सोनभद्र/ओबरा।तहसील अंतर्गत ग्राम बरहमोरी में संचालित बालू साइटों पर हो रहे कथित अवैध मोरम खनन, ओवरलोडिंग, सोन नदी की जलधारा के अवरोधन तथा पर्यावरण एवं जीव-जंतुओं को हो रही गंभीर क्षति के विरोध में स्थानीय मूल निवासियों एवं आदिवासी समाज के लोगों ने आज जिलाधिकारी सोनभद्र के समक्ष प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा।इस प्रदर्शन का नेतृत्व वरिष्ठ छात्रनेता एवं स्थानीय मूल निवासी दीपू शर्मा ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उपस्थित होकर प्रशासन से मामले में तत्काल,निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई की मांग की।प्रदर्शन के दौरान दीपू शर्मा ने कहा कि पिछले कई महीनों से लगभग डेढ़ सौ बीघा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिससे राज्य सरकार को भारी राजस्व क्षति हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अवैध खनन से न केवल पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है, बल्कि कैमूर क्षेत्र के वन्यजीवों एवं जलीय जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।उन्होंने प्रशासन के समक्ष दोहरी कार्रवाई का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि एक ओर बड़े स्तर पर अवैध खनन खुलेआम जारी है, वहीं दूसरी ओर यदि कोई स्थानीय मूल निवासी अपने घर निर्माण के लिए साइकिल से बोरी में थोड़ी मात्रा में बालू ले जाता है, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई कर उसकी साइकिल तक जब्त कर ली जाती है। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण और दोहरे मापदंड का स्पष्ट उदाहरण बताते हुए तत्काल समाप्त करने की मांग की।


ज्ञापन के माध्यम से यह भी मांग की गई कि सोन नदी की प्राकृतिक जलधारा का अवरोधन तत्काल रोका जाए तथा नदी में नाव लिफ्टर मशीनों के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, क्योंकि इन गतिविधियों से जलीय जीव-जंतुओं और नदी के प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।ग्रामीणों एवं प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि:-
स्थानीय मूल निवासियों एवं आदिवासी समुदाय का शोषण तत्काल बंद किया जाए,कैमूर क्षेत्र के वन्य एवं जलीय जीव-जंतुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए,रात्रिकालीन अवैध खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए,ओवरलोडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए,तथा पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।प्रदर्शन में रामचंद्र गोंड, केशव गोंड, दीनानाथ चौधरी, चन्दन गोंड, रामविलास गोंड, मोहन पनिका, सर्वदिन गोंड, गुलाब गोंड, शिवप्रसाद यादव, जयप्रसाद पनिका, रामसुभग गोंड सहित बड़ी संख्या में स्थानीय आदिवासी एवं मूल निवासी उपस्थित रहे।

