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अक्षय कुमार की फिल्म ‘भूत बंगला’ जल्द ही रिलीज होने के लिए तैयार है. अपनी हॉरर-कॉमेडी की रिलीज से पहले अक्षय कुमार ने एक्शन फिल्मों के बदलते दौर के बारे में बात करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की. वो कहते हैं कि एआई औऱ वीएफएक्स के इस्तेमाल से किए गए एक्शन नकली लगते हैं. ऐसा लगता है कि दर्शकों को ठगा गया है. वो खुद ही अपनी फिल्मों में एक्शन करना चाहते हैं.
अक्षय कुमार की फिल्म ‘भूत बंगला’ जल्द ही रिलीज होने वाली है.
नई दिल्ली. अक्षय कुमार एक लंबे अरसे बाद प्रियदर्शन के साथ वापसी कर रहे हैं. एक्टर-डायरेक्टर की जोड़ी को फिर से एक साथ देखने के लिए दर्शक काफी उत्साहित हैं. अपकमिंग फिल्म ‘भूत बंगला’ की रिलीज से पहले अक्षय कुमार ने इन दिनों बन रही एक्शन फिल्मों पर अपनी नाराजगी जाहिर की है. एक्टर ने एक्शन फिल्मों में वीएफएक्स के बढ़ते इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वो अपनी फिल्मों में एआई और वीएफएक्स के इस्तेमाल से एक्शन नहीं करना चाहते हैं. वो असल में एक्शन करना चाहते हैं ताकि दर्शकों को ठगा हुआ न लगे.
पीटीआई से बात करते हुए अक्षय कहते हैं कि फिल्मों का दौर लगातार बदल रहा है, लेकिन एक्शन फिल्मों के बदलते चलन से वो नाखुश हैं. वो कहते हैं कि फिल्मों में एआई और वीएफएक्स का इस्तेमाल बढ़ते जा रहा है जिसकी वजह से फिल्में नकली सी लगने लगी हैं. अभिनेता ने साफ कर दिया है कि वे फिर से वही असली, जमीन से जुड़े एक्शन करना चाहते हैं, जिसे दर्शक सिर्फ देख न सकें, बल्कि महसूस भी कर सकें.
फिल्मों में वीएफएक्स के बढ़ते इस्तेमाल पर बोले अक्षय कुमार
वो कहते हैं, ‘आज एक्शन फिल्मों के बनाने का तरीका बहुत बदल गया है. पहले एक्शन असली होता था, अब सब कुछ वीएफएक्स में हो जाता है. इसमें मजा नहीं आता, ये नकली लगता है. मैं एक ऐसी फिल्म बनाना चाहता हूं, जो असली हो’. वो कहते हैं कि एक ऐसे एक्टर के लिए जिसने एक्शन से करियर की शुरुआत की थी उसके लिए वीएफएक्स के इस्तेमाल से किए गए एक्शन नकली लगते हैं.
खुद एक्शन करना चाहते हैं अक्षय कुमार
एक्टर आगे कहते हैं, ‘अगर मैं कूद रहा हूं, तो सच में कूद रहा हूं, वीएफएक्स का इस्तेमाल नहीं कर रहा. अगर मैं किक मार रहा हूं, तो सच में मार रहा हूं, न कि 15 लोग मेरी मदद कर रहे हैं. मैं बिना वीएफएक्स के एक्शन फिल्म बनाना चाहता हूं. मैं यह एआई के दौर में कह रहा हूं, लोग जो चाहें सोच सकते हैं, लेकिन मैं असली एक्शन फिल्म बनाना चाहता हूं. दर्शक महसूस कर सकें कि इसमें कितनी मेहनत लगी है, न कि एआई या कंप्यूटर की मदद से की गई मेहनत’.
अपनी बात समझाने के लिए अक्षय ने हाथ से बनी पेंटिंग और डिजिटल प्रिंट के बीच तुलना की. उनके लिए असली एक्शन वैसा है जैसे हाथ से बनाई गई पेंटिंग जिसमें खामियां, टेक्सचर और जान होती है जबकि VFX से भरे सीक्वेंस प्रिंटेड कॉपी की तरह होते हैं, जो दिखने में परफेक्ट तो लगते हैं, लेकिन उनमें आत्मा नहीं होती.
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प्रांजुल सिंह 3.5 साल से न्यूज18 हिंदी से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने Manorama School Of Communication (MASCOM) से जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है. वो 2.5 साल से एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही है…और पढ़ें


