इससे राज कपूर को गहरा धक्का लगा. उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में यहां तक कह डाला कि उन्होंने यह रोल तो लता मंगेशकर के लिए लिखा था. अगर लता मंगेशकर जैसी खूबसूरत आवाज की मल्लिका बदसूरत हो तो क्या कहा जाएगा. इस बयान पर लता दी ने बहुत नाराजगी जताई थी. उन्होंने ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ में गाने से इनकार कर दिया था. बाद में उनके भाई ने उन्हें समझाया तब वो जाकर मानीं. खैर जीनत अमान ने ‘रूपा’ का रोल करने के लिए हामी भरी. उन्हें बोल्ड सीन से भी ऐतराज नहीं था. राज कपूर ने अपने छोटे भाई शशि कपूर की इमेज को भुनाने की कोशिश की. उन्हें हीरो फाइनल कर लिया. 1975 में शशि कपूर की दीवार ब्लॉकबस्टर रही थी.
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सत्यम शिवम सुंदरम की कहानी जैनेंद्र जैन ने लिखी थी. गीत नरेंद्र शर्मा-आनंद बख्शी और विट्ठलभाई पटेल ने लिखे थे. राज कपूर ने ही फिल्म को निर्देशत और प्रोड्यूस किया था. 24 मार्च 1978 को रिलीज हुई इस फिल्म का शानदार म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने ही कंपोज किया था. उन्हें बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का अवॉर्ड भी मिला था. जीनत अमान के अंग प्रदर्शन को लेकर खूब कंट्रोवर्सी हुई थी. ऋषि कपूर ने ही फिल्म की आलोचना की थी. ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ कलात्मक रूप से खूब सराही गई लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उतना कमाल नहीं दिखा पाई. जितनी उम्मीदों के साथ यह फिल्म बनाई गई थी. करीब दो करोड़ के बजट में बनी सि फिल्म ने 2.25 करोड़ की कमाई की थी. यह बॉक्स ऑफिस पर औसत रही. आज इस फिल्म की गिनती कल्ट क्लासिक फिल्मों में होती है.

इधर, देवानंद भी एक ऐसी फिल्म लेकर मैदान में उतरे. इस फिल्म का नाम ‘देश-परदेस’ था. इस फिल्म को वो गेमचेंजर मान रहे थे. फिल्म का डायरेक्शन-प्रोडक्शन देवानंद ने ही किया था. टीना मुनीम की यह डेब्यू फिल्म थी. अजीत खान, प्राण, अमजद खान, श्रीराम लागू, टॉम अल्टर, बिंदू, प्रेम चोपड़ा, एके हंगल, सुजीत कुमार और महमूद जैसे बड़े सितारे सपोर्टिंग रोल में थे. राजेश रोशन का म्यूजिक था. ‘प्रेम पुजारी’, ‘हरे रामा हरे कृष्ण’ और ‘हीरा पन्ना’ के भी प्रोड्यूसर देवानंद ही थे. देवानंद की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औसत ही रही.

अब बात करते हैं प्रोड्यूसर-डायरेक्टर बीआर चोपड़ा की. बीआर चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन के साथ 1975 में ‘जमीर’ फिल्म बनाई थी. यह एक एक्शन ड्रामा फिल्म थी जिसका डायरेक्शन रवि चोपड़ा ने किया था. प्रोड्यूसर बीआर चोपड़ा थे. ‘दीवार’ और ‘शोले’ की आंधी में यह फिल्म उड़ गई. अब अमिताभ इतने बिजी चल रहे थे कि उन्हें अपनी फिल्म की डेट्स तक नहीं दे पा रहे थे. ऐसे में बीआर चोपड़ा ने संजीव कुमार और विद्या सिन्हा-रंजीता कौर के साथ एक छोटे बजट की फिल्म ‘पति-पत्नी और वो’ बनाई. फिल्म हिट रही लेकिन अमिताभ बच्चन की फिल्मों को टक्कर नहीं दे पाई.

बीआर चोपड़ा के सगे भाई यश चोपड़ा ‘दीवार’ फिल्म की कामयाबी के बाद सलीम-जावेद के साथ एक और नई इबारत लिखने की तैयारी कर रहे थे. उन्होंने ‘त्रिशूल’ फिल्म बनाने का फैसला किया. गुलशन राय इसके प्रोड्यूसर थे. वही ‘त्रिशूल’ जिसे ऋषि कपूर ने करने से इनकार कर दिया था. त्रिशूल फिल्म 5 मई 1978 को रिलीज हुई थी. अमिताभ बच्चन-राखी, शशि कपूर-हेमा मालिनी, संजीव कुमार- पूनम ढिल्लो, सचिन पिलगांवकर अहम भूमिकाओं में थे. इस एक्शन ड्रामा फिल्म का म्यूजिक खय्याम ने कंपोज किया था. गीतकार साहिर लुधियानवी थे. ‘मोहब्बत बड़े काम की चीज है’, ‘जब भी मिलते हो जाने तुम क्या क्या…जानेमन तुम कमाल करते हो’ जैसे सुरीले गाने आज भी दिल छू लेते हैं.

इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी का नया इतिहास लिखा. संजीव कुमार ने अमिताभ बच्चन के बराबर पैसे लिए थे. फिल्म का प्रीमियर देखकर प्रोड्यूसर गुलशन राय निराश हुए थे. ऐसे में यश चोपड़ा ने सलीम-जावेद के साथ मिलकर फिल्म की 45 दिन की शूटिंग फिर से की. इस बार फिल्म में अमिताभ बच्चन के एंबुलेंस सीन डाले गए. ये सीन्स फिल्म के टर्निंग प्वॉइंट बन गए. कहानी बदले की थी. फिल्म में कॉरपोरेट की मीटिंग, टेंडर प्रकिया, बिजनेस मीटिंग दिखाया गया जो कि नया सब्जेक्ट था. फिल्म में हेमा मालिनी और राखी के रोल कॉरपोरेट में जॉब करती महिलाओं के थे जो कि मॉडर्न थे. फिल्म में शशि कपूर विदेश से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन का कोर्स करके इंडिया लौटते थे. वो एक जगह पर राखी को कंप्यूटर कहते हैं. यह सब टर्म उस दौर की फिल्म में नए थे. यह फिल्म भी 1968 में धर्मेंद्र-तनूजा-जयललिता की फिल्म ‘इज्जत’से इंस्पायर्ड थी. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई.

1978 में अमिताभ बच्चन की तीन फिल्में टॉप 5 में शामिल थीं. प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी ‘मुकद्दर का सिकंदर’ कमाई के मामले में पहले नंबर पर थी. फिर दूसरे नंबर पर ‘त्रिशूल’ थी जिसकी कहानी सलीम-जावेद ने लिखी थी. निर्माता गुलशन राय थे. डायरेक्टर यश चोपड़ा थे. तीसरे नंबर पर चंद्रा बरोट के निर्देशन में बनी फिल्म ‘डॉन’ थी. डॉन एक एक्शन थ्रिलर फिल्म थी. इसकी स्टोरी भी सलीम-जावेद ने ही लिखी थी. इस स्क्रिप्ट को कोई प्रोड्यूसर नहीं ले रहा था. कैमरामैन-प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी ने इस रिजेक्टेड स्क्रिप्ट पर फिल्म बनाई थी. फिल्म रिलीज होने से पहले उनका निधन हो गया थ. इस फिल्म की कामयाबी ने अमिताभ बच्चन को सही मायने में बॉलीवुड का ‘डॉन’ बना दिया.


