ठंड के बाद गर्मी शुरू होते ही पशुओं पर असर पड़ता है और दूध उत्पादन कम होने लगता है, जिसे किसान आमतौर पर ‘दूध टूटना’ कहते हैं. पशु चिकित्सकों के अनुसार, गर्मी के मौसम में पशुओं के खानपान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. सही हरा चारा देने से दूध की मात्रा कम होने से बचाई जा सकती है. गर्मी में मेज, नेपियर घास, सूडान घास और बरसीम जैसे हरे चारे पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। ये पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं. इसके अलावा सहजन (मोरिंगा) पशुओं के लिए टॉनिक की तरह काम करता है. इसकी पत्तियां खिलाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और पशु स्वस्थ रहते हैं. वहीं, अजोला भी एक सस्ता और पौष्टिक विकल्प है, जिसमें प्रोटीन और खनिज भरपूर मात्रा में होते हैं. इसे नियमित रूप से खिलाने से दूध उत्पादन में सुधार होता है.
ठंड के बाद गर्मी शुरू होते ही पशुओं पर असर पड़ता है और दूध उत्पादन कम होने लगता है, जिसे किसान आमतौर पर ‘दूध टूटना’ कहते हैं. पशु चिकित्सकों के अनुसार, गर्मी के मौसम में पशुओं के खानपान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. सही हरा चारा देने से दूध की मात्रा कम होने से बचाई जा सकती है. गर्मी में मेज, नेपियर घास, सूडान घास और बरसीम जैसे हरे चारे पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। ये पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं. इसके अलावा सहजन (मोरिंगा) पशुओं के लिए टॉनिक की तरह काम करता है. इसकी पत्तियां खिलाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और पशु स्वस्थ रहते हैं. वहीं, अजोला भी एक सस्ता और पौष्टिक विकल्प है, जिसमें प्रोटीन और खनिज भरपूर मात्रा में होते हैं. इसे नियमित रूप से खिलाने से दूध उत्पादन में सुधार होता है.











