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बॉलीवुड में शुरू से ही जोड़ियों का एक अलग ही महत्व रहा है. लेकिन, जब अमिताभ बच्चन और मिथुन चक्रवर्ती एक साथ स्क्रीन पर दिखे तो उन्होंने बॉक्स ऑफिस पर जो धमाल मचाया, उसे आज भी याद किया जाता है. उनका सफर 1970 के दशक में ‘दो अनजाने’ से शुरू हुआ और 1980 के दशक में ‘गंगा जमुना सरस्वती’ के साथ परवान चढ़ा. लेकिन, 1990 में रिलीज हुई उनकी तीसरी फिल्म ‘अग्निपथ’ ने न सिर्फ सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, बल्कि एक्टिंग की एक नई परिभाषा भी गढ़ी. विजय दीनानाथ चौहान और कृष्णन अय्यर के बीच की केमिस्ट्री आज भी फिल्म लवर्स के रोंगटे खड़े कर देती है.
नई दिल्ली. जब बॉलीवुड के मंच पर दो महान कलाकार टकराते हैं तो सिर्फ एक फिल्म ही स्क्रीन पर नहीं चलती, बल्कि इतिहास रचा जाता है. 1970 से 1990 के दशक तक, बॉलीवुड में कई जोड़ियां बनीं लेकिन अमिताभ बच्चन और मिथुन चक्रवर्ती की जोड़ी कुछ खास थी. एक ‘शहंशाह’ था, दूसरा ‘डिस्को डांसर’. एक ने एंग्री यंग मैन की विरासत को आगे बढ़ाया, जबकि दूसरा गरीबों का मसीहा बनकर उभरा.

इन दोनों लेजेंड्स ने अपने पूरे करियर में सिर्फ तीन फिल्मों में स्क्रीन शेयर की, लेकिन उन तीन मौकों को आज भी सिनेमाई दुनिया में लैंडमार्क के तौर पर याद किया जाता है. उनकी तीसरी फिल्म ने खासकर सफलता और एक्टिंग के लिए एक ऐसा बेंचमार्क सेट किया जो आज भी याद किया जाता है. आइए उनकी उन 3 फिल्मों के बार में आपको विस्तार से बताते हैं.

1. दो अनजाने (1976): अमिताभ और मिथुन चक्रवर्ती का साथ का सफर 1976 में फिल्म ‘दो अनजाने’ से शुरू हुआ. यह वह समय था जब अमिताभ बच्चन ‘दीवार’ और ‘शोले’ जैसी फिल्मों के बाद सुपरस्टार बन चुके थे, जबकि मिथुन चक्रवर्ती फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे. इस फिल्म में रेखा और अमिताभ बच्चन लीड रोल में थे. मिथुन चक्रवर्ती का रोल छोटा था, लेकिन स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी भविष्य की ओर इशारा करती थी.
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फिल्म कमर्शियली सफल रही. हालांकि, उस समय किसी ने सोचा भी नहीं था कि अमिताभ बच्चन के बगल में खड़ा यह दुबला-पतला नौजवान एक दिन खुद ‘डांसिंग सुपरस्टार’ बनेगा और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर परफॉर्म करेगा.

2. गंगा जमुना सरस्वती (1988): लगभग 12 साल बाद, जब मिथुन चक्रवर्ती खुद एक बड़े स्टार बन गए थे और उनके ‘डिस्को डांसर’ का क्रेज दुनिया भर में फैल गया था, डायरेक्टर मनमोहन देसाई ने दोनों को ‘गंगा जमुना सरस्वती’ के लिए एक साथ लाया. अमिताभ बच्चन फिल्म में ‘गंगा’ के रोल में दिखे, जबकि मिथुन चक्रवर्ती ने ‘शंकर’ का रोल किया. फिल्म की नोकझोंक, दोस्ती और बाद में एक-दूसरे के लिए जान देने की इच्छा ने दर्शकों को खूब पसंद किया.

मनमोहन देसाई की फिल्मों का अपना एक अलग ‘मसाला’ होता था. ‘गंगा जमुना सरस्वती’ ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की. हालांकि इसे क्रिटिक्स से मिले-जुले रिव्यू मिले, लेकिन अमिताभ और मिथुन को एक साथ देखना फैंस के लिए एक असली ट्रीट था. फिल्म ने साबित कर दिया कि जब ये दो महान लोग मिलते हैं, तो सिनेमा में पैसों की बाढ़ आ जाती है.

3. अग्निपथ (1990): अब बात करते हैं उस तीसरी फिल्म की जिसने बॉलीवुड के इतिहास में अपनी जगह सुनहरे अक्षरों में लिख ली. ‘अग्निपथ’ जिसे मुकुल एस. आनंद ने डायरेक्ट किया था. अमिताभ बच्चन ने इस फिल्म में विजय दीनानाथ चौहान के रूप में अपनी सबसे जबरदस्त और यादगार परफॉर्मेंस में से एक दी, लेकिन फिल्म की जान मिथुन चक्रवर्ती के आने से खिल उठी. मिथुन ने कृष्णन अय्यर का रोल किया, जो एक नारियल पानी बेचने वाला था, यह रोल बॉलीवुड के सबसे आइकॉनिक सपोर्टिंग कैरेक्टर्स में से एक बन गया.

‘अग्निपथ’ के डायलॉग आज भी सबकी जुबान पर हैं. मिथुन के साउथ इंडियन एक्सेंट और अमिताभ की दमदार आवाज ने स्क्रीन पर जादू कर इतिहास रच दिया. इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन को अपना पहला नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला, जबकि मिथुन चक्रवर्ती को फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवॉर्ड मिला. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होने के बाद भी एक कल्ट क्लासिक साबित हुई. साथ ही यह 1990 की 10वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी. आज भी 36 साल बाद, जब लोग इस जोड़ी के बारे में बात करते हैं, तो ‘अग्निपथ’ का नाम सबसे पहले दिमाग में आता है.


