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कभी नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ‘भीख’ मांगने वाले ट्रंप के हाथ-पांव ईरान जंग के एक महीने में ही फूल गए हैं. खुद को शांतिदूत बताने वाले ट्रंप ने अब सेना के लिए $1.5 ट्रिलियन के भारी-भरकम ‘वॉर बजट’ की मांग की है. हैरान करने वाली बात यह है कि बारूद की इस भूख को मिटाने के लिए उन्होंने अमेरिकी जनता की शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी घरेलू सुविधाओं में 10% ($73 बिलियन) की बेरहम कटौती का प्रस्ताव दिया है.
ट्रंप अपनी पॉलिसी से यूटर्न लेते नजर आ रहे हैं.
कभी दुनिया के सामने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ‘भीख’ मांगने वाले और खुद को ‘शांतिदूत’ बताने वाले डोनाल्ड ट्रंप का 2026 की शुरुआत से ही असली चेहरा बेनकाब होना शुरू हो गया था. जो राष्ट्रपति कभी युद्ध खत्म करने की कसमें खाते थे, वही अब बारूद की अंतहीन भूख मिटाने के लिए अमेरिकी जनता की जेब पर डाका डालने की तैयारी में है. शुक्रवार को पेश होने वाले बजट प्रस्ताव में ट्रंप ने रक्षा खर्च के लिए $1.5 ट्रिलियन की ऐसी भारी-भरकम मांग की है जिसने दूसरे विश्व युद्ध की खौफनाक यादें ताजा कर दी हैं. ईरान के साथ जारी जंग के महज एक महीने में ही ट्रंप के हाथ-पांव इस कदर फूल गए हैं कि उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू कल्याणकारी योजनाओं के बजट में 10% ($73 बिलियन) की बेरहम कटौती का फरमान सुना दिया है.
साफ है कि अब अमेरिकी बच्चों के भविष्य और आम नागरिक की सुविधाओं की बलि देकर ईरान की आग में $350 बिलियन अतिरिक्त झोंके जाएंगे. शांति का ढोंग करने वाले ट्रंप का यह ‘वॉर बजट’ न केवल उनकी साख पर बट्टा लगा रहा है बल्कि मिडटर्म चुनावों से पहले अमेरिका को एक ऐसे विनाशकारी आर्थिक दलदल की ओर धकेल रहा है जहाँ से वापसी नामुमकिन लग रही है.
दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा उछाल
पेंटागन के बजट में यह एक साल की सबसे बड़ी वृद्धि है जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौर की याद दिलाती है. सर्वे बताते हैं कि अमेरिकी जनता पहले से ही इस युद्ध के औचित्य पर सवाल उठा रही है. ऐसे में नवंबर के मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले ट्रंप का यह ‘हॉक’ अवतार उनकी अपनी ही पार्टी के लिए सिरदर्द बन गया है. अगर कैपिटल हिल (संसद) में यह प्रस्ताव गिरा, तो यह ट्रंप की नीतियों की बहुत बड़ी हार मानी जाएगी.
सवाल-जवाब
क्या ट्रंप का यह रक्षा बजट अमेरिकी अर्थव्यवस्था को डुबो सकता है?
$1.5 ट्रिलियन का भारी बोझ और घरेलू योजनाओं में कटौती अमेरिकी मध्यम वर्ग में भारी असंतोष पैदा कर सकती है. रक्षा पर इतना बेतहाशा खर्च राजकोषीय घाटे को बढ़ाएगा, जिससे डॉलर की साख पर बुरा असर पड़ सकता है.
क्या अमेरिकी संसद इस कटौती को मंजूरी देगी?
रिपब्लिकन सांसद रक्षा बजट बढ़ाने के तो पक्षधर हैं, लेकिन चुनाव से पहले घरेलू योजनाओं में 10% कटौती उनके लिए ‘पॉलिटिकल सुसाइड’ जैसा होगा. इसलिए इस पर सदन में भारी घमासान तय है.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें


