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अब डकैती पर उतारू: गजब दुस्साहसिक हो चले हैं ओबरा के कबाड़ चोर कबाड़ी और नशेड़ी

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Published On: April 28, 2026

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  • दिन दहाड़े मंगलवार सुबह दस बजे वीआईपी रोड कान्वेंट के सामने बंद पड़े प्रेस कार्यालय का टिन शेड बेखौफ डकैती के अंदाज में ढहाया, ले जाने की फ़िराक़ में रहे, तेज़ आवाज़ आसपास की सक्रियता से भागे कबाड़ी।

ओबरा/सोनभद्र। ओबरा थाना अंतर्गत मंगलवार 28 अप्रैल 2026 को सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल के सामने ओबरा शापिंग परिसर मे, दिनदहाड़े, व्यस्त सड़क और दुकानें खुली होने के बावजूद ठेला लेकर आये दुस्साहसिक कबाड़ चोरों ने बंद पड़े संयुक्त प्रेस कार्यालय के सामने लगे टिन शेड को फिल्मी डकैतों के अंदाज़ में ढहा दिया।शेड गिरते ही हुई तेज़ आवाज़,अगल बगल की सक्रियता और तत्परता देख कबाड़ चोरों को भागना पड़ा।सूचना मिलते ही कार्यालय स्वामी ने डायल 112 को घटना की जानकारी देते हुए मौके पर पहुंचे और पुलिस को बयान दर्ज कराते हुए नुकसान और चोरों की कारस्तानी का जायज़ा लिया। मौजूद भीड़ ने डायल 112 को सलाह दिया कि स्कूल एवं आसपास लगे सीसीटीवी से कबाड़ चोरों तक पंहुचा जा सकता है।कबाड़ चोरों ने दूसरी बार कार्यालय पर धावा बोला। पहली बार ओबरा थानाध्यक्ष मिथिलेश मिश्रा के कार्यकाल में कार्यालय का ताला तोड़ अंदर से कुर्सी,मेज,कम्प्यूटर, सीपीयू सेट, सीलिंग फैन, इन्वर्टर, बैटरी व आफिस की सारी पत्रावली, स्टेशनरी समेत दरवाजा तक उखाड़ ले गये थे, तब भी डायल 112 समेत थाने में घटना की सूचना दी गई थी, कार्रवाई के अभाव में मनबढ़ कबाड़ चोरों ने मंगलवार को बेखौफ डकैतों के अंदाज़ में दिन दहाड़े, टिन शेड पर धावा बोला और एक साथ पूरा शेड ही ढहा दिया। तेज़ आवाज़,आसपास की सक्रियता से उनकी कबाड़ चोरी की मंशा विफल हो गई।
बता दें कि परियोजना प्रबंधन द्वारा ओबरा शापिंग कांप्लेक्स में बेरोज़गारी प्रबंधन और कर्मचारियों की सुविधा व एक ही परिसर में आवश्यक सामानों की उपलब्धता हेतु वर्ष 1997 में लगभग डेढ़ दर्जन दुकानें/चबूतरा आवंटित किया था। परियोजना प्रबंधन द्वारा दुकानों के सामने सड़क की पटरी से दीवार उठा दिए जाने से जहां दुकानदार बेरोजगार हो गए वहीं कांप्लेक्स की सारी दुकानों को आये दिन कबाड़ चोर निशाना बनाकर जहां खंखाड़ करते चले जा रहे हैं। बंद दुकानों के टिन शेड, गुमटियां, लोहे के दरवाजे तोड़ कर बेखौफ बेच दे रहे हैं। दीवार उठ जाने से पूरा कांप्लेक्स जरायमपेशा/कबाड़ियों/नशेड़ियों का अड्डा बनता जा रहा है रात में तो बाउंड्री उस पार असमाजिक तत्वों का साम्राज्य स्थापित हो जाता है, परियोजना सम्पत्तियों के प्रहरी भूतपूर्व सैनिक भी कहीं न कहीं लम्बे समय से उदासीन पड़े हैं।

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  • धोबिया नाला के सामने दीवार पार से बाइक द्वारा कपड़ा ओढ़ाकर पार होता है कबाड़,
  • जब चाहे सीविल कपड़ों में मौजूद रहकर माल बरामद कर सकते हैं, डायल 112 से कहा स्थानीय भीड़ ने।

ओबरा नगर पंचायत क्षेत्र में कबाड़ियों की आई बाढ़, दरवाज़े, आंगन में रखे कम उपयोगी सामानों की चोरी, बंद पड़े क्रशर प्लांटों पर चोरी ने असुरक्षित माहौल को जन्म दिया है।मंगलवार को ओबरा के सेक्रेड हर्ट कान्वेंट के सामने बंद पड़ी दुकान पर जिस मनबढ़ई से कबाड़ चोरो ने धावा बोला, शहरी क्षेत्र में विकसित इस डकैती रुपी कबाड़ चोरी की नई परिपाटी ने जहां गम्भीर चिंतन को जन्म दिया वहीं मौके पर मौजूद भीड़, आसपास के दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर घटना स्थल पर मौजूद डायल 112 को चुनौती के अंदाज़ में अवगत कराया कि हर दिन धोबिया नाला के सामने मौजूद गली से दिन भर में 4-5 कुंतल कबाड़, मोटर साइकिल से कपड़ा ओढ़ा कर पार कराया जाता है। जब चाहे सीविल कपड़ों में मौजूद रहकर माल बरामद कर सकते हैं। दिन दहाड़े हर दिन मौका देख कर कबाड़चोर मोटर साइकिल पर किसी को बैठाकर इसी सड़क से निकलते हैं। लोगों ने बताया कि परियोजना की सम्पत्तियों, बंद पड़े घरों, वाटर पम्प समेत व कबाड़ की चोरी होती है। परियोजना के कालोनियों के सुरक्षा गार्ड भी सब जानते हैं पर———–

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  • दर्जन भर से अधिक कबाड़ियों की दुकानें ओबरा में हैं संचालित *
    हाल के कुछ वर्षों में कबाड़ियों की ओबरा नगर पंचायत क्षेत्र में बाढ़ सी आ गई है। मंगलवार को ओबरा के सेक्रेड हर्ट कान्वेंट के सामने बंद पड़ी दुकान पर जिस मनबढ़ई से कबाड़ चोरो ने धावा बोला, शहरी क्षेत्र में विकसित इस डकैतीरुपी कबाड़ चोरी की नई परिपाटी ने गम्भीर चिंतन आमंत्रित किया है।मिली जानकारी के अनुसार दर्जन भर से अधिक दुकानें ओबरा के नगरीय क्षेत्र में संचालित होने का क्या अर्थ निकाला जाये। क्या यह सभी दुकानें वैध हैं, क्या इनकी मानीटरिंग होती है,क्या जब ट्रकों पर कबाड़ लोड कर बाहर बेचने जाती हैं तब ओबरा से निकलने से पहले इनकी चेकिंग, स्कैनिंग होती है? कौन तय करेगा लोगों के घरों,दरवाज़े, आंगन,व्यवसायिक प्रतिष्ठानों,दुकानों से चोरी होने वाले मेंटल, प्लास्टिक, पाईप, टायरों, बैटरियों की चोरी की जवाबदेही।आखिर दर्जन भर से अधिक दुकानें किस निष्प्रयोज्य कबाड़ के भरोसे चल रही हैं। इतना दुस्साहस कि घरों, दुकानों, लोगों के रहते आंगन से वाटर पम्प, मोटर, एसी, बंद पड़े मकानों, क्रशरों, फैक्ट्रियों से आये दिन बेखौफ चोरी किसकी शह पर और कौन है इनका ज़िल्ले इलाही, सवाल का जवाब अधिकांश पीड़ित जानते हैं पर यह परिपाटी चल पड़ी है, यह रही केवल ओबरा नगरीय क्षेत्र की पीड़ा। चोपन, डाला, ब्लाक, तहसील से हटकर बात करें तो लगभग सभी विधानसभाओं इनकी पैठ बना चुकी है, नैदानिक उपाय और चिंतन की जिसका दायित्व जिसका है वह अलग ही सलाह देता है।

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