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अमेरिका इसी हफ्ते लगाने जा रहा 15% ग्लोबल टैरिफ, बेसेंट की धमकी- ट्रंप वाला पुराना रेट भी लौट सकता है!

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Published On: March 17, 2026

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अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि अमेरिका इसी हफ्ते दुनिया भर से आने वाले सामानों पर इंपोर्ट ड्यूटी को 10% से बढ़ाकर 15% कर सकता है. उन्होंने बताया कि 5 महीने के अंदर टैरिफ की दरें वहीं वापस जा सकती हैं जहां कोर्ट के ऑर्डर के पहले थी.

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नई दिल्ली. हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10% का यूनिवर्सल टैरिफ लगाया था, लेकिन अब इसे और बढ़ाए जाने की तैयारी है. ट्रेजरी सेक्रेटरी अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द ही अपने 10% यूनिवर्सल इंपोर्ट टैरिफ को 15 फीसदी तक बढ़ा सकता है. सीएनबीसी के साथ बातचीत में बेसेंट ने बताया कि यह बदलाव इस हफ्ते होने की संभावना है. यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी में एक और बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने टैरिफ ढांचे के बड़े हिस्से को रद्द कर दिया था.  इसके बाद ट्रंप ने 10% का नया यूनिवर्सल टैरिफ लगाया. हालांकि बेसेंट ने साफ किया कि मौजूदा कानून के तहत ये नए टैरिफ केवल 150 दिनों तक ही लागू रह सकते हैं.

5 महीने में वापस आ सकते हैं पुराने रेट्स
इस अवधि के दौरान अमेरिकी अधिकारी पुराने टैरिफ फ्रेमवर्क को दोबारा लागू करने के लिए वैकल्पिक कानूनी रास्ते तलाशेंगे. बेसेंट ने विश्वास जताया कि टैरिफ दरें 5 महीने के भीतर फिर से अपने पुराने स्तर पर लौट सकती हैं. उन्होंने कहा कि सेक्शन 301 और सेक्शन 232 के तहत लगाए जाने वाले टैरिफ धीमे जरूर हैं, लेकिन ज्यादा मजबूत हैं.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप को दिया था झटका
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की प्रमुख आर्थिक नीति को झटका देते हुए उनके वैश्विक टैरिफ को रद्द कर दिया था. इसके बाद कंपनियों ने रिफंड के लिए कानूनी लड़ाई भी शुरू कर दी है. इन घटनाक्रमों का असर ग्लोबल ट्रेड और निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्थाओं जैसे भारत, पर भी पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिका अपनी टैरिफ रणनीति में बदलाव कर रहा है.

ग्लोबल ऑयल मार्केट पर बयान
बेसेंट ने ग्लोबल ऑयल मार्केट को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की ग्लोबल सप्लाई पर्याप्त है और बाजार में घबराने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र से दूर समुद्र में सैकड़ों मिलियन बैरल तेल मौजूद है. उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका तेल जहाजों को बीमा सुविधा देने और ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की योजना पर काम कर रहा है.

कच्चे तेल और चीन
बेसेंट ने कहा कि चीन की ऊर्जा जरूरतों का 50% से अधिक हिस्सा पर्शियन गल्फ क्षेत्र से आता है. उन्होंने कहा कि चीन संभवतः 95% ईरानी कच्चा तेल खरीद रहा था, जो फिलहाल रुका हुआ है. स्पेन के साथ संभावित व्यापार प्रतिबंध के सवाल पर बेसेंट ने कहा कि अगर ऐसा कदम उठाया जाता है तो यह कई विभागों के संयुक्त प्रयास से होगा. हालांकि उन्होंने साफ तौर पर यह नहीं कहा कि ऐसा प्रतिबंध लगाया जाएगा या नहीं.

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विनय कुमार झा

प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन…और पढ़ें

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