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गाजियाबाद का ऐतिहासिक घंटाघर, जानिए क्यों खास है 280 साल पुराना यह ‘जवाहर गेट’ और क्या है इसका फिल्मी कनेक्शन

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Published On: May 9, 2026

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Ghaziabad Ghantaghar History: गाजियाबाद का ऐतिहासिक घंटाघर, जिसे जवाहर गेट भी कहा जाता है, शहर की विरासत का जीवंत प्रतीक है. 1740 में मुगल वज़ीर गाजी-उद-दीन द्वारा ‘शाही गेट’ के रूप में निर्मित यह स्थल 1939 में क्लॉक टॉवर बना. ब्रिटिश और इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का यह संगम पुराने समय में समय बताने का मुख्य केंद्र था. आज यह एक व्यस्त व्यावसायिक केंद्र है, जिसका फिल्मी और क्रांतिकारी इतिहास भी रहा है.

​Ghaziabad Ghantaghar History: गाजियाबाद का ऐतिहासिक घंटाघर, जिसे जवाहर गेट भी कहा जाता है, शहर की विरासत का जीवंत प्रतीक है. 1740 में मुगल वज़ीर गाजी-उद-दीन द्वारा ‘शाही गेट’ के रूप में निर्मित यह स्थल 1939 में क्लॉक टॉवर बना. ब्रिटिश और इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का यह संगम पुराने समय में समय बताने का मुख्य केंद्र था. आज यह एक व्यस्त व्यावसायिक केंद्र है, जिसका फिल्मी और क्रांतिकारी इतिहास भी रहा है.  

विकाश रघुवंशी संस्थापक एवं प्रधान संपादक डिजिटल भारत न्यूज़ (डिजिटल मीडिया) एवं रघुवंशी वाइसहब (प्रिंट मीडिया) 📞 7403888881 विकाश रघुवंशी Digital Bharat News में पिछले छह वर्षों से सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में उन्हें 6 वर्ष से अधिक का अनुभव है। सोनभद्र में पत्रकारिता करते हुए उन्होंने स्थानीय मुद्दों, जनसरोकार और प्रशासनिक खबरों पर मजबूत पकड़ बनाई है। उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम और सामाजिक विषयों पर उनकी विशेष पकड़ है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी वे नियमित रूप से लिखते हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है। सरल और प्रभावी भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुँचाना उनकी विशेषता है। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने और लिखने में भी उनकी गहरी रुचि है। || भारत का तेजी से उभरता हुआ हिन्दी समाचार पत्र ||… Read More

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