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90 के दशक में बॉलीवुड की गद्दी के लिए लड़ाई सिर्फ खान्स (सलमान, शाहरुख और आमिर खान) के बीच नहीं थी. उस दौर में अक्षय कुमार और अजय देवगन के रूप में दो ‘सुपरस्टार’ उभरे, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और बेमिसाल एक्शन से बॉक्स ऑफिस का समीकरण बदल दिया. जब सलमान, शाहरुख और आमिर खान अपनी रोमांटिक इमेज बना रहे थे, तब इन दोनों ने अपनी मजबूत इमेज से दर्शकों का दिल जीता. खासकर जब वे 1994 की फिल्म ‘सुहाग’ में एक साथ दिखे, तो इसने थिएटर में ऐसा धमाल मचाया कि बड़े-बड़े स्टार्स के रिकॉर्ड भी टूट गए.
नई दिल्ली. 90 का दशक बॉलीवुड के इतिहास का एक सुनहरा अध्याय है, जिसे अक्सर ‘खान तिकड़ी’ (सलमान, शाहरुख और आमिर) के उदय के रूप में याद किया जाता है. लेकिन अगर आप उस जमाने के सिनेमाई गलियारों को देखें तो आपको दो चमकते हुए नाम दिखेंगे, जिन्होंने अपनी मजबूत बॉडी और जबरदस्त स्टंट से बॉक्स ऑफिस पर एक अनोखा साम्राज्य खड़ा किया. ये दो दिग्गज थे अक्षय कुमार और अजय देवगन. (तस्वीर बनाने में AI की मदद ली गई है.)

आज भले ही खान्स का दबदबा कम होता दिख रहा है, लेकिन अजय और अक्षय की फिल्में आज भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर जाती हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 90 के दशक में एक समय ऐसा था जब डिस्ट्रीब्यूटर और सिंगल-स्क्रीन थिएटर मालिक अक्षय और अजय की फिल्मों के दीवाने थे. कहा तो ये भी जाता है कि इन दोनों ‘धुरंधरों’ ने बॉलीवुड के सबसे बड़े नामों की रातों की नींद उड़ा दी थी.

90 के दशक की शुरुआत में, जब शाहरुख खान ‘दीवाना’ और ‘बाजीगर’ से अपनी रोमांटिक एंटी-हीरो इमेज बना रहे थे और सलमान खान ‘मैंने प्यार किया’ से चॉकलेट बॉय बन चुके थे, तब अक्षय कुमार और अजय देवगन ने एक्शन को अपनी खासियत बना लिया था. 1991 में अजय देवगन की ‘फूल और कांटे’ से एंट्री, जिसमें वे दो मोटरसाइकिल पर सवार थे… ने युवाओं को अपनी ओर खींचा. अगले ही साल, 1992 में अक्षय कुमार ने ‘खिलाड़ी’ में अपनी मार्शल आर्ट स्किल्स से सबको हैरान कर दिया.
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ये दोनों स्टार्स उन दर्शकों की पहली पसंद बन गए जो थिएटर में जबरदस्त एक्शन और रोंगटे खड़े कर देने वाले स्टंट देखना चाहते थे. साल 1994 एक ऐतिहासिक साल था जब ये दोनों लेजेंड्स पहली बार स्क्रीन पर एक साथ दिखे. फिल्म थी ‘सुहाग.’ जब डायरेक्टर कुकू कोहली ने अक्षय और अजय को एक साथ कास्ट किया तो फिल्म इंडस्ट्री में तहलका मच गया. फिल्म के गाने, जैसे ‘गोरे गोरे मुखड़े पे,’ चार्टबस्टर्स में शामिल हुए, लेकिन असली हाईलाइट दोनों स्टार्स के बीच ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री थी.

अजय देवगन ने अपनी गहरी आंखों और गंभीर नेचर से दर्शकों को इम्प्रेस किया, वहीं अक्षय कुमार ने अपनी फुर्ती और कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को लुभाया. ‘सुहाग’ बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर रही, जिससे साबित हुआ कि जब ये दो शेर साथ आते हैं तो रिकॉर्ड टूटना तय है. हालांकि, 90 के दशक के बाद दोनों का फिर से साथ आना मुश्किल हो गया, लेकिन वे 2005 की फिल्म ‘इंसान’ में फिर से साथ आए. हालांकि फिल्म उतनी सफल नहीं रही, लेकिन अक्षय और अजय को साथ देखना दर्शकों के लिए एक ट्रीट था. उनके रिश्ते और प्रोफेशनल रिस्पेक्ट ने यह पक्का किया कि वे कभी एक-दूसरे के काम में रुकावट नहीं बने, बल्कि एक-दूसरे को कॉम्प्लिमेंट करते रहे.

सालों बाद, जब रोहित शेट्टी ने इन दोनों एक्टर्स को अपने ‘कॉप यूनिवर्स’ में ‘सूर्यवंशी’ के साथ फिर से साथ लाया तो यह बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी सफलता थी, जिसने महामारी के बाद बॉलीवुड में नई जान डाल दी. अजय देवगन की ‘सिंघम’ एंट्री और ‘सूर्यवंशी’ में अक्षय कुमार की फुर्ती ने साबित कर दिया कि समय भले ही बदल गया हो, लेकिन इन दिग्गजों का करिश्मा अभी भी बरकरार है.

कहा जाता है कि 90 के दशक में अक्षय और अजय की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनकी ‘कनेक्टिविटी’ थी. वे आम आदमी के हीरो थे. अक्षय की ‘खिलाड़ी’ सीरीज ने उन्हें हर युवा के लिए रोल मॉडल बना दिया, जबकि अजय की ‘विजयपथ’ और ‘दिलवाले’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक सीरियस लवर और बागी हीरो के रूप में स्थापित किया. जहां खान्स का सिनेमा अक्सर शानदार सेट और अनोखी जगहों पर होता था, वहीं अक्षय और अजय की फिल्में जमीन से जुड़ी होती थीं, जिनमें धूल, पसीना और असली स्टंट होते थे. यही वजह थी कि वे सिंगल-स्क्रीन थिएटर में छाए रहे.


